आप एक केमिकल सूप हैं

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सद्‌गुरु, आपने पिछली चर्चा में बताया था कि इंसान की बहुत सी बीमारियों का जन्म उसके मन में होता है। इसके पीछे किस तरह के विचार और भावनाएं होती हैं?

आपके हर विचार के हिसाब से आपके शरीर की रासायनिक संरचना बदल जाती है। आप एक केमिकल सूूप हैं, आप इसे जैसे चलाएंगे या हिलाएंगे, आप वैसा ही बन जाएंगे।
मान लीजिए कि अचानक आपके दायें हाथ ने कुछ अजीबोगरीब हरकतें करनी शुरू कर दी। जैसे इसने आपको मारना शुरू कर दिया, आपकी आंखों में उंगली डाल दी या इधर उधर से खोदना शुरू कर दिया। तो क्या आप कहेंगे कि आपको बीमारी है। जाहिर है, आपको बीमारी है। ठीक आपका दिमाग भी आपके साथ ऐसा ही कर रहा है। यह अचानक सक्रिय होता है, इधर उधर चलता है, आपको परेशान करता है, रुलाता है और तकलीफ देता है। यह परेशानी बहुत से लोगों को है। आप चाहें तो बीमार लोगें की एक फौज खड़ी कर सकते हैं!

दिमाग की यह बीमारी शरीर में कई रूपों में प्रकट होती है। इसमें कोई दो राय नहीं है। आपके मन के स्तर पर जो भी विचार या प्रतिबिंब उभरता है, उससे आपके शरीर की पूरी केमिस्ट्री बदल जाती है। इसे बाकायदा नापा जा चुका है। अगर आपके मन में शेर का ख्याल आता है तो आपके शरीर की रासायनिक दशा एक तरह की होगी, अगर आप फूल के बारे में सोचते हैं तो इसमें बदलाव आएगा और यह दूसरी तरह की होगी। आपके हर विचार के हिसाब से आपके शरीर की रासायनिक संरचना बदल जाती है। आप एक केमिकल सूूप हैं, आप इसे जैसे चलाएंगे या हिलाएंगे, आप वैसा ही बन जाएंगे। लेकिन मान लीजिए कि अगर आपका मन आपके खिलाफ काम करने लगे तो पता है आप किस तरह का सूप बनाएंगे अपने भीतर ? तब वह बेहद घटिया सूप होगा, सिर्फ घटिया ही नहीं, बल्कि जहारीला भी। अगर आप रोज ही जहरीले सूप को अपने अंदर भर रहे हैं तो आपका कभी कल्याण नहीं हो सकता। आज हमारा दुुनिया पर कोई खास नियंत्रण नहीं रहा है, हम जो भी खाते, पीते या सांस लेते हैं, वे सब, कुछ हद तक जहरीले हो चुके हैं। लेकिन अगर आप अपनी मदद खुद करके अपने लिए कुछ करना चाहते हैं तो आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आप इसके लिए कितनी शिद्यत से कोशिश करते हैं।

अगर आप अपने भीतर लगातार खराब और घटिया रसायन तैयार कर रहे हैं तो आपके भीतर का जीवन यह कैसे समझेगा कि आप अपनी भलाई चाहते हैं ?
प्राचीन समाज में रोग को हमेशा एक गलत या गड़बड़ चीज के तौर पर देखा जाता था। उन्हें इस बात की जानकारी थी कि इंसान को किसी भी तरह की बीमारी नहीं होना चाहिए। लेकिन आज का समाज बीमारी को सामान्य बात समझ कर उसका इलाज कर रहा है। दरअसल, आजकल इलाज बाकायदा एक उद्योग का रूप ले चुका है, जो आप के बलबूते पर फलफूल रहा है। आज दवा उद्योग इस दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग बन चुका है, क्योंकि लगातार रोग और समस्याएं अपनी जड़ें आपके भीतर जमाते रहे हैं और आप एक खराब सूप में बदलते जा रहे हैं। हां, अगर आप तैयार हों तो हम आपको एक शानदार सूप में बदल सकते हैं, जिसकी रासायनिक संरचना बेहतरीन होगी, जहां आप स्वाभाविक तौर पर आनंद से भरे रहेंगे। अगर लोग इस रास्ते पर चलने लगें तो इस धरती से तकरीबन 70 फीसदी बीमारियां मिट जाएंगी। बची हुई 30 फीसदी बीमारियां बाहरी कारणों से होती हैं, जिन पर हमारा नियंत्रण नहीं है। आपको पता नहीं है कि आपके बगल में एक पक्षी, सुअर या गाय बैठे हुए हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो आपको पता नहीं है कि आपको बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू या मैड काउ डिजीज हो सकती है। आप कुछ हद तो इनसे बचने के लिए सावधानी बरत सकते हैं, लेकिन पूरी तरह बचना मुश्किल है। लेकिन अगर आप अपने भीतर की चीजों को पूरी तरह से अपने हाथ में ले लें तो आप सौ फीसदी अच्छा हो सकते हैं।

अगर आप अपने शारीरिक तंत्र को भीतर से जहरीला बना रहे हैं तो आप कैसे अच्छे से रह सकते हैं। जीवन इस तरह नहीं चलता। जब तक आप सही काम नहीं करते, तब तक आपके साथ सही घटित नहीं होता।
अगर आप अपने भीतर लगातार खराब और घटिया रसायन तैयार कर रहे हैं तो आपके भीतर का जीवन यह कैसे समझेगा कि आप अपनी भलाई चाहते हैं ? बल्कि तब आपके भीतर का जीवन यह सोचेगा कि ‘आपको बीमारी ही पंसद है’ और नतीजा यह होगा कि जीवन आपको बिमारी ही देगा। कुछ लोगों का सिस्टम बहुत तगड़ा होता है, जो तमाम झटके झेल लेता है। जबकि दूसरे लोग अपने द्वारा तैयार किए घटिया सूप का स्वाद चखते ही गिर पड़ते हैं।

मैं जानता हूं कि जब कोई कहता है ‘मैं ठीक नहीं हूं’ तो समझा जाता है कि आप उससे मीठी और हमदर्दी भरी बातें करेंगे। लेकिन मैं ऐसा नहीं हूं। मैं सांत्वना नहीं देता, समाधान देता हूं। अगर आप अपने शारीरिक तंत्र को भीतर से जहरीला बना रहे हैं तो आप कैसे अच्छे से रह सकते हैं। जीवन इस तरह नहीं चलता। जब तक आप सही काम नहीं करते, तब तक आपके साथ सही घटित नहीं होता।

इस सृष्टि का सबसे पावन सूप तो आपके शरीर में छिपा हुआ है। अगर सूप में सब्जियां दिखाई देती हैं तो हम उसे ‘वेजिटेबल सूप’ कहते हैं। तो आप अपने आपको एक शानदार ‘आत्मिक सूप’ बनाइए।

प्रेम व प्रसाद,

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