चमत्कार: हकीकत हैं या कहानी


चमत्कार वाकई होते हैं या वे सिर्फ भोले-भाले लोगों को सुनाई जाने वाली कहानियां होती हैं?

सद्‌गुरु:

बहुत से लोग मुझसे अकसर कहते हैं, “सद्‌गुरु, बाकी सभी गुरु तो तरह-तरह के चमत्कार का दावा करते हैं। आप कोई चमत्कार क्यों नहीं करते?” उन लोगों के लिए चमत्कार का मतलब है कि आप एक टिशू बॉक्स से खरगोश निकाल दें। देखिए, टिशू निकालने पर आप कम से कम उसे इस्तेमाल तो कर सकते हैं, खरगोश का आप क्या करेंगे!
जो भी चीज लोगों के समझ से बाहर होती है, उसे चमत्कार कहा जाता है। आज जरा सी प्लास्टिक और धातु की मदद से बनी एक चीज से मैं समुद्र के पार किसी व्यक्ति से बात कर सकता हूं। अगर सौ साल पहले मैं ऐसा करता और आपसे कहता कि मैं दुनिया के दूसरे हिस्से में बैठे किसी आदमी से बात कर रहा हूं, तो अगर आप बुद्धिवादी होते तो जरूर यह सोचते कि या तो मैं बेवकूफ बना रहा हूं या खुद से बात करने वाला कोई मूर्ख हूं। लेकिन आज यह एक साधारण सी बात है।

जीवन में सब कुछ एक चमत्कार है

वैसे कोई चमत्कार नहीं होता, सब कुछ प्राकृतिक है। आप चाहे उसे कुछ भी कह लें – प्राकृतिक कहें या चमत्कार, एक ही बात है।
जब अस्तित्व के बारे में आपकी समझ और जानकारी बढ़ती है, तो आपके लिए कुछ भी चमत्कार नहीं रह जाता। सब कुछ सिर्फ एक हकीकत होता है। यदि जीवन की आपकी समझ और अनुभव बहुत सीमित है, तो सब कुछ आपके लिए एक चमत्कार है। जिन्दगी बहुत अलग-अलग रूपों में घटित होती है। चूंकि लोगों ने अपने आप को सिर्फ भौतिक और तार्किक तक सीमित कर लिया है- वे अनुभव में भौतिक और विचारों में तार्किक होते हैं, इसलिए वे इससे परे किसी भी चीज को चमत्कार कहते हैं। दरअसल कोई चमत्कार नहीं होता। अगर कोई चमत्कार होता है, तो इस अस्तित्व में सब कुछ एक चमत्कार है। हर अणु एक चमत्कार है। वैसे कोई चमत्कार नहीं होता, सब कुछ प्राकृतिक है। आप चाहे उसे कुछ भी कह लें – प्राकृतिक कहें या चमत्कार, एक ही बात है।
एक वैज्ञानिक हर चीज को एक प्रक्रिया के रूप में देखता है। एक रहस्यवादी हर चीज को एक चमत्कार के रूप में देखता है।
जीवन को देखने के दो तरीके हैं। या तो आप हर चीज को चमत्कार के रूप में देखते हैं या किसी भी चीज को चमत्कार नहीं मानते। विज्ञान और रहस्यवाद या आध्यात्मिकता के बीच इसी दृष्टिकोण का फर्क है। एक वैज्ञानिक हर चीज को एक प्रक्रिया के रूप में देखता है। एक रहस्यवादी हर चीज को एक चमत्कार के रूप में देखता है। अपने पैरों के नीचे की मिट्टी को देखिए। अगर आप उसमें खाद डालें, तो आपको पेड़ पर सुंदर फूल मिलेंगे। आप बदबूदार खाद डालते हैं, लेकिन उससे खुश्बूदार फूल आता है। अगर आपको प्रक्रिया मालूम नहीं होती और मैं आपसे कहता कि मैं खाद को एक खुश्बूदार फूल में बदल दूंगा, तो क्या आप मुझ पर यकीन करते? लेकिन ऐसा हो रहा है- एक पेड़ के माध्यम से हो रहा है। मान लीजिए, मैं अपने हाथों में गोबर लेकर उसे एक सुंदर फूल में बदल देता हूं, तो आप उसे चमत्कार कहेंगे। लेकिन जब एक पेड़ ऐसा करता है, तो आपको वह चमत्कार नहीं लगता। यह भेदभाव क्यों?

जीवन का असली चमत्कार

अगर आप सतही जिन्दगी जीते हैं, तो आप सृष्टि के एक अंश के रूप में होते हैं। अगर आप थोड़ा और गहराई में जाएं, तो आप सृष्टिकर्ता बन जाते हैं। यह विकल्प हर इंसान के पास है कि वह क्या बनना चाहता है- सृष्टि का अंश या सृष्टिकर्ता।
जीवन का असली चमत्कार आपके कुछ करने में नहीं है, बल्कि यह महसूस कर लेने में है कि जीवन अपने आप में एक बड़ा चमत्कार है। यहां सब कुछ चामत्कारिक है। अगर आप एक केला या रोटी का एक टुकड़ा या मछली खाएं, तो वह मात्र कुछ घंटों में एक इंसान बन जाता है। आपको इससे बढ़कर और क्या चमत्कार चाहिए? आप सब चमत्कार कर रहे हैं। समस्या सिर्फ यह है कि वह अनजाने में हो रहा है। अगर आप अपनी पूरी चेतना में एक केले को मनुष्य में बदल सकें, तो आप सृष्टिकर्ता हो जाएंगे। या तो आप सृष्टिकर्ता के रूप में मौजूद होते हैं या सृष्टि के एक अंश के रूप में। अगर आप सतही जिन्दगी जीते हैं, तो आप सृष्टि के एक अंश के रूप में होते हैं। अगर आप थोड़ा और गहराई में जाएं, तो आप सृष्टिकर्ता बन जाते हैं। यह विकल्प हर इंसान के पास है कि वह क्या बनना चाहता है- सृष्टि का अंश या सृष्टिकर्ता।

आपको एक मजेदार घटना बताता हूं- एक बार एक मीटिंग से पहले मेरे पास थोड़ा खाली समय था, इसलिए मैंने तैराकी करने का फैसला किया। तैराकी के बाद, लंच पर कुछ लोगों से मिलना था। उनमें से एक ने मुझे देखते ही कहा, “मैंने आपको पूल में तैराकी करते देखा।” मैंने जवाब दिया, “क्या आप मुझसे पानी के ऊपर चलने की उम्मीद कर रहे थे?” वे थोड़ा आश्चर्य से बोले, “नहीं, मगर आप तैराकी कर रहे थे!” मैंने कहा, “हां, मैं पानी में तैरता हूं और धरती पर चलता हूं। क्या आप चाहते हैं कि मैं इसके उल्टा करूं?” चलने के लिए जमीन सबसे अच्छी जगह है। अगर आप पानी पर चलने लगेंगे, तो फिर तैरेंगे कहां?

मैं आपको अपने आस-पास सैंकड़ों लोग दिखा सकता हूं, जिनका एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब उनकी आंखों से आनंद के आंसू नहीं निकलते।

हम तरह-तरह की काल्पनिक चीजों से अपना ध्यान बंटाते हुए जीवन का सार तत्व गंवा रहे हैं। मूर्खतापूर्ण कहानियों को महान बताया जा रहा है। मैं अपने चमत्कार के बारे में आपको बताता हूं। मैं आपको अपने आस-पास सैंकड़ों लोग दिखा सकता हूं, जिनका एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब उनकी आंखों से आनंद के आंसू नहीं निकलते। यह मेरी किस्मत है कि मैं जहां भी जाता हूं, मेरे आस-पास लोग आनंद के आंसू बहाते हैं। मैं आपको ऐसे लोग दिखा सकता हूं जिनकी जिन्दगी में कई महीनों से क्रोध या बेचैनी का एक भी पल नहीं आया। मुझे लगता है कि दुनिया को इसी चमत्कार की जरूरत है।

 


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