अनन्त को पाने की तड़प

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अनन्त को पाने की तड़प ने
दी मुझे वो दृष्टि
जो बचपन से ही देख पाती थी
उसके भी परे जो होता सामने मेरे
परे की वह दृष्टि
नहीं थी दूर या निकट के लिए
वह चाहती थी जाना हर सीमा से परे
जो सीमित है, देख पाता था बंधन उसमें
पर उसके साथ कभी तुष्ट नहीं हो पाया मैं

परम तत्व बरसा मुझ पर वाह खूब
अपनी आभा और आनंद से भरपूर,
जिसने किया मुझे मानवता से कुछ यूं धन्य
जैसे हुआ न था कोइ मानव अन्य
जिसने मिटा दी-उस विभाजक रेखा को
करती है जो अलग, मानवता और दैविकता को

पर हैं इस सीमित के भी
मजे अलग, तमाशे अलग
देखो है यह संसार सीमित,
सीमित यह तन, मन भी सीमित
है ये पूरी रचना ही सीमित।

सकल रचना व उसकी शक्तियां सारी
है अंकों का एक खेल भारी
जो खेली जाती है
शून्य की सीमाओं में।

असीमित शून्य ने ही तो दिया
अंकों की इस माया को जन्म
बेशक मेरा क्षेत्र है अनंत
पर खेल लेता हूं मैं
उतनी ही कुशलता से
अंकों का यह खेल भी।

 

जी हां, अब मैं लाइसेंसशुदा पाइलट होने से महज एक कदम दूर हूं। फेडरल एविएशन अथॉरिटी (एफएए) टेस्ट के दौरान बस मैं जो एक ही काम नहीं कर पाया, वह थी-लगातार 5 घंटों तक एकल उडान, जिसे ’ क्रॅास कंट्री’ भी कहते हैं। और वो मैं इसलिए नहीं कर पाया, क्योंकि एक तो मेरे पास वक्त की कमी थी और दूसरा, यहां का खराब मौसम। वैसे मात्र चार दिन की तैयारी में एफएए टेस्ट देना भी अपने आप में बड़ी बात है। समय की कमी के चलते उड़ान के लिए जरूरी वायुगतिकीय यानी एयरोडानैमिक्स, हेली इंजीनियरिंग, नौसंचालन यानी नेविगेशन, विमानन विनियम, विमानन परंपरा और शब्दावली की बारीकियां समझने के लिए मुझे रोजाना 18 से 20 घंटे कड़ी मेहनत करनी पड़ी। गणित का इस्तेमाल होने के बावजूद मेरा प्रदर्शन बढ़िया रहा। यही एक चीज थी, जिसमें मैं अपने स्कूली दिनों में भी अच्छा नहीं कर पाया। मुझे जो नंबर मिलते थे, वे भी अपने आप में एक किस्म का रिकॉर्ड था। पूरे जीवन में 100 के नजदीक पहुंचना मेरे लिए काफी मुश्‍किल हुआ करता था, क्यकि मैं ताउम्र 0 के आसपास रहा। देखा जाए तो यह मेरे जीवन का वह समय है, जब मेरा जीवन पूरी तरह से उन्हीं बातों पर निर्भर करता है, जिनका फिलहाल मैं अध्ययन कर रहा हूं और जिन्हें मैं समझने की कोशिश कर रहा हूं।

न्यूयार्क में शांभवी की दीक्षा का कार्यक्रम काफी अच्छा रहा। जिसमें तकरीबन 350  लोगों ने भाग लिया। हालांकि अमेरिका को देखते हुए यह तादाद अपने आप में खासी थी। ऑनलाइन इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं। यह लोगों को तैयार करने के लिए लाइव प्रोग्राम से ज्यादा कारगर जरिया है। इसमें भाग लेने वाले तरह-तरह के और काफी मजेदार लोग थे। मैं  कोशिश कर रहा हूं कि  ऑनलाइन इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए मेडिटेटर साधकों द्वारा संचालित कंपनियों को साथ जोड़ा जाए। अब कोई व्यक्ति या समूह इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रमों को ऑनलाइन शुरू करने के लिए कंपनी बना सकता है। यह उनके लिए एक आकर्षक प्रपोजल हो सकता है। और हां, कई लोगों को इस कार्यक्रम में जोड़ने का जो आनंद है, वह तो है ही।

न्यूर्याक में तीन दिनों में कुछ वार्ताएं हुई। जबकि ज्यादातर समय बिजनेस मींटिंगों में बीता। अगर इन मीटिंगों से कोई सकारात्मक नतीजे निकलते हैं तो यह ईशा के व्यवसायिक हितों की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। इससे ग्रामीण भारत में चलने वाले ईशा के शिक्षा कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिए बल मिलेगा। दरअसल, जब तक हम भारत के ग्रामीण समाज को शिक्षित नहीं करते, तब तक देश सही मायनों में आगे नहीं बढ़ सकता। इस क्षेत्र की अपनी तमाम गंभीर कमियां हैं। साक्षरों की जो संख्या पेश की जाती है, वह वस्तुस्थिति की सही तस्वीर पेश नहीं करती।

न्यूयॉर्क में कलाप्रेमियों से मिलना काफी सुखद रहा। आने वाले कुछ घंटे मैं यहां के एक बेहद नामी चित्रकार के साथ समय बिताने जा रहा हूं। हो सकता है आने वाले समय में अगर मुझे मौका मिले तो मैं चित्रकारी में हाथ आजमाते हुए एक या दो चित्र बना डालूं।

प्रेम व प्रसाद,

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