मौत का भरपूर लाभ उठाएं

Death in Family

जब आपके किसी बेहद प्रिय व्यक्ति की मौत हो जाती है, आपको एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है – तो क्या आपको इससे लाभ नहीं लेना चाहिए? आपको इस नुकसान से जरूर फायदा लेने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आप जागरूकहैं तो आप इससे अपार लाभ उठा सकते हैं।

प्रश्न: सद्‌गुरु, मेरा बेटा अपने दादाजी की मृत्यु के सदमे से उबर नहीं पा रहा है। हम इस हालात से कैसे निबटें?

सद्‌गुरु:

मृत्यु को पूरे खुले तौर से देखना और समझना चाहिए। मृत्यु से आपका या आपके बच्चों का परिचय जीवन के शुरूआत में ही हो जाना चाहिए। बच्चों को आप अहसास कराते रहें, ‘मृत्यु स्वाभाविक है, जो हर हाल में होनी है। यह कोई आपदा या त्रासदी नहीं है, बल्कि जीवन की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।’
मुत्यु कोई आश्चर्य नहीं है। आप मरेंगे या नहीं, यह जानने के लिए कोई बहुत ज्यादा बुद्धिमानी या शोध अथवा शिक्षा की जरूरत नहीं होती। हर इंसान के जन्म के साथ ही उसकी मृत्यु उसमें निहित होती है। जब आप चार या पांच साल के होते हैं, तब तक आप जान जाते हैं कि आप मर सकते हैं। यह जानने के बाद भी आपने कुछ नहीं किया। शायद आप अंतिम संस्कार हो जाने के बाद इस सिलसिले में कुछ करना चाहते हैं। लेकिन ध्यान रखिए कि आप अचानक इन चीजों का सामना नहीं कर सकते।

यह कोई ऐसी चीज नहीं है कि जिसे आप मौका आने पर ही संभालें। किसी ने अपना कोई बेहद प्रिय व्यक्ति खो दिया हो, ऐसे में अगर उसे आप दार्शनिक तरीके से समझाना चाहेंगे कि ‘मृत्यु हो गई, कोई बात नहीं, यह तो सबके साथ होता है। मृत्यु में सिर्फ शरीर मरता है, आत्मा नहीं- तो ऐसा करके आप उस व्यक्ति को और दुखी करते हैं। यह समय उसे यह सब बताने का नहीं है। ये चीजें तो किसी की मौत होने के बाद बताने के बजाय व्यक्ति को जीवन में काफी पहले ही बता और समझा दी जानी चाहिए। लोगों को मौत के प्रति जागरुक होना चाहिए। हालांकि ऐसा नहीं है कि लोग इसके बारे में जानते नहीं हैं, लेकिन वो इस तथ्य से अपनी आंखें बंद करने की कोशिश करते हैं। मृत्यु को पूरे खुले तौर से देखना और समझना चाहिए। मृत्यु से आपका या आपके बच्चों का परिचय जीवन के शुरूआत में ही हो जाना चाहिए। बच्चों को आप अहसास कराते रहें, ‘मृत्यु स्वाभाविक है, जो हर हाल में होनी है। यह कोई आपदा या त्रासदी नहीं है, बल्कि जीवन की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।’

बेहतर होगा कि आप बच्चों से अपनी मृत्यु के बारे में बात करें। बच्चों के लिए यह जानना अच्छा होगा कि एक दिन उनके माता-पिता भी मरेंगे।
बेहतर होगा कि आप बच्चों से अपनी मृत्यु के बारे में बात करें। बच्चों के लिए यह जानना अच्छा होगा कि एक दिन उनके माता-पिता भी मरेंगे। अगर बच्चे इसे समझते हैं और आप पच्चीस साल बाद मरने की बजाय अचानक कल ही मर जाते हैं तो वे बेहतर तरीके से इस स्थिति का मुकाबला कर पाएंगे। क्या आप अपने बच्चों को इस तरीके से बड़ा नहीं करना चाहते कि कल को अगर आप न रहें तब भी वे समझदारी और संतुलन के साथ अपना जीवन जी सकें। या आप चाहते हैं कि आपके जाने के बाद वे बरबाद हो जाएं? आप किस तरीके से उन्हें बड़ा करना चाहते हैं? यही चाहते हैं न कि कल को अगर आप ना भी रहें तो भी वे अपना जीवन अच्छी तरह से बिता सकें। अगर आप उन्हें मृत्यु से परिचित नहीं कराएंगे तो वो इसका सामना नहीं कर पाएंगे। यह जरूरी नहीं कि इसे समझाने के लिए आपके अपने घर या परिवार में इसका घटित होना जरूरी है, यह आपके आसपास किसी न किसी के साथ रोज घट रही है। आपको क्या लगता है कि आपकी या मेरी मृत्यु नहीं होगी? यह कभी भी हो सकती है, हम मृत्यु की कामना नहीं कर रहे या उसे बुला नहीं रहे, लेकिन अगर यह आती है तो हम अभी भी पूरी गरिमा के साथ जा सकते हैं।

जब कोई आपका अपना मरता है तो आपके पास अपनी सीमाओं से परे जाकर विकास करने की संभावना काफी प्रबल होती है।
इसका यह मतलब नहीं है कि जब यह आपके किसी प्रियजन के साथ घटती है तो आपको उसकी कमी नहीं महसूस होगी या उसके जाने के बाद आपमें मानवीय भावनाएं नहीं उमड़ेंगी। आपके साथ ये सब होगा, लेकिन फर्क बस इतना होगा कि तब आप टूट कर बिखरेंगे नहीं, बरबाद नहीं होंगे। अगर आप जीवन में घटने वाली हर घटना का सामना एक खास तरह की जागरूकता के साथ करते हैं तो वह आपको अनुभव की दृष्टि से समृद्ध बनाती है। लेकिन अगर आप चीजों के प्रति बेखबर रहते हैं, फिर तो हर चीज आपके लिए एक समस्या या परेशानी है। अगर वे जीवित रहते हैं तो भी एक समस्या है और अगर वे मरते हैं तो भी एक समस्या है। इसलिए जब कोई आपका अपना मरता है तो आपके पास अपनी सीमाओं से परे जाकर विकास करने की संभावना काफी प्रबल होती है। लेकिन आप उस संभावना का इस्तेमाल खुद को खत्म करने में कर लेते हैं। जब आप इतनी बड़ी कीमत चुका रहे हैं- अपने किसी बेहद प्रिय व्यक्ति की मौत के रूप में, तो क्या आपको इससे लाभ नहीं लेना चाहिए? आपको इस नुकसान से जरूर फायदा लेने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आप जागरूक हैं तो आप इससे अपार लाभ उठा सकते हैं।


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