पूरी दुनिया को योगमय बनाएंगे

सद्‌गुरुअंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा होने से पूरे विश्व में योग के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। लोगों को स्वास्थ्य और भीतरी खुशहाली प्रदान करने के साथ ही, यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब शीर्ष पदों पर बैठे राष्ट्राध्यक्ष योग में रूचि लेने लगे हैं, क्या मायने रखता है यह दुनिया के लिए?

 

संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानवता के इतिहास के एक नाजुक दौरे में 21 जून को अंतराष्ट्रीय योग दिवस के तौर पर घोषित किया है। यह घोषणा, शरीर को तोड़ मरोड़ कर की जाने कसरत करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी, से ज्यादा महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र संघ के इतिहास में योग दिवस पर पहली बार दुनिया के 177 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र संघ में इससे पहले कभी भी किसी प्रस्ताव को इतना भारी समर्थन नहीं मिला। हम इस दिन मानवता की खुशहाली खोजने की दिशा बदलना चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि लोग अपने कल्याण या बेहतरी की खोज में बाहर, उपर या नीचे देखें, बल्कि हम चाहते हैं कि वे अपने भीतर झांकें।

योग एक तकनीक है, एक ऐसा साधन जिससे लोग अपने भीतर की ओर मुड़ कर अपना कल्याण खुद रच सकते हैं। आपका कल्याण कहीं और से नहीं आएगा, या तो आप इसे अपने भीतर तैयार करते हैं या नहीं करते। योग का यही मूल आधार है।

हमें लोगों को मूल रूप से यह समझाना होगा कि हर व्यक्ति अपना कल्याण खुद ही कर सकता है, इसके लिए उसे किसी दूसरे सहारे या शक्ति की जरूरत नहीं है।
जिस तरह से इंसान के बाहरी कल्याण के लिए विज्ञान और तकनीक मौजूद है, उसी तरह से उसके भीतर कल्याण के लिए भी विज्ञान और तकनीक है। इस विज्ञान और तकनीक ने भारत की इस धरती पर बेहद प्रबल अभिव्यक्ति पाई है। भारत के लिए यह एक अनूठा क्षण है, कि आज दुनिया को देने के लिए हमारे पास ऐसी चीज मौजूद है, जिसकी दुनिया के लिए जबरदस्त अहमियत है।

योग को लेकर हम दुनिया की तमाम सरकारों और बड़े व्यवसायियों के संपर्क में हैं और वे सभी इस संभावना की ओर बड़े गौर से देख रहे हैं। दरअसल हम लोगों का हमेशा से विश्वास रहा है कि अगर समृद्धि आती है तो लोग अच्छे से रहेंगे। लेकिन आज अगर आप देंखे तो दुनिया में सबसे समृद्ध देशों के लोग ही सबसे ज्यादा बीमार और अस्वस्थ दिखाई देते हैं। अब अमेरिका का उदाहरण ही ले लीजिए। वहां पोषण के इतने विकल्प होने के बावजूद लोग हर साल तीस खरब डॉलर सिर्फ सेहत की देखरेख व चिकित्सा पर खर्च कर देते हैं। इस तरह का खर्च किसी भी देश को डुबो सकता है और अफसोस की बात है कि भारत तेजी से उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। जैसे जैसे देश में आर्थिक बेहतरी आ रही है, वैसे वैसे हमारा देश दुनिया में मधुमेह यानी डायबिटीज की राजधानी बनने की ओर अग्रसर है और अपने यहां तरह तरह की बीमारियां जन्म ले रही हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए, हरेक की जिदंगी में योग का प्रवेश कराया जा रहा है,  जो सबकी सेहत और कल्याण का एक सरल, मगर सशक्त जरिया बनेगा। योग का महत्व ही यही है कि अगर एक बार आपने योग अभ्यास को सीख लिया तो फिर आपको इसे करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति की मदद, किसी खास जगह या किसी उपकरण की जरूरत नहीं रह जाएगी। तब आप इसे जब और जहां करना चाहेंगे, हो जाएगा। मानव के संपूर्ण कल्याण के लिए योग विज्ञान एक जबरदस्त उपहार है।

योग के संदेश को फैलाएं

यह अपने आप में शानदार है कि तमाम राष्ट्र्राध्यक्ष पहली बार योग के बारे में चर्चा कर रहे हैं। सरकारें इसके प्रसार प्रचार में पैसे लगा रही हैं, क्योंकि आज न सिर्फ स्वास्थ्य की देखरेख संबंधी पूरा ढांचा फेल हो गया है, बल्कि लोगों को खुशी देने वाले और उनके लिए कल्याणकारी तरीके पूरी तरह से फेल हो गए हैं। आज हर व्यक्ति यह चर्चा कर रहा है कि उनके जीवन में आनंद व प्रसन्नता का कितना हिस्सा है।

इसे पाने के लिए कई चीजें की जा रही हैं। इसे लेकर कई तरह के रिकॉर्ड टूट रहे हैं, हजारों जगहों पर एक साथ योग से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। पूरी दुनिया में भारत सरकार अपने दूतावासों व उच्चायोगों के जरिए लोगों को योग सिखा रही है। यह अपने आप में एक अद्भुद विकास है, क्योंकि इसमें हम कल्याण को किसी विश्वास या संप्रदाय अथवा अचानक घटने वाली किसी घटना के तौर पर न देखकर एक विज्ञान के तौर पर देख रहे हैं। हमने अपने कल्याण के लिए किसी ग्रह या नक्षत्रों की ओर नहीं देख रहे हैं। इसकी बजाय हम सजगतापूर्वक अपने कल्याण को पाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया को देख रहे हैं।

अमेरिका योग के बारे में चर्चा कर रहा है, भारत के प्रधानमंत्री योग के बारे में चर्चा कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्र्रपति योग सीखने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

पिछले कई सौ सालों में पहली बार दुनिया के राष्ट्राध्यक्षों ने अर्थव्यवस्था, सेना, सुरक्षा जैसे दूसरे पहलुओं को छोड़कर व्यक्ति के भीतरी कल्याण के बारे में बात करना शुरू किया है।
यह अपने आप में महत्वपूर्ण विकास है, क्योंकि उच्च और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने अपने भीतर की ओर झांकने की जरूरत के बारे में सोचना शुरू कर दिया है। पिछले कई सौ सालों में पहली बार दुनिया के राष्ट्राध्यक्षों ने अर्थव्यवस्था, सेना, सुरक्षा जैसे दूसरे पहलुओं को छोड़कर व्यक्ति के भीतरी कल्याण के बारे में बात करना शुरू किया है। यह सब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन की घोषणा का नतीजा है।

लंबे समय से दुनिया में आध्यात्मिकता लाने की कोशिश की जा रही है। अष्टावक्र ने आज से आठ हजार साल पहले राजा जनक को आत्म-ज्ञान प्राप्त कराया था। कृष्ण के जीवन का पूरा मकसद ही जीवन के राजनैतिक पहलू को आध्यात्मिक पहलू से जोड़ना है। उन्होंने सिर्फ राजाओं के साथ ही काम नहीं किया, बल्कि उत्तर भारत भर के मैदानी इलाकों में हज़ार से ज्यादा आश्रम बनवाए। यह महत्वपूर्ण है कि समाज में आध्यात्मिक प्रक्रिया शीर्ष लोगों से लेकर नीचे तक दोनों स्तरों पर एक साथ हो।

लोगों की योग में दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। लेकिन योग को मीडिया में मिल रही कवरेज और प्रचार के चलते आज जितने लोग इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं, उतने पहले कभी नहीं हुए। इसकी एक वजह यह भी कि लोग अब से पहले कभी इतने ज्यादा तनाव में नहीं रहे। आज लोग बैचेन और मानसिक रूप से परेशान हैं। इससे बचने के लिए वे अभी तक जिस भी तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे उन्हें कुछ हद तक उससे निजात तो दिलाते हैं, लेकिन वे इन समस्याओं को हल नहीं निकालते। ऐसे में लोगों को योग की ओर आकर्षित होना बेहद स्वाभाविक है।

इस 21 जून को हम इस संदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों के बीच फैलाना चाहते हैं, और जो साधन उपलब्ध हैं, उन्हें गहन रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। हमें लोगों को मूल रूप से यह समझाना होगा कि हर व्यक्ति अपना कल्याण खुद ही कर सकता है, इसके लिए उसे किसी दूसरे सहारे या शक्ति की जरूरत नहीं है। योग अभ्यास के बारे में जानने के लिए हमने ऑनलाइन सरल उप-योग अभ्यास के साथ-साथ हमने ऑनलाइन ‘नमस्कार योग फॉर आल’ नाम से एक तीन मिनट का वीडियो भी जारी किया है।


यह दुनियाभर में अंतराष्ट्रीय योग दिवस के मद्देनजर योग टीचर्स की वर्कशोप्स पर भी उपलब्ध है। योग का सबसे आसान तरीका है कि आप अपने दोनों हाथ नमस्कार की मुद्रा में जोड़कर किसी चीज या व्यक्ति की ओर पूरे प्रेम व ध्यान से देखें तो धीरे-धीरे आपके अंदर तालमेल बनने लगता है। नमस्कार व्यक्ति के भीतर मौजूद विपरीतताओं या विरोधी प्रवृत्त्तिों में समरसता या तालमेल लाता है।

मैं चाहता हूं कि आपमें से जो भी इसे पढ़े, इसे अपने उपर लागू करे। उप योग के रूप जो उपकरण या जरिए दुनिया के सामने रखा गए है, उसका आप न सिर्फ खुद उपयोग करें, बल्कि निश्चित करें कि आने वाली शीतकालीन संक्राति से पहले, आप अपनी तरफ से कम से कम सौ लोगों तैयार करेंगे जो अपने कल्याण के लिए उप योग का अभ्यास करें। इसके लिए आपको जो भी मदद चाहिए, वो ईशा फाउंडेशन देने को तैयार है, लेकिन आपकी तरफ से पूरी प्रतिबद्धता होनी चाहिए कि आगामी दक्षिणायण यानी सूर्य के दक्षिणगामी होने तक आप इस साधना को पूरा करें।

योगिक पद्धति में 21 जून से 22 दिसंबर तक का समय साधना पद कहलाता है। आइए इस पद को आपकी साधना और योग कर्म का पद बनाएं।

लोग कितनी ही बार मुझसे पूछते हैं – “सद्गुरु, यह दुनिया कहां जा रही है?”

मानो दुनिया के ऐसे जाने में आपकी या उनकी कोई भूमिका ही नहीं है। आने वाले समय में दुनिया कैसी होनी चाहिए, इस बारे में आपकी भूमिका महज एक दर्शक की न होकर एक सक्रिय भागीदार की होनी चाहिए। मानवीय चेतना के विकास में एक सक्रिय भागीदारी अपने आप में एक किस्मत की बात है, और मैं चाहता हूं कि आप सभी इस भाव को समझें। दुनिया को लेकर मेरा नजरिया और दृष्टिकोण इसे पूरी तरह से भीतर की ओर मोड़ने का है। आप भी इसका हिस्सा बनें।

आइए इसे साकार कर दिखाएं।

नोट: योग दिवस के मौके पर रूपांतरण के लिए सद्गुरु ने 5 मिनट के उप योग नाम से एक जरिया तैयार किया है, जिसकी मदद से कोई भी व्यक्ति योग का अभ्यास कर सकता है। आप भी इस वर्कशॉप में शामिल हो सकते हैं या इसका आयोजन कर सकते हैं, अथवा लोगों को सिखाने के लिए प्रशिक्षण ले सकते हैं।  

 

प्रेम व प्रसाद,

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