मानवता को अध्यात्म से परिचित कराने का अब समय अा गया है


सद्‌गुरुइस बार के स्पॉट में सद्‌गुरु हमें बता रहे हैं कि अब वो समय आ गया है कि लम्बे समय से चले आ रहे विश्वास टूटने लगेंगे, और इंसान की बुद्धि सक्रीय होने लगेगी। वे कहते हैं कि यही समय है लोगों का अध्यात्म से परिचय कराने का, और लोगों को नशीले पदार्थों के बजाए ध्यान की ओर ले जाने का।

आज मैं व्यस्त हूँ
मेरा दिन नहीं है – मेरा खुद का।
आज ‌- मेरा दिन हैए पर ये नहीं है मेरा अपना
कलए आज और कल नहीं हैं – मेरे अपने।

हांए मेरा दिन बीत जाता है
पर्दा उठाने में
उस चीज पर से जो है पूरी तरह से स्पष्ट।

क्योंकि अधिकतर लोग हैं अनजानए
मानव होने की अद्भुत प्रकृति से।

बाँध दिया है शरीर की सीमाओं ने
इस जीव को भी – सीमाओं में।

जानना – प्राणी कोए जो हैं हम सब
ही है बस जानने योग्य।

हां, आज मैं व्यस्त हूँ।

मैं पिछले पैंतीस सालों से लगातार सड़क पर हूं। मैं अपनी यात्राओं को कम करने की योजना बनाता रहा हूं, लेकिन हर आयोजन के बाद लोगों की उम्मीदें इस कदर बढ़ जाती हैं कि लगता र्है कि आप सब मुझे काम कराते-कराते मेरे जीवन के अंत तक ले जाएंगे। मैं कोई शिकायत नहीं कर रहा हूं। जो लोग हमारे आयोजन ओर कार्यक्रम में शामिल होकर वापस लौटते हैं, वे इन आयोजनों के पूरे अनुभव से जबरदस्त तौर पर प्रभावित होते हैं – इसकी वजह काफी हद तक हमारे वॉलंटियर्स हैं। जहां कहीं भी मैं जाता हूँ, लोग मुझसे कहते हैं कि हमारे वॉलंटियर्स शानदार हैं।

तय करें जीवन जीने का तरीका

मैं चाहता हूं कि आप में जो लोग, खासकर युवा, जिन पर कोई भार या जिम्मेदारी नहीं है और जो कहीं उलझे हुए नहीं हैं, वे इस पर गौर करें कि वे अपनी जिंदगी कैसे जीना चाहते हैं।

आपको संपूर्ण होने के लिए किसी सहायक चीजों की जरूरत नहीं है। आपके भीतर अधूरेपन का जो झूठा भाव है, वह विशुद्ध रूप से मनोवैज्ञानिक है।
क्या आप बस सिर्फ खाना, सोना, बच्चे पैदा करना और फिर एक दिन मर जाना चाहता है? या फिर आप किसी ऐसी चीज की रचना करना चाहते हैं, जो आप से बड़ी हो? क्या आप किसी ऐसी चीज के लिए आगे बढ़कर आना चाहेंगे, जो आपकी कल्पना से भी कहीं बढ़कर हो। जीवन अपने उच्चतम रूप में तब तक घटित नहीं होता, जब तक कि आप उसकी ओर अपना सारा ध्यान नहीं लगा देते। मैं चाहता हूँ कि आप इस बात को समझें।

अपने आस-पास चीजों और लोगों को इकठ्ठा कर लेने भर से आपके जीवन की गुणवत्ता नहीं बदल जाती। इस सृष्टि ने जैसा आपको बनाया है, वैसे अपने आप में आप एक संपूर्ण जीवन हैं। आपको संपूर्ण होने के लिए किसी सहायक चीजों की जरूरत नहीं है। आपके भीतर अधूरेपन का जो झूठा भाव है, वह विशुद्ध रूप से मनोवैज्ञानिक है। इसी वजह से आपको अपने जीवन की पूर्णता के लिए किसी वस्तु या व्यक्ति की जरूरत महसूस होती है। क्या आप खुद को जानकारियों के बोझ से भर लेना या बस चीज़ों के पीछे भागते रहना चाहते हैं? या फिर आप यह जानना चाहते हैं कि कुछ बड़ा बनने की जरुरत के बिना सहज रूप से जिंदगी कैसे जिएं?

मानवता तक बड़े पैमाने में अध्यात्म पहुंचाना होगा

आज जिस तरह से मानव बुद्धि निखरी है, वैसी शायद ही कभी पहले निखरी हो। आज से पहले शायद ही धरती पर इतने सारे लोग अपने बारे में सोच पाए हों।

वर्ना एक बार धार्मिक विश्वास और स्वर्ग की कल्पनाएं और वादे गायब हो गए तो धरती पर सब तरफ शराब और मादक पदार्थ अपना कब्जा कर लेंगे।
अगले कुछ दशकों में आप बहुत बड़ा बदलाव देखेंगे। आज तक लोगों को जिन भी व्यर्थ की बातों पर लंबे समय तक विश्वास कराया गया हो, वो अब आगे आने वाले समय में नहीं चलेंगी। अब मानवता को बड़े पैमाने पर आध्यात्मिकता से परिचित कराने का समय आ गया है। वर्ना एक बार धार्मिक विश्वास और स्वर्ग की कल्पनाएं और वादे गायब हो गए तो धरती पर सब तरफ शराब और मादक पदार्थ अपना कब्जा कर लेंगे। या तो हम पूरी दुनिया को पियक्कड़ और नशेड़ी बना दें या फिर हम उन्हें ध्यान में डूबे एक शानदार मनुष्य में बदल दें। यह जिम्मेदारी हम सब की है। आप में जो भी लोग इसी तरह से सोचते हैं, उन्हें आगे आना चाहिए और अपनी तरफ से कुछ करने की कोशिश करनी चाहिए।

हमें ऐसे लोगों की जरूरत है, जो दुनिया में समझदारी पहुंचा सकें। आप इसे आध्यात्मिकता मत कहिए, बस यह जीवन के प्रति गहन समझ है। आपके सामने यह विकल्प है। आप क्या चाहते हैं- बस जीवन यापन करना या जीवन को रचना? जीवनयापन करना कोई बड़ी बात नहीं है। हर दूसरा प्राणी यह काम ठीक ठाक तरीके से कर रहा है और वो लोग इस काम को बड़े मजे से और खुशी से कर रहे हैं। वो चीज आपको ज्यादातर इंसानों में नहीं दिखाई देती, क्योंकि इंसानी प्रकृति में स्वाभाविक तौर पर जिस समझदारी और चेतना के प्रकृति सर्व व्यापक होनी चाहिए, वह फिलहाल कहीं जकड़ी हुई है। आज लोग अपने जीवन में जिन भी समस्याओं और पीड़ाओं से गुजर रहे हैं, उसकी वजह कोई बाहरी परिस्थितियां नहीं हैं, हालांकि हो सकता है उन्हें यही लगता हो। बाहरी परिस्थितियां कैसी भी हों- अमीर या गरीब, शिक्षित या अशिक्षित, विवाहित या अविवाहित, दोनों ही तरह से लोग पीड़ित हैं। उनकी पीड़ा की वजह यह नहीं है कि उनके जीवन में कुछ गलत है। लोग जिसकी वजह से वाकई पीड़ा पाते हैं, वो है –  उनकी चेतना – जो चेतना असीम होनी चाहिए, वह बंधनों में जकड़ी हुई है।

मेरी कामना और आशीर्वाद है कि आप इस लीक पर न चलें। एक बार आपने अपने से परे का अनुभव कर लिया तो इसे अपने आप में स्थापित कीजिए और जितने ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए हो सके, उनके लिए जितना आप से हो सके उतना इसे साकार करने में मदद कीजिए। आपका जीवन जो आपने पाया या हासिल किया है, उसकी वजह से नहीं, बल्कि जीवन के अनुभव की गहनता की वजह से शानदार बनता है। इसे सभी को भेंट करने में ही हमारे कार्य हमें तृप्ति देंगे।

प्रेम व प्रसाद,

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