2014 – खुशी व आनंद भरा


अगर आप अपने भीतर सृष्टि के स्रोत को प्रकट होने का मौका दें तो फिर आप किसी और दशा में नहीं- सिर्फ खुशी और आनंद में ही रहेंगे।

मिस्र में एक दंतकथा कही जाती है। अगर कोई व्यक्ति स्वर्ग में प्रवेश पाना चाहता है तो स्वर्ग के प्रवेश द्वार पर उसे दो सवालों के जवाब देने होते हैं। अगर आपने इन दोनों सवालों के जवाब ‘हां’ में नहीं दिए तो आपको स्वर्ग में प्रवेश नहीं मिलता। इसमें पहला सवाल है – ‘क्या जीवन में आपने खुशी और आनंद का अनुभव किया है?’ और दूसरा सवाल है- ‘क्या आपने अपने आस पास के लोगों को खुशी बांटी है?’ इन दोनों ही सवालों के लिए आपका जवाब अगर ‘हां’ है तो मैं आपको यह बता दूं कि आप तो पहले से ही स्वर्ग में हैं।

आप खुद के लिए और अपने आसपास के लोगों के लिए सबसे अच्छी चीज जो कर सकते हैं, वह है खुद को एक आनंदमय इंसान बनाना। खासकर आज के दौर में जब क्रोध, नफरत और असहनशीलता भयानक तौर से लोगों के सिर चढ़कर बोल रही है, ऐसे में आनंद से भरा इंसान ही सबसे बड़ी राहत नजर आता है। जो लोग आनंदमय होने का महत्व जानते हैं, वही हर तरफ आनंद का माहौल बनाने की कोशिश करेंगे।

मेरी यह कामना है कि आप जो कुछ भी अपने हाथ में लें वह आनंदमय हो जाए। आप आनंदमय बनाने की तृप्ति को जानें।

नए साल को समर्पण व अर्पण के रूप में शुरु करें और इसे दिन ब दिन बढ़ने दें। खुद को हमेशा अर्पण की तरह रखें और देंखें कि आप अपने आसपास के लोगों के लिए क्या कर सकते हैं। अगर आप खुद को ऐसे रख पाते हैं तो सहज ही आपका जीवन चमक उठेगा। जीवन की सुंदरता इसमें नहीं है कि आपने क्या हासिल किया या आपके पास क्या है, बल्कि इसमें निहित है कि आप अपने भीतर कैसे जीतें हैं। मेरी कामना है कि आप एक अर्पण बनें जो आपको ईश्वर का सानिध्य दिलाए।

कामना है कि आप दिव्य आनंद को जानें!

प्रेम व प्रसाद,

 

 


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