नदी अभियान का प्रस्ताव – नदियों के लिए सरकार बनाए एक सकारात्‍मक नीति


सद्‌गुरुनदियों को जीवन दान के महति मकसद से आयोजित नदी अभियान के अपने पड़ाव से वक्त निकालकर सद्गुरु आज के स्पॉट में बता रहे हैं कि क्यों, कैसे और क्या किया जाना चाहिए इन नदियों के लिएः

 

नदियों के बहाव में आई कमी के कारण

पहाड़ों, नदियों और जंगलों से मेरा जुड़ाव बहुत पुराना और बचपन के दिनों से है। मेरे लिए ये सिर्फ प्रकृति का हिस्सा या एक तरह के संसाधन नहीं रहे हैं, बल्कि ये मेरा एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं।

नदियों और जल संरक्षण को लेकर प्रस्तावित यह मसौदा एक आर्थिक नीति बनाने की तरफ उठाया गया एक कदम है, जिसका एक अपना इकोलॉजिकल प्रभाव व महत्व है।
पिछले 25 सालों में मैंने महसूस किया कि अपने देश की नदियों के जल-स्तर में धीरे-धीरे काफी कमी आती गई है और इस कमी ने पिछले आठ सालों में एक तेज रफ्तार पकड़ी है। मैं कोई वैज्ञानिक नहीं हूं और न ही मेरे पास विज्ञान आधारित ज्ञान और शब्द हैं कि मैं इस बात को विज्ञान के शब्दों में रख सकूं। लेकिन हालात को बस देखने भर से मैंने पाया कि नदियों के बहाव में आई इस कमी के पीछे जिम्मेदार कारक रहे हैं – हरियाली की कमी और भूमिगत जल का जरूरत से ज्यादा दोहन। इसके चलते हमारी नदियों पर इतनी बड़ी विपदा आन पड़ी। इस स्थिति से निपटने के लिए बस यही एक रास्ता बचा है कि हम अपनी जमीन पर ज्यादा से ज्यादा हरियाली लगाएं, और उचित तकनीकों के साथ पानी के इस्तेमाल की व्यवस्था की जाए।

नदियों और जल संरक्षण को लेकर प्रस्तावित यह मसौदा एक आर्थिक नीति बनाने की तरफ उठाया गया एक कदम है, जिसका एक अपना इकोलॉजिकल प्रभाव व महत्व है।

एक आर्थिक नीति, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद हो

मिट्टी से कार्बनिक पदार्थों की गिरती मात्रा और जल के अपर्याप्त स्रोतों ने हमारे उन किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया है, जो अभी तक देश की इतनी बड़ी आबादी के लिए भोजन पैदा करते रहे हैं। 

हमारी विनम्र उम्मीद है कि इन प्रस्तावित अति आवश्यक सुझावों को अनिवार्य क़ानून बनाने के लिए जो भी जरूरी विधायी व प्रशासनिक कदम होंगे, उन्हें समुचित तरीके से उठाया जाएगा।
अलग-अलग क्षेत्रों के विभिन्न विशेषज्ञों से उनके अनुभवों व जानकारी के आधार पर मशविरा करके इस मसौदे को तैयार किया गया है। इसमें जुड़े सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह जानने की कोशिश भी की गई है कि जल और भूमि में हो रहे उर्वर पदार्थों के क्षरण की भीषण समस्या से कैसे निबटा जाए। इस दिशा में सबसे पहला और महत्वपूर्ण पक्ष तो नदी है, उसके बाद जीवन के वे रूप जिनके जीवन का स्रोत नदी है, उसके बाद अगला पक्ष हमारे किसान हैं, फिर जन समुदाय, और फिर उसके बाद स्थानीय व केंद्रीय प्रशासन आता है। इस मसौदे का बुनियादी लक्ष्य एक आर्थिक नीति तैयार करना है, जिसका प्रभावी इकोलॉजिकल प्रभाव हो। इस मसौदे का बुनियादी लक्ष्य एक ऐसी नीति तैयार करना है, जिसे प्रभावी तौर पर लागू किया जा सके। हमारी विनम्र उम्मीद है कि इन प्रस्तावित अति आवश्यक सुझावों को अनिवार्य क़ानून बनाने के लिए जो भी जरूरी विधायी व प्रशासनिक कदम होंगे, उन्हें समुचित तरीके से उठाया जाएगा।

हम लोगों को प्रेरित कर रहे हैं कि वे अपनी नदियों, जलाशय व कुंदों और मिट्टी को राष्ट्रीय संपत्ति की तरह देखें। नदियों को लेकर होने वाली रैली इस वक्त कृष्णा व गोदावरी जैसी नदियों की धरती आंध्र प्रदेश मेसे गुजर रही है।

लोगों को प्रेरित करने, रैली के लिए ड्राइविंग, तमाम आयोजनों, मीडिया से बातचीत और अंतहीन स्वागत समारोह काफी थका देने वाले हो रहे हैं। लेकिन हमारी टीम इस श्रेष्ठ अभियान को लेकर खासी उत्साहित है।

प्रेम व प्रसाद,

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