प्रेम किया जाना नहीं, प्रेम में होना महत्वपूर्ण है


सद्‌गुरुप्रेम के लिए हम अकसर सोचते हैं कि दो प्रेमी होने चाहिए, जो एक दूसरे से प्रेम करें। आज के स्पाॅट में सद्‌गुरु बता रहे हैं कि कैसे प्रेम किसी और के प्रति एक भाव नहीं, बल्कि हमारे होने का एक तरीका हैः

प्रेम के साथ जिम्मेदारी भी निभानी होगी

प्रेम एक खूबसूरत चीज है। अपनी भावनाओं के साथ जो सबसे अच्छी चीज आप कर सकते हैं, वह प्रेम ही है।

प्रेम एक फूल की तरह है। अगर आपके हाथ में कोई फूल है तो आपको सावधानी से चलना चाहिए।
आपकी भावनाएं हमेशा जितनी ज्यादा संभव हो सके, उतनी मधुर होनी चाहिए। लेकिन साथ ही आपको इसकी सीमाओं को भी समझना चाहिए। कोई कितना भी आपको प्यार करे, लेकिन उसमें शर्तें होती हैं। फिर चाहे वो आपके दोस्त हों, आपके पति या पत्नी हों, आपके माता-पिता हों, या फिर आपके बच्चे- सबके लिए एक लाइन है। अगर आप उस लाइन को पार करते हैं तो प्रेम कहीं उड़नछू हो जाता है। ये प्रेम शर्ताें के साथ आता है और इसमें कोई बुराई नहीं है। आपको प्रेम करते हुए जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए, वर्ना यह टिकेगा नहीं। प्रेम एक फूल की तरह है। अगर आपके हाथ में कोई फूल है तो आपको सावधानी से चलना चाहिए। प्रेम को जिंदा रखने के लिए बहुत सारी शर्ताें या स्थितियों को पूरा करना होता है।

अकेले होते हुए भी प्रेम मय रह सकते हैं

फिलहाल, आप किसी भी चीज को प्यार भरी नजरों से तब तक नहीं देख सकते, जब तक वह आपकी न हो।

अगर कोई आपके आसपास है तो आप अपनी मधुरता उसके साथ बांट सकते हैं। अगर कोई आपके आसपास नहीं है तब भी आप प्रेममय रह सकते हैं।
किसी भी चीज को पाने की चाहत इसलिए होती है, क्योंकि आपके भीतर एक तरह की कमी का भाव है। आपको अपने लिए कुछ चाहिए, वर्ना आप उदास महसूस करने लगते हैं। केवल तब, जब कोई चीज आपकी अपनी हो जाती है, तभी आपकी भावनाओं में मधुरता आती है। अगर आप जानते कि अपनी भावनाओं को जीवन के हर पल किस तरह से मधुर रखा जाता है, तो आपका जीवन एक बेहतर हालत में होता। अगर कोई आपके आसपास है तो आप अपनी मधुरता उसके साथ बांट सकते हैं। अगर कोई आपके आसपास नहीं है तब भी आप प्रेममय रह सकते हैं। आपकी भावनाओं के मूल में प्रेम हो सकता है। यह मत सोचिए कि इस सृष्टि के मूल में प्रेम है। जिन लोगों के जीवन में प्रेम की कमी होती है या जो लोग प्रेम से वंचित होते हैं, वहीं लोग कल्पना करते हैं कि ईश्वर ही प्रेम है या इस सृष्टि का मूल प्रेम है। जबकि ऐसा है नहीं।

प्रेम किया जाना नहीं, प्रेम में होना महत्वपूर्ण है

प्रेम एक मानवीय भावना है। जिस पल में इंसान बिना किसी पूर्वाग्रह के और खुले दिल का होता है, वह हर किसी को प्यारभरी नजरों के साथ देखता है। ज्यादातर लोग अहंकारी होते हैं।

महत्वपूर्ण यह नहीं है कि लोग आपको प्रेम करते हैं, महत्वपूर्ण यह है कि आप प्रेममय हैं। यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति यूं ही प्रेम में भरा हुआ घूमता है तो यह भी शानदार बात है।
उनको प्रेम का अनुभव करने के लिए, अपने सामने एक ऐसा व्यक्ति चाहिए जिसके साथ वे पहचान जोड़ सकें। वो व्यक्ति मां हो सकती है, पिता हो सकते हैं, बच्चे या कोई भी ऐसा इंसान हो सकता है, जिससे वह किसी न किसी रूप में कोई जुड़ाव रखते हों। मैं प्रेम को कोई भद्दा रूप देने की कोशिश नहीं कर रहा। प्रेम तब एक खूबसूरत चीज है, जब यह आपके भीतर घटित होता है। दूसरे लोग प्रेम के नाम पर जो आपके लिए करते हैं, वह उनके लिए खूबसूरत होता है। आप उसकी सराहना कर सकते है। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि लोग आपको प्रेम करते हैं, महत्वपूर्ण यह है कि आप प्रेममय हैं। यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति यूं ही प्रेम में भरा हुआ घूमता है तो यह भी शानदार बात है। मैं देखता हूं कि लोग अपने चारों तरफ अकड़ के साथ डींगे मारते हैं, लेकिन जैसे ही वे मुझे देखते हैं, अचानक चापलूसी के अंदाज में झुक जाते हैं। यह बात ठीक नहीं है। आपके भीतर की यह चीज बदलनी चाहिए।

अगर आप भक्ति में डूब कर हर चीज के सामने झुकते हैं तो माना जा सकता है कि आपके भीतर कोई शानदार चीज घटित हुई है। वर्ना तो आप पूर्वाग्रह से भरे रहते हैं और किसी एक चीज को बड़ी तो किसी दूसरी चीज को छोटी के रूप में देखते हैं। निस्संदेह, प्रेम और नफरत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। अगर सिक्का एक तरफ गिरता है तो यह प्रेम है। अगर यह दूसरे रुख की ओर गिरता है तो यह नफरत बन जाता है। अगर आप प्रेममय बन जाते हैं तो यह आपके लिए शानदार बात है। यह आपके आसपास के लोगों के लिए सुन्दर होगा, क्योंकि आपके साथ रहना उनके लिए भी एक खूबसूरत अनुभव होगा। उन पर आपके प्रेममय होने का असर पड़ सकता है। अगर आप प्रेममय हो जाते हैं तो आप जो भी करते हैं, उसे आपके आसपास के लोग अच्छे भाव से लेते हैं। उन्हें कही न कहीं लगता है कि यह आपके भीतर से सही कांटेक्स्ट या सन्दर्भ सेें आ रहा है। वर्ना आप कितनी भी अच्छी चीजें कर लीजिए, वे सब आपके लिए बुराई का सबब बन जाएंगी।

प्रेम की समझ बदलनी होगी

प्रेम वो नहीं है, जो आप करते हैं। प्रेम वो है, जिस तरह से आप हैं। इसका मतलब है कि आपकी भावनाओं में मधुरता भर गई है। अगर आप कोई बर्तन भी उठाते हैं तो उसे पूरे प्यार से उठाएंगे। अगर आप किसी दूसरे व्यक्ति का स्पर्श भी करेंगे तो बेहद प्यार से करेंगे। अगर आपके आासपास कोई नहीं भी होगा और आप बैठेंगे तो बड़े प्रेम से बैठेंगे। आपको अपने प्रेम का काॅनसेप्ट या विचार बदलने की जरूरत है। प्रेम किसी और के बारे में नहीं है – ये आपके बारे में है। आपके भीतर मौजूद भावों की मधुरता के चलते आपका जीवन सुंदर हो जाता है। फिर चाहे आपके जीवन में सफलता आए या असफलता, आपका जीवन मधुर ही होगा।

प्रेम

प्रेम नहीं है – महज एक भावना

जैसा अक्सर समझते हैं लोग।

 

प्रेम तो है एक राह

जो देती है दिशा

हमारे विचारों और भावनाओं को

और ले जाती है उन्हें

एकाकीपन की बंजरता से

समावेश की पैदावार तक।

 

प्रेम नहीं है बस एक बंधन

यह तो है एक गुब्बारा

जो ले जाता है

आपको असीम की सीमाओं तक।

 

प्रेम व प्रसाद,

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