गुरुगिरी: गुरु बनना कोई पेशा नहीं

गुरुगिरी guru

प्रश्‍न: कोई सद्‌गुरु कैसे बनता है? क्या कोई गुरु का पेशा भी अपना सकता है ? 

सद्‌गुरु:

गुरु होना कोई करियर का विकल्प नहीं है, मैं नहीं चाहूंगा कि कोई भी गुरु का पेशा चुने।
कुछ समय पहले एक अमेरिकी महिला ने मुझसे पूछा – ‘सद्‌गुरु पिछले पांच साल से मैं आपसे जुड़ी हुई हूं। यह समय बड़ा अद्भुत रहा है। आपको गुरु के रूप में पाना हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है, लेकिन हमें अपने शिष्यों के रूप में देख कर आपको कैसा लगता है?’ मैंने कहा – योगी होना शानदार बात है। मैं योगी के अलावा कुछ और बनना भी नहीं चाहूंगा, पर गुरु होना निराशा से भरा है। इसकी वजह है कि जो चीजें इतनी आसान हैं, जो मैं आपको एक पल में बता सकता हूं, वही मुझे लाखों अलग-अलग तरीकों से बतानी पड़ती हैं।  इसके बाद भी आप उन्हें समझ नहीं पाते, क्योंकि अध्यात्म एक अलग आयाम है। मैं जो कुछ भी कहता हूं, उसका अर्थ आप अपने अनुभवों के मुताबिक निकालते हैं। आपको अपने अनुभवों की दुनिया से बाहर निकाल कर, अनुभव के नये आयाम में ले जाने के लिए ही गुरु होता है। एक ओर तो यह बहुत ही आसान लगता है, लेकिन दूसरी तरफ यह समझ से परे भी लगता है । गुरु होना कोई करियर का विकल्प नहीं है, मैं नहीं चाहूंगा कि कोई भी गुरु का पेशा चुने।

जब आपके अंदर एक खास तरह की स्पष्टता आती है, एक विशेष क्षमता पैदा होती है, तब आप मार्ग-दर्शन स्वाभाविक रूप से कर सकते हैं। 
यह पेशा हो ही नहीं सकता, क्योंकि पेशा रोजी-रोटी कमाने का जरिया होता है। जीवन का कोई आयाम अगर केवल जीविका चलाने का साधन है, तो उसके जरिये आप लोगों का मार्ग-दर्शन नहीं कर सकते। यह संभव नहीं है। मार्ग-दर्शन का काम जीविका से कहीं बड़ा है। जब आप यह समझेंगे तभी आपसे यह काम हो पायेगा। यह कोई ऐसी चीज नहीं है, जो आप करने को चुनते हैं। जब आपके अंदर एक खास तरह की स्पष्टता आती है, एक विशेष क्षमता पैदा होती है, तब आप मार्ग-दर्शन स्वाभाविक रूप से कर सकते हैं। अगर आप यह गुण छिपाने की कोशिश करेंगे तो भी यह अभिव्यक्ति का माध्यम ढूंढ लेगा। और फिर लोग आपसे मार्ग-दर्शन मांगेंगे। इसके लिये लोग खुद ही आपके पास आयेंगे। शुरू में आप यह अनौपचारिक रूप से करेंगे। फिर कुछ समय बाद आपको लगेगा, कि यह काम अनौपचारिक के बजाय औपचारिक रूप से किया जाए तो यह ज्यादा प्रभावशाली तरीके से होगा। कम से कम मेरे साथ तो ऐसा है। बड़ी घबराहट के साथ मैंने इसे औपचारिकता के साथ शुरू किया था। इसमें मुझे कई साल का समय लगा। मैंने इससे बचने की हर संभव कोशिश की, क्योंकि मैं अपनी शारीरिक स्वतंत्रता और तमाम दूसरी चीजों का आनंद ले रहा था। लेकिन एक समय ऐसा आता है, जब आप देखते हैं कि लोग इसे जबर्दस्त तरीके से चाहने लगे हैं। यही वह वक्त होता है – जब आप औपचारिक रूप से किसी चीज की शुरुआत करते हैं। जो भी हो, यह पेशे का विकल्प तो बिल्कुल नहीं है, क्योंकि यह अच्छा पेशा नहीं है।


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