भविष्य को संभालने से पहले

Mattu-Manay-IHS

अपने भविष्य को गढ़ने के तमाम तरीके हैं। भविष्य वो चीज है, जिसका कोई अस्त्तिव नहीं होता। हमारे अनुभव में इसका अस्तित्व नहीं होता पर यह एक संभावना के रूप में होता है। कुछ लोग अपनी बाध्यताओं और मजबूरियों के अनुसार अपने भविष्य की योजना बनाते हैं, जबकि कुछ लोग अपना भविष्य सोच समझकर, सचेतन नियोजित करते हैं तो कुछ लोग अपना भविष्य बिना सोचे समझे तय करते हैं। लेकिन हम अपने जीवन के साथ क्या करना चाहते हैं, यह सोच समझ कर सचेतन तय करना बड़ा महत्वपूर्ण होता है। आप सचेत होकर जो भी चुनेंगे, वह निश्चित रूप से फल देगा। आप क्या चुनते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि आप जो भी चुनते हैं, उसके पीछे अपनी जिंदगी लगा देते हैं, आप उसमें खुद को झोकने के लिए तैयार रहते हैं। यानी एक तरह से जिस भविष्य का फिलहाल अस्तित्व ही नहीं है, उसे आप एक योजना के तहत यथार्थ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह घटना उस समय की है, जब जॉर्ज डब्ल्यू बुश अमेरिका के राष्ट्रपति थे। एक बार एक ईरानी उनसे मिलने आया। उसने बुश से कहा- ‘राष्ट्रपति महोदय, मेरा आठ साल का बेटा काफी निराश है, उसे लगता है कि स्टार ट्रेक फिल्मों की श्रृंखला में तमाम तरह के लोग हैं, मसलन चेकोव रूस से है, सुलू चीन से है, स्कॉटी स्कॉटलैंड से है, जबकि ईरान से कोई भी नहीं है। आखिर स्टार ट्रेक में ईरानियों को जगह क्यों नहीं दी गई?’ यह सुन कर बुश ने एक बार उस ईरानी को देखा और फिर बोले- ‘क्योंकि यह भविष्य में होगा।’

आप एक बीज बोते हैं और भविष्य में उसके फलने का इंतजार करते हैं, एक तरीका तो यह है। दूसरा तरीका है कि अपने भविष्य को आप खुद गढ़ सकते हैं। या फिर एक और तरीके है कि आप खुद को एक सही नाव में रखें, जब हवा अनुकूल होगी तो खुद को हवा के रुख पर छोड़ दें, यह वहां खुद चली जाएगी जहां इसे जाना होगा। अपने भविष्य को चुनने के ये तमाम तरीके हैं। लेकिन आपको एक बात समझना जरूरी है कि यहां आप उस चीज को संभालने की कोशिश नहीं कर रहे हैं जो फिलाहाल है, बल्कि उस चीज को संभलने की कोशिश  कर रहे हैं, जो अभी है ही नहीं। आप उसे नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो अभी होनी है। कुदरत का तरीका ही कुछ ऐसा है कि जब कोई बच्चा अपने मां के गर्भ में होता है तो उसका हर पल पोषण मां के शरीर द्वारा होता है, लेकिन वह न तो मां के चेहरे को जानता है और न ही मां ने बच्चे का चेहरा देखा होता है। हालांकि दोनों भीतर से एक होने के बावजूद एक दूसरे से अनजान होते हैं। इसी तरह से आप भी इस सष्टि के भीतर हैं, न कि उससे बाहर। कई तरीके से अगर देखा जाए तो आप सृष्टि की गोद में हैं या फिर कहें कि रचयिता के गर्भ में। फिर भी जब तक आप अपने आवरण से बाहर नहीं आते, अपनी आरामदायक स्थिति से बाहर नहीं निकलते, तब तक आप रचयिता के चेहरे को नहीं देख पाएंगे और न ही वो आपके चेहरे को देख पाएगा।

कहने को गर्भ एक शानदार जगह है, लेकिन उसकी एक बड़ी दिक्कत है कि वहां काफी अंधेरा होता है। वहां आपकी आंखें बंद होती हैं और आप कुछ भी देख नहीं पाते हैं। अगर आप अपनी आंखें खोल पाते और किसी तरह की रोशनी वहां कर पाते तो आपको पता चलता कि जिंदगी कैसे बनती है। तब शायद आप जीवन के स्रोत को जान पाते, तब आप उसे खोज पाते। लेकिन दिक्कत यह है कि उस दौरान न सिर्फ वहां अंधेरा होता है, बल्कि उसके साथ-साथ आपकी आंखें भी बंद होती हैं। एक बार दो आदमी कुएं में गिर जाते हैं। उनमें से एक व्यक्ति दूसरे से कहता है, ‘यहां बहुत अंधेरा है। है ना?’ दूसरा जवाब देता है, ‘पता नहीं, मैं तो कुछ भी नहीं देख पा रहा हूं।’ तो भविष्य भी कुछ ऐसा ही है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने कितनी बार हाथ की लकीरों को पढ़ा या पढ़वाया होगा, कितनी बार आपने ग्रह- नक्षत्रों की गणना और चाल जानने की कोशिश की होगी, कितनी बार आपने अपनी जन्मकुंडली पर विशेषज्ञों से सलाह ली होगी, फिर भी आप अपने भविष्य के बारे में कुछ नहीं जानते, उसे लेकर अंधेरे में हैं। और जीने की एकमात्र वजह भी यही है कि आप नहीं जानते कि अगले पल में क्या होने वाला है, इसीलिए जीवन जीने लायक है।

मैं यह नहीं कह रहा कि अंधेरा कोई खराब या नकारात्मक चीज है। प्रकाश तो बहुत छोटी सी चीज है, यह खुद को जलाकर खत्म कर लेती है। जबकि अंधेरा कोई छोटी चीज नहीं है, यह अनंत और अपरिमित संभावना है, क्योंकि अंधेरा प्रकाश की तरह मौजूद नहीं रहता, बल्कि यह तो एक गैरमौजूदी या अनुपस्थिती है, जिसका मतलब है कि यह आपको आजादी देता है कि आप इसके साथ जो करना चाहें वो करें। लेकिन इसके साथ अपना मनचाहा करने के लिए भी आपके पास अपना एक स्थायित्व व संतुलन होना जरूरी है। हो सकता है कि आप बुद्धिमान, पढे-लिखे और सक्षम हों, लेकिन आपमें अगर संतुलन नहीं है और आप इधर उधर डगमगा रहे हैं तो आप एक बहुत बड़ी त्रासदी साबित होंगे। अगर आप बुद्धिमान हैं और संतुलित नहीं तो आप और भारी त्रासदी साबित हो सकते हैं। अगर आप थोड़े बेवकूफ हैं तो आप कम खतरनाक हैं, क्योंकि बुद्धि या समझ आपको अपना मनचाहा करने के लिए प्रवृत्त करती है। अकसर हम चाहते हैं कि वाहन तेज चले, लेकिन अगर यह टकराता या दुर्घटनाग्रस्त होता है तो हादसे का स्वरूप बड़ा होता है। आपने यह तो सुना ही होगा- ‘तुम जितना ऊपर जाओगे, गिरने पर तुम्हें उतनी ज्यादा चोट लगेगी।’

आपकी बुद्धिमानी, काबिलियत, क्षमता और आपकी योग्यताएं तबाही या बर्बादी से आपका बचाव नहीं करती, बल्कि आपका संतुलन ही आपको बर्बादी से बचाता है। इसीलिए जब पतंजलि से योग के तीसरे अंग, आसन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा, ‘स्थिरं, सुखं, आसनम’। यानी जिसका मतलब है, जिसमें सुख हो और स्थिरता मिलती हो, वही आसन है। आराम का मतलब है कि आप अपने साथ चैन से हैं और स्थिर हैं। अगर आपके जीवन में ये दो चीजें हैं तो आप जीवन के पूर्ण क्षमता को जानेंगे। अगर आपमें बुद्धिमानी या समझदारी, काबिलियत और योग्यता हो तो भी आप जीवन के पूर्ण क्षमता को नहीं जानेंगे उसके लिए आपको अपने आपमें स्थिरता, सहजता व संतुलन की जरूरत होती है।

इससे पहले कि हम उस भविष्य को संभालने की कोशिश करें, जो है ही नहीं, इससे पहले हमें सहजता और स्थिरता को हासिल करना पड़ेगा। अगर आपने इन दोनों चीजों को साध लिया तो बाकी चीजें तो अपने आप हो जांएगी। अगर आप हर वक्त सहज और स्थिर है तो बाकी चीजें अपने आप आपकी क्षमताओं और परिस्थितियों के अनुसार होने लगेंगी। हालांकि इसमें बहुत सारे कारक होते हैं, लेकिन ये सभी कारक आपके फायदे के लिए काम करने लगेंगे। अगर आपके जीवन में ये दोनों चीजें- सहजता या स्थिरता नहीं है तो आप देखेंगे कि एक दिन आप जोश में भरे घूमेंगे, जबकि अगले ही दिन टूटे और बिखरे हुए नजर आएंगे। तो इसस के पहले कि हम अपना भविष्य तय करें, उससे पहले हमें अपने वर्तमान में सहजता और स्थिरता जैसे आयामों को लाना बहुत जरूरी है।

प्रेम व प्रसाद,

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  • Vinod

    सद्गुरु मैं ये सब कुछ पढ़ रहा हूँ जानकारी भी अदभुत है पर जैसे कुछ समझ नहीं आरहा है, ओह मेरे से आज प्रक्टिस छूट गई थी