भूत शुद्धि की आखिर जरुरत क्या है?

Sadhguruयोग में भूत-शुद्धी का बहुत महत्व बताया गया है। लेकिन जब हर चीज़ बुनियादी रूप से उन्ही पाँच तत्वों से बनी है तो फिर आख़िर ज़रूरत क्यों पड़ती है भूत-शुद्धी की?

सद्‌गुरु: अगर आप नाली का पानी लें, तो आपको वह अशुद्ध लग सकता है, मगर वह वास्तव में अशुद्ध होता नहीं है। वास्तव में वह पानी तथाकथित शुद्ध पानी से कहीं अधिक जीवन के अनुकूल होता है। अगर आप नाली का पानी लें, तो उसमें बोतलबंद पानी के मुकाबले अधिक जीवन होता है। बस वह आपके लिए अनुकूल नहीं है। यह इंसानी समझ है, अपनी भाषा में हम कहते हैं कि जो पानी हमारे लिए अनुकूल है, सिर्फ वही शुद्ध जल है। नाली का पानी बहुत सारे जीवन रूपों के लिए बहुत शुद्ध है। इस तथाकथित शुद्ध जल के लिए आपने उन सारे जीवन रूपों को मार डाला है। उन सभी जीवों के लिए आपका बोतलबंद पानी शुद्ध नहीं है। उनके लिए यह बेजान जल है।

शुद्ध और अशुद्ध की परिभाषा हर जीव के लिए अलग है

इसी तरह, बहुत से लोगों को पता होगा कि फार्मास्यूटिकल्स और तमाम तरह की दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कई रसायनों का एक औद्योगिक रूप होता है और एक चिकित्सीय रूप क्योंकि इंसानी इस्तेमाल के लिए और दूसरे कामों के लिए अलग-अलग रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। 

यह बहुत आम बात है, जो आपको हर कहीं सुनाई दे जाएगी। अगर किसी को उसकी कोई सीमा लांघने को कहें, तो वो कहेगा- “नहीं! मैं ऐसा ही हूँ!” आप ऐसे नहीं हैं, आपने खुद को ऐसा बना लिया है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि उसका औद्योगिक रूप अशुद्ध है। बस वह ऐसी स्थिति में नहीं है कि जीवन के इस अंश के लिए कारगर हो।

इसलिए, जब हम तत्वों की बात करते हैं, तो हमारा मतलब होता है कि ये हमारे लिए कितने अनुकूल हैं। उसी संदर्भ में तत्वों के शुद्धीकरण की जरूरत पड़ती है। ये पंचतत्व बहुत खिलवाड़ करते हैं और करोड़ों रूप बदलते हैं। यह संभव नहीं है कि वे दूसरे गुण या संभावनाएं ग्रहण न करें। उनकी प्रकृति कुदरती तौर पर ग्रहणशील होती है। आप जिस हवा में सांस लेते हैं, जो भोजन खाते हैं, जो पानी पीते हैं, उन्हें सिर्फ विचार, भावना, नीयत या ऊर्जा से प्रभावित किया जा सकता है। बाकी दोनों तत्वों को छोड़ देते हैं क्योंकि वे आपके अनुभव में अधिक नहीं हैं।

कार्मिक तत्व से मुक्ति

आपके भीतर मौजूद जो पंचतत्व इस शरीर का निर्माण करते हैं, वे बहुत गहराई तक इन चीज़ों से प्रभावित होते हैं। उसमें सूचनाओं की एक परत, जिसे आम तौर पर कर्म तत्व कहा जाता है, इकट्ठी हो जाती है। 

इंसान मिट्टी नहीं खा सकता। उसे मिट्टी को सब्जी या फल या किसी और चीज में रूपांतरित करना होगा ताकि वह इंसानी शरीर के अनुकूल बन जाए। मगर बहुत से जीव ऐसे हैं जो मिट्टी, पानी और हवा को, जिस रूप में वे हैं, वैसे ही पाकर खुश हैं। इसलिए शुद्धीकरण मुख्य रूप से इंसानों के लिए जरूरी है।
उसके बिना ये तत्व आपके भीतर एक खास तरीके से काम नहीं करते। सूचना की उस परत के बिना हर इंसान एक जैसा होता।

मसलन, मान लीजिए एक स्त्री ने एक केला खाया। कुछ घंटों में वह केला एक स्त्री बन जाता है। अगर कोई आदमी केला खाए, तो वह केला आदमी बन जाता है। अगर गाय उसे खाए, तो वही केला गाय बन जाता है। हर बार केला वही होता है। केला उतना बुद्धिमान नहीं है कि वह खुद को किसी आदमी, औरत, गाय या किसी और जीव में बदल ले। ये आपके भीतर की एक ख़ास प्रज्ञा है, जो केले को आदमी, औरत, गाय या किसी और जीव में बदल देती है। जिसे आप ‘मैं’ कहते हैं, वह मुख्य रूप से सूचना की एक खास मात्रा है। और वह मूलभूत रूप में तत्वों के जरिए ही आपसे चिपकती है, क्योंकि यहां तत्वों के अलावा और कुछ नहीं है।

इंसानी सिस्टम के लिए तत्वों का शुद्धिकरण जरुरी है

तत्वों का शुद्धीकरण इस तरह की इकट्ठी की गई सूचना यानी कर्म तत्व से मुक्त करने के लिए है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो आप एक मजबूत व्यक्ति होंगे, मगर आप कभी नहीं जान पाएंगे कि आपने अपने लिए जो सीमाएं तय की हैं, उसे पार कैसे करें। ये सीमाएं अस्तित्व द्वारा तय नहीं की गई हैं। यह ऐसी सीमा है जो आपने अपने लिए ख़ुद तय की है। अगर आप अपनी निर्धारित सीमा को पार नहीं कर सकते, तो यह जीने का मूर्खतापूर्ण तरीका है। आप वजह जाने बिना एक सीमा निर्धारित करते हैं और कुछ समय बाद उसे पार नहीं कर सकते। फिर आप दावा करने लगते हैं कि ‘मैं ऐसा ही हूं।’ यह बहुत आम बात है, जो आपको हर कहीं सुनाई दे जाएगी। अगर किसी को उसकी कोई सीमा लांघने को कहें, तो वो कहेगा- “नहीं! मैं ऐसा ही हूँ!” आप ऐसे नहीं हैं, आपने खुद को ऐसा बना लिया है।

जब हम इंसान के संदर्भ में बात करते हैं, तो हां, शुद्धीकरण जरूरी है। आप जाकर मिट्टी को नहीं खा सकते। केंचुए और दूसरे जीव उसे खा सकते हैं, और वे उसे खाकर फल-फूल भी रहे हैं। लेकिन इंसान इस तरह मिट्टी नहीं खा सकता। उसे मिट्टी को सब्जी या फल या किसी और चीज में रूपांतरित करना होगा ताकि वह इंसानी शरीर के अनुकूल बन जाए। मगर बहुत से जीव ऐसे हैं जो मिट्टी, पानी और हवा को, जिस रूप में वे हैं, वैसे ही पाकर खुश हैं। इसलिए शुद्धीकरण मुख्य रूप से इंसानों के संदर्भ में जरूरी है, खुद तत्व के लिए नहीं।

संपादक का नोट:

हर महीने, पंच भूत आराधना नाम की एक शक्तिशाली प्रक्रिया के माध्यम से, सद्‌गुरु भूत शुद्धि के शक्तिशाली विज्ञान का लाभ लेने के लिए भक्तों को एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं। बिना इस प्रक्रिया के भूत शुद्धि करने के लिए गहन साधना की आवश्यकता होगी।

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