क्या पति पत्नी एक ही आध्यात्मिक मार्ग पर होने चाहिएं?

क्या पति पत्नी एक ही आध्यात्मिक मार्ग पर होने चाहिएं?

सद्‌गुरुसद्‌गुरु से एक प्रश्न पूछा गया कि ईशा से जुड़े होने पर क्या ये महत्वपूर्ण हो जाता है कि मेरा जीवन साथी भी ईशा से जुड़ा हो? जानते हैं सद्‌गुरु का उत्तर…

प्रश्न : सद्‌गुरु, यह कितना महत्वपूर्ण है कि जिससे हम शादी करने वाले हैं, वह भी उसी आध्यात्मिक मार्ग से जुड़ा हो, जिससे हम जुड़े हैं। मैं ईशा से जुड़ी हूं तो क्या मुझे शादी भी ऐसे लडक़े से करनी चाहिए, जो ईशा से ही जुड़ा हो?

सद्‌गुरु : सबसे पहले तो यह समझते हैं कि आध्यात्मिक मार्ग है क्या? किसी एक संगठन से जुडऩा या किसी एक मत को मानना आध्यात्मिक मार्ग नहीं है।

लोग ज्यादा, और ज्यादा, और ज्यादा की मांग करते रहते हैं। अगर आप जिज्ञासु हैं तो आपकी मांगें खुद-ब-खुद कम हो जाएंगी।
आध्यात्मिक मार्ग का मतलब है जिज्ञासु होना। आप जानना चाहते हैं, और इसके लिए आपको जो भी तरीका प्रभावशाली नजर आता है, आप उसे अपना रहे हैं। मैं आपको जो भी तरीका सिखाता हूं, वह उसे पाने का एक जरिया मात्र है, जो आप खोज रहे हैं। यह तरीका खुद लक्ष्य नहीं हैं। अगर आप जिज्ञासु हैं और आपका जीवनसाथी जिज्ञासु नहीं है, तो स्वाभाविक तौर पर उसकी कई सारी मांगें होंगी। कभी वे एक चीज मांगेंगे तो कभी दूसरी चीज। वे कई तरह की चीजें मांगते रहते हैं। लोग ज्यादा, और ज्यादा, और ज्यादा की मांग करते रहते हैं। अगर आप जिज्ञासु हैं तो आपकी मांगें खुद-ब-खुद कम हो जाएंगी। तब आप खरीदारी भी करेंगे तो अपनी जरूरतों के लिए करेंगे, अपनी संतुष्टि के लिए नहीं।

अलग-अलग मार्गों से घर खुबसूरत हो जाएगा

कोई शॉपिंग कर रहा हो या कोई आध्यात्मिक जिज्ञासु हो, एक तरह से दोनों ही संतुष्टि ढूंढ रहे हैं।

सोचकर देखें कि अगर किसी घर में रहने वाले दो लोग अलग-अलग आध्यात्मिक मार्ग पर चल रहे हों और अपने तरीके से अभ्यास कर रहे हों तो वह घर कितना खूबसूरत हो जाएगा।
आप जिज्ञासु हैं तो आपको पता है कि शॉपिंग से आपको संतुष्टि नहीं मिलने वाली। कहीं न कहीं आप जान चुके हैं कि चीजों की चाहत रखने से आपको संतुष्टि नहीं मिलने वाली। इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपनी जरूरतों के लिए भी खरीददारी न करें। आप खरीददारी करेंगे, लेकिन संतुष्टि के लिए नहीं। अगर आप एक आध्यात्मिक पथ पर चल रहे हैं और आपका जीवनसाथी दूसरे पथ पर चल रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप दोनों के बीच झगड़ा होने लगेगा। अगर आप लड़ते हैं तो इसका मतलब है कि आप दो अलग-अलग धर्मों से जुड़े हैं, दो अलग-अलग आध्यात्मिक मार्गों से नहीं। सोचकर देखें कि अगर किसी घर में रहने वाले दो लोग अलग-अलग आध्यात्मिक मार्ग पर चल रहे हों और अपने तरीके से अभ्यास कर रहे हों तो वह घर कितना खूबसूरत हो जाएगा। आध्यात्मिक मार्ग अनुभव करने की प्रक्रिया है। यह कोई भौतिक चीज नहीं है कि इसका अपने आसपास की किसी चीज से टकराव होगा।

विवशता से किये गए काम बनते हैं झगड़े का कारण

अगर आप ईशा के नाम पर अपने कुछ मत बनाकर अंधे हो गए हैं तो टकराव होगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि हम कई तरह की मजबूरियों के नशे में होते हैं।

इसके बाद थोड़े-थोड़े समय के बाद इस सूची को देखिए और मजबूरी के कारण किए जाने वाले किसी एक काम पर निशान लगा लीजिए। इसके बाद तय कीजिए कि आप इस काम को अब पूरी सजगता के साथ करेंगे।
इन मजबूरियों के कारण ही हम बहुत सारे काम कर रहे हैं। जीवन में हमें साफ-साफ यह पहचान कर लेनी चाहिए कि वे कौन-से काम हैं, जो हम अपनी मजबूरी भरी जरूरतों के चलते कर रहे हैं और कौन से काम पूरी सजगता के साथ कर रहे हैं। इस बात को किसी को भी मत बताइए, अपने जीवनसाथी को भी नहीं, क्योंकि ऐसा करने से सब बेकार हो जाएगा। बस बैठ जाइए और लिखिए। उन कामों की सूची बनाइए, लेकिन उसे किसी दूसरे को दिखाने या फेसबुक पर पोस्ट करने की बेवकूफी भूलकर भी मत कीजिएगा। आपकी कुछ चीजें आप तक ही सीमित रहनी चाहिए। इसके बाद थोड़े-थोड़े समय के बाद इस सूची को देखिए और मजबूरी के कारण किए जाने वाले किसी एक काम पर निशान लगा लीजिए। इसके बाद तय कीजिए कि आप इस काम को अब पूरी जागरूकता के साथ करेंगे। ऐसा करके देखिए। अगर आप छह महीने में एक बार यह काम करते हैं तो देखिए डेढ़ साल के अंदर आप कितने शानदार इंसान बन जाएंगे।

भारत में अलग-अलग पथों की परंपरा है

भारत में यह आम बात है कि एक घर में पांच लोग रहते हैं और वे पांचों अलग-अलग देवताओं की पूजा करते हैं।

कुछ देवता वहां ऐसे भी होंगे, जिनकी कोई पूजा नहीं करता। वे वहां सिर्फ इसलिए हैं, क्योंकि पड़ोसियों ने उन्हें दे दिया था।
परंतु उनके लिए कभी यह विवाद का मुद्दा नहीं बना। लेकिन क्या ऐसा दूसरे देशों में संभव है? कुछ देश ऐसे भी हैं जिनमें अगर आप उनके हिसाब से पूजा न करें तो आप वहां रह ही नहीं सकते। वे आपको मार देंगे। वहां लंबे समय से यही सिखाया गया है कि अगर कोई हमसे अलग किसी दूसरे तरीके से पूजा करता है तो उसे खत्म कर दिया जाए। अपने देश में आप पाएंगे कि लोगों के पूजा-घर में पच्चीस तरह के देवता विराजमान हैं। पति किसी एक देवता की पूजा करेगा, पत्नी अपनी पसंद के आधा दर्जन देवताओं की पूजा करेगी, बच्चे अपने पसंदीदा देवता की पूजा करेंगे। कुछ देवता वहां ऐसे भी होंगे, जिनकी कोई पूजा नहीं करता। वे वहां सिर्फ इसलिए हैं, क्योंकि पड़ोसियों ने उन्हें दे दिया था।

अगर दोनों सच्चे जिज्ञासु हैं तो सब ठीक है

तो अगर आप और आपके जीवनसाथी दो अलग-अलग आध्यात्मिक मार्गों पर चल रहे हैं, तो इससे कोई समस्या नहीं है।

अगर कोई एक चीज आपके लिए फायदेमंद साबित हो रही है तो आप उसे अपनाने की सलाह अपने साथी को दे सकते हैं।
लेकिन अगर वह ‘मांगने वाला’ और आप ‘खोजने वाली’ हैं, या वह जिज्ञासु है और आप मांगने वाली हैं, तो समस्या होगी। आप सत्संग में जाना चाहेंगी और वे शॉपिंग करने जाएंगे। वैसे यह भी कोई समस्या नहीं है, अगर दोनों के अंदर एक तरह की परिपक्वता है तो दो विपरीत चीजें भी चल जाती हैं। लेकिन आमतौर पर लोग समस्या पैदा कर ही लेते हैं। वैसे दो अलग-अलग आध्यात्मिक मार्गों की वजह से कभी कोई समस्या नहीं है। अगर दोनों ही जिज्ञासु हैं तो फिर भला क्या दिक्कत हो सकती है! अगर कोई एक चीज आपके लिए फायदेमंद साबित हो रही है तो आप उसे अपनाने की सलाह अपने साथी को दे सकते हैं। अगर उन्हें कोई चीज जबर्दस्त लग रही है तो वह आपको उसकी सलाह दे सकते हैं।


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