रैपिड फायर : करण जौहर के सवाल और सद्‌गुरु के जवाब


सद्‌गुरुसद्‌गुरु और करण जौहर के बीच 4 जून 2017 के दिन मुंबई में हुए संवाद में करण जौहर ने एक रैपिड फायर राउंड में सद्‌गुरु से कई सवाल पूछे। पढ़ते हैं करण के सवाल और सद्‌गुरु के जवाब–

करण जौहर : सद्‌गुरु र्मैं आपसे एक इजाजत चाहता हूं। मैं आमतौर पर टीवी पर जो शो होस्ट करता हूं, उसमें एक राउंड होता है, रैपिड फायर राउंड का, जिससे मैं मेहमान से दनादन सवाल करता जाता हूं।

सद्‌गुरु : जब मैं छोटा था, तो मैं मारधाड़ से भरी वेस्टर्न मूवीज ख़ूब देखता था। तो जब आप मुझ पर सवाल दागेंगे तो जवाब में मैं भी सवाल दागूंगा। ठीक है? [तालियाँ और हँसी]

करण जौहर : नहीं, मैं आपसे वादा करता हूं कि ये वैसा नहीं होगा… मेरा आपके ऊपर सवालों की गोलियाँ बरसाने का कोई इरादा नहीं है। मैं उस तरह का इंसान बनने की स्वतंत्रता नहीं लूँगा। ये बस फटाफट वाले सवाल होंगे, और अगर मैं आपसे बस एक शब्द में उत्तर चाहूं तो आपको बस उतना ही जवाब देना है। दरअसल, आपकी एक आदत है कि कभी-कभी आप उस बात का जवाब नहीं देते जो आपसे सवाल में पूछी गई है। उसकी जगह आप पलटकर ऐसा बेहद गहन व बौद्धिक जवाब देते हैं, कि प्रश्नकर्ता संतुष्ट हो जाता है। लेकिन मेरा आपसे सिर्फ़ कहना है कि जवाब एक शब्द का ही होना चाहिए।

सद्‌गुरु : [सद्‌गुरु हँसते हैं] ठीक है।

करण जौहर : अच्छा, एक आसान सा सवाल है, आख़िर वो कौन सी एक चीज़ है जो एक संतुलित जीवन जीने के लिए बेहद ज़रूरी है?

सद्‌गुरु : समझदारी।

करण जौहर : वो कौन सी चीज है, जिसे एक संतुलित जीवन जीने के लिए हर हाल में अपने जीवन से दूर करना चाहिए?

सद्‌गुरु : नासमझी।

करण जौहर : ठीक है, मुझे लगा कि यही जवाब होगा। अब मैं आपसे कुछ ऐसी चीज़ें पूछने जा रहा हूँ, जिसे सुन कर अपने दिमाग़ जो सबसे पहले चीज आए, वो बताइएगा। अच्छा पहला सवाल है – संगठित धर्म।

सद्‌गुरु : पागलपन।

करण जौहर : शादी।

सद्‌गुरु : साथ रहना।

करण जौहर : प्रतियोगिता।

सद्‌गुरु : मूर्खता।

करण जौहर : पैसा।

सद्‌गुरु : उपयोगी।

करण जौहर : प्रेम।

सद्‌गुरु : क्या मैं एक वाक्य में बता सकता हूँ? [तालियाँ और हँसी]

करण जौहर : ठीक है, इजाज़त दी। [हँसी]

सद्‌गुरु : सबसे सुंदर, लेकिन अफ़सोस कि बात बात है कि यह ज़्यादातर लोगों को पंगु बना रहा है। अगर मैं इसे थोड़ा और विस्तार से समझाऊँ तो बात ऐसी है कि अगर कोई ख़राब चीज़ आपको कमज़ोर या पंगु बना रही हो, कोई दुष्ट चीज़ कमज़ोर बना रही हो – तो बात समझी जा सकती है। लेकिन अगर कोई सुंदर चीज़ आपको कमज़ोर बना रही है, तो यह अपने आप में वाक़ई एक त्रासदी है।

करण जौहर : अगर आपको किसी एक व्यक्ति, जीवित या मर चुके, से कोई एक बात पूछनी है तो आप किससे और क्या सवाल पूछना चाहेंगे?

सद्‌गुरु : मैंने अपने सभी सवालों के जवाब पा लिए हैं, क्यूँकि मैं ख़ुद को शिक्षित करने या कुछ और करने में अपना कोई वक़्त जाया नहीं किया। मैंने अपना सारा जीवन अपने हर सवाल के जवाब खोजने में लगा दिया। अब तो मेरे सारे सवाल ख़त्म हो चुके हैं। [तालियाँ]

करण जौहर : लेकिन निश्चित रूप से आपके जवाब कभी कम नहीं पड़ते, और न ही कभी पड़ेंगे। अब तक सबसे अच्छी सलाह आपको क्या मिली है?

सद्‌गुरु : कुछ भी नहीं।

करण जौहर : कभी सलाह नहीं मिली?

सद्‌गुरु : नहीं, मैंने कभी सलाह माँगी ही नहीं और न ही मुझे सलाह मिलती है। मैंने अपने आप को ऐसा बनाया है कि मैं सलाह लेने या देने के काबिल नहीं हूँ। [तालियाँ]

करण जौहर : एक पूरी तरह से काल्पनिक स्थिति लेते हैं – मान लीजिए आपको छुट्टी का एक ऐसा दिन मिले, जिसमें करने के लिए कोई काम न हो, कोई ज़िम्मेदारी न हो। आप अपना दिन कैसे बिताना चाहेंगे?

सद्‌गुरु : ओह तब तो करने के लिए बहुत सारी चीज़ें होंगी, इसका जवाब एक शब्द में नहीं दिया जा सकता।

करण जौहर : [करण हँसते हैं] नहीं। इसका एक शब्द में जवाब नहीं देना है।

सद्‌गुरु : देखिए मेरे भीतर हर चीज़ को लेकर जुनून का एक समान भाव रहता है। एक समय था कि मैं ढेर सारी चीज़ें किया करता था, लेकिन आजकल वक़्त मुझे ऐसा करने की इजाज़त नहीं देता। तो आजकल मेरे पास अगर थोड़ा भी समय होता है तो मैं गोल्फ़ खेलने में लगाता हूँ। इसकी वजह है कि यह शहर के भीतर ही होता है और इसे खेलने के बाद, मैं समय पर कोई और काम करने के लिए लौट सकता हूँ। लेकिन अगर मुझे पूरा दिन ख़ाली मिल जाए तो मैं अपनी आँखे बंद कर बस ऐसे ही बैठ जाऊँगा, क्यूँकि जब मेरे पास करने को कुछ नहीं होता तो मैं अपने सर्वश्रेष्ठ हाल में होता हूँ। [तालियाँ] हालाँकि लंबे समय से मुझे ऐसा करने का मौक़ा ही नहीं मिला।

करण जौहर : वो एक कौन सी चीज़ होगी, जो आप चाहेंगे कि लोग आपके जीवन के अंत में आपके बारे में याद रखें।

सद्‌गुरु : वो अपना जीवन इतने शानदार तरीके से जिएँ कि मुझे भूल ही जाएं।

करण जौहर : अगर आपको एक बार वक़्त में पीछे या आगे जाने का मौक़ा मिले तो आप कहाँ जाना चाहेंगे?

सद्‌गुरु : मैं लगभग ये सारी चीज़ें कर चुका हूँ। [तालियाँ और हँसी]

करण जौहर : आप पहले ही पूरा ब्रम्हाण्ड घूम चुके हैं। आपके पास हर तरह के माहौल व परिवेश का वीज़ा है।

सद्‌गुरु : क्या हम सवालों की बौछार कुछ धीमी कर सकते हैं…

करण जौहर : हाँ।

सद्‌गुरु : क्यूँकि इस सवाल से कई अन्य बातें जुड़ी हुई हैं। […] दरअसल, आपमें समय और जगह के विचार इसलिए उठते हैं, क्योंकि आप अपनी तार्किक बुद्धि के खाँचे में जीवन जी रहे हैं। अगर आप उस आयाम से परे चले जाते हैं तो फिर काल और स्थान जैसी कोई चीज़ बचती ही नहीं है। तब हर चीज़ यहीं और अभी मौजूद होती है। […] तो काल और परिवेश में पीछे जाने का मेरे लिए कोई मतलब ही नहीं है। […]

करण जौहर : जब भी आप किसी से मिलते है तो सबसे पहले आप किस चीज़ पर ग़ौर करते हैं?

सद्‌गुरु : हर चीज़ पर।

करण जौहर : हर चीज़?

सद्‌गुरु : हर चीज़ – उसका भूत, वर्तमान व भविष्य।

करण जौहर : ज़्यादा महत्वपूर्ण क्या है – जो आप पसंद करते हैं वो करना या जो आप कर रहे हैं, उसे पसंद करना?

सद्‌गुरु : एक शब्द या फिर ज़्यादा में जवाब दे सकता हूँ?

करण जौहर : ये पूरी तरह से आप पर निर्भर है।

सद्‌गुरु : अगर आप एक समझदार इंसान हैं तो आप वही करना चाहेंगे, जो आपको सबसे ज़्यादा पसंद होगा। लेकिन अगर आप जिनियस हैं तो आप बस वही करेंगे, जो ज़रूरी है।

करण जौहर : अगर आपको एक दिन के लिए अदृश्य होने का मौक़ा मिले तो आप क्या करेंगे?

सद्‌गुरु : आप जान ही नहीं पाएंगे। [तालियाँ और हँसी]

करण जौहर : एक बात पूरे सम्मान से पूछना चाहूँगा कि आपकी सबसे बड़ी कमज़ोरी क्या है?

सद्‌गुरु : देखिए आमतौर पर लोग अपने जीवन में कमज़ोरी उसे मानते हैं जो… चलिए मैं इसका स्वाभाविक जवाब दूँगा। […] मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी ये है कि मैं खतरों से प्रेम करता हूँ। मैं ख़तरे के बिना जी ही नहीं सकता। मुझे हमेशा कुछ ऐसा करने की ज़रूरत होती है, जो करने पर मैं नश्वरता की सीमाओं को छू सकूँ। मैं हर समय ऐसी रेखा पर चलना चाहता हूँ, जहां जीवन और मरण साथ-साथ घटित होते हों। हर दिन किसी न किसी रूप में मैं इसी रेखा पर कदम रखता रहता हूँ। क्या यह कोई कमज़ोरी है? मैं ऐसा नहीं मानता, लेकिन लोग ऐसा मानते हैं, ‘ सद्‌गुरु, आपको इस तरह से अपना जीवन जोखिम में नहीं डालना चाहिए।’ लेकिन अगर जीवन में जोखिम नहीं होगा तो मुझे लगेगा कि मैं कसौटी पर कसा ही नहीं गया। अपने जीवन में अधिकांश समय, मैं जो भी कर रहा हूँ, मुझे लगता है कि मेरा टेस्ट ही नहीं हुआ। बस खतरों के कुछ पलों में, मुझे लगता है कि मेरा थोड़ा बहुत टेस्ट लिया जा रहा है।

तो मेरी कमज़ोरी है कि मुझे अपनी काबिलियत की हद तक खींचा जाना पसंद है। जब मैं अपनी मोटरसायक़िल पर भारत की यात्रा कर रहा था, तब पूरे समय और बाद में जब मैंने गाड़ी चलाना शुरू किया तो हर वक़्त मेरी एक ही कामना रहती कि कोई ऐसी मशीन मिल जाए जो मेरे कौशल व क्षमता का इम्तिहान ले सके। जब भी मैं उन दिनों की मोटरसाइकिल या कारों को अपनी सीमाओं तक दौड़ाता था, तो उनमें कुछ खराबी आ जाती थी। इन दिनों हाल ही में मैंने कुछ ऐसे वाहनों को चलाना शुरू किया है, जो मेरी क्षमताओं को जाँच रहे हैं – कि मैं उन वाहनों को उनकी गति की सीमा तक ले जा सकता हूँ या नहीं। हो सकता है कि ऐसा मेरी उम्र की वजह से होता हो। अगर वो मुझे पहले मिल जातीं तो मुझे लगता है कि मैं कुछ कर जाता… [सद्‌गुरु हँसते हैं]

करण जौहर : उनकी गति सीमा छू लेते। कोई ऐसी एक चीज़ जो दुनिया आपके बारे में न जानती हो?

सद्‌गुरु : वो मेरे बारे में एक भी चीज़ नहीं जानते। [तालियाँ और हँसी] यह सच है।

करण जौहर : कोई ऐसी एक चीज़ जो आप अपने बारे में बदलना चाहें?

सद्‌गुरु : ओह, ऐसा तो मैंने कभी सोचा ही नहीं। काश मैं हिंदी बोल पाता, नहीं सॉरी… मराठी। [तालियाँ और हँसी]

करण जौहर : इस दुनिया की कोई एक ऐसी चीज़ जो आप बदलना चाहें?

सद्‌गुरु : अरे, ऐसी तो बहुत सारी हैं…

करण जौहर : एक चीज़।

सद्‌गुरु : इंसान। [हँसी]

करण जौहर : इसकी तो सबसे ज़्यादा ज़रूरत है [सद्‌गुरु हँसते हैं]। आपकी नज़र में आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?

सद्‌गुरु : मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई उपलब्धि है… क्यूँकि मैं कभी भी वैसा कुछ नहीं कर पाता, जैसी मुझे अपने आप से उम्मीद होती है। इसलिए मुझे अपना कोई भी काम उपलब्धि नहीं लगता।

करण जौहर : कोई ऐसा गीत, जो आपको बेहद पसंद हो और जो आप हमेशा सुन सकते हों?

सद्‌गुरु : हाँ, एक गाना है, जो शायद एक ख़ास समय में जब मैं युवा किशोर था, तब सुना था। ये गाना हर किसी चीज़ से ज़्यादा मेरे दिमाग़ में घूमता है। ऐसा नहीं है कि जानबूझकर मैं इसे याद करता हूँ, लेकिन किसी न किसी रूप में ये गाना मुझे याद आता रहता है। ये गाना ‘ब्लोइन इन द विंड’ का बॉब डिलन का गाया ‘हाउ मेनी टाइम्ज़…’ है।

करण जौहर : ओके, मैं जानता हूँ कि आपने मेरी कोई फ़िल्म नहीं देखी है, लेकिन आपकी कोई पसंदीदा फ़िल्म है?

सद्‌गुरु : किसी समय पर मैंने कई अच्छी फ़िल्मे देखी हैं। मैंने कई फ़िल्में देखीं। मैंने भारतीय सिनेमा ज़्यादा नहीं देखा, लेकिन मैंने अंग्रेज़ी फ़िल्में ख़ूब देखी हैं। लेकिन उस समय एक फ़िल्म मुझे बहुत अच्छी लगी, क्यूँकि उस दिन चीज़ें ही कुछ इस तरह से हुईं। ज़िंदगी की कई चीज़ें एक साथ घटित हुईं थीं – ये फिल्म ‘रोमन हॉलिडे’ थी।

करण जौहर : अच्छा। मुझे ये कहना होगा कि मैंने अपने जीवन में जो पहली फ़िल्म देखी, वो यही थी। मेरी माँ मुझे यह फ़िल्म दिखाने ले गई थीं।

सद्‌गुरु : [सद्‌गुरु हँसते हैं] चलो कहीं तो हम एक साथ पहुँचे।

करण जौहर : यह सच है – मेरी पहली देखी फ़िल्म ‘ रोमन हॉलिडे’ ही है। यह बड़े परदे से मेरा पहला परिचय था। मुझे ख़ुशी है कि ऐसी कोई चीज़ है, जो मेरे व आपके बीच समान है।

सद्‌गुरु : उस फ़िल्म में ऑड्री और ग्रेगरी पेक की छवि मेरे दिमाग़ में आज भी हुबहू बनी हुई है।

करण जौहर : शानदार।

सद्‌गुरु : शायद ये मेरी उस उम्र की वजह से हुआ था। [दोनों हँसते हैं]

करण जौहर : यही हुआ होगा। कोई ऐसी काम जो आपको करना अच्छा लगता हो, और वो काम करने के लिए और वक़्त मिल पाने की आपकी इच्छा होती हो?

सद्‌गुरु : हाँ, काश कि कुछ समय और होता। मैंने अपने को ऐसा बनाया है कि ऐसी कोई चीज़ नहीं है , जिसे करने में मुझे मज़ा नहीं आता। मैं यह सुनिश्चित करता हूँ कि मैं जो भी करूँ, उसका पूरा आनंद ले सकूँ, फिर चाहे मैं बस चुपचाप बैठ जाऊं या किसी से बात करूं या फिर कुछ भी करूँ। दरअसल, मेरी गतिविधियाँ किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, मैं कई चीज़ें करता हूँ। आप जो भी करते या नहीं करते हैं, अगर आप उनमें आनंद नहीं लेंगे तो इतनी सारी चीजों को करने और संभालने की कोशिश में आप पागल हो जाएँगे। लेकिन मैं पागल नहीं होऊँगा क्यूँकि मैं जीवित होने का आनंद लेता हूँ। मैं जो भी करूँ, मुझे कोई दिक़्क़त नहीं है। हर चीज़ में मुझे मज़ा आता है, फिर चाहे वो छोटी हो या बड़ी, हर तरह तरह की चीज़। सबसे गहन चीज़ें और मूर्खतापूर्ण चीज़ें, मैं दोनों का ही भरपूर मज़ा लेता हूँ। [दोनों हँसते हैं]

करण जौहर : हम सब को भी यही करना चाहिए। आख़िर में पूछना चाहूँगा कि आपके जीवन पर अगर फ़िल्म बने तो आप अपने किरदार में किसे देखना चाहेंगे?

सद्‌गुरु : पहली बात, मेरे जीवन पर फ़िल्म बनाना कौन चाहेगा?

करण जौहर : नहीं, ऐसा नहीं है। ऐसे बहुत से लोग होंगे, जो आप पर फ़िल्म बनाने में दिलचस्पी रखते होंगे।

सद्‌गुरु : शायद आपको इस फिल्म को एनिमेट करना चाहिए।

करण जौहर : मुझे नहीं लगता कि आप वो चाहेंगे। [करण हँसते हैं] ख़ैर मेरे फटाफट सवालों का ये दौर ख़त्म हुआ। बेशक अपने जवाबों के आधार पर आप पूरी तरह से वो हैम्पर पाने के अधिकारी है, जो इस मंच पर है ही नहीं। लेकिन मैं आपको अपने पूरे प्रेम, आभार व सम्मान की गहरी भावना के साथ एक काल्पनिक तोहफ़ा दे रहा हूँ।

सद्‌गुरु : धन्यवाद। [तालियाँ]

प्रेम व प्रसाद,

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