क्या योग क्रियाएं करने से जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं?

क्या योग क्रियाएं करने से जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं?

एक साधक ने महसूस किया कि ईशा से जुड़े योग अभ्यास करके उस पर कई परेशानियां आने लगीं हैं। जानते हैं सद्‌गुरु से पूछे गए इस प्रश्न का उत्तर

प्रश्न: सद्‌गुरु, मैं पिछले कुछ समय से ईशा अभ्यास कर रहा हूं। शुरू में सब कुछ ठीक था, मगर फिर कुछ बाहरी बाधाएं आने लगीं, खास तौर पर परिवार की ओर से। मैं नहीं जानता कि इन सबका सामना कैसे करूं। मैं क्रियाएं कर तो रहा हूं, मगर मुझे लगता है कि मुझे जीवन में कृपा की जरूरत है। कृपया मेरी मदद कीजिए।

सद्‌गुरु: आध्यात्मिक प्रक्रियाओं का एक आयाम यह भी है कि आपके जीवन की रफ्तार को तेज किया जाए। आप विकास की प्रक्रिया को तेज करना चाहते हैं। एक बार जीवन को तीव्र गति पर रखने के बाद, आपके सुख, आपकी पीड़ा, कष्ट सब कुछ तीव्र हो जाते हैं। कुछ खास आध्यात्मिक क्रियाओं से आप अपनी ऊर्जा को एक खास दिशा में प्रेरित करते हैं। क्रिया करते समय आप अपनी ऊर्जा को परम तत्व के मार्ग पर ले आते हैं। ऐसा करने के बाद यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आपका शरीर, दिमाग और भावनाएं इसमें सहयोग करें और तालमेल में रहें। अगर आपकी ऊर्जा एक दिशा में जा रही है, और आपका शरीर, मन और भावनाएं दूसरी दिशाओं में, तो जीवन में तनाव होगा।

चैतन्य के साथ तालमेल

जब आप मेरे पास आकर बैठते हैं, तो मैं मान लेता हूं कि आप अपना विकास करना चाहते हैं, आप आखिरी मंजिल तक जाना चाहते हैं। जब हम आपकी ऊर्जा को परम तत्व की ओर मोड़ देते हैं, तो इसके बाद यह आपका काम है कि आप अपने शरीर, मन, भावनाओं – सभी चीजों को उसी दिशा में ले जाएं। ऐसा करने पर आपका सफर आनंददायक रहेगा।

जब विकास की आपकी प्रक्रिया धीमी गति से चल रही थी, तब भी कष्ट था मगर आपको वह उतना महसूस नहीं होता था क्योंकि आप बहुत धीमी गति से सफर कर रहे थे।
नहीं तो आप आगे तो बढ़ेंगे, मगर रोते-चिल्लाते हुए। अपने दिमाग और भावनाओं को छोटी-मोटी चीजों में न उलझाएं। इसका यह मतलब नहीं है कि अपने परिवार या जीवन में आपने जो भी दूसरे प्रबंध किए हैं, उन्हें छोड़ना होगा। परिवार, सड़क, आश्रम, पहाड़, जंगल, शहर – जो भी जगह आपके लिए उपयुक्त और अनुकूल हो, वहां रहें। आप कहां रहते हैं, इसका आपकी आध्यात्मिकता के साथ कोई संबंध नहीं है।

अगर आपकी पीड़ा, आनंद और बाकी अनुभव तीव्र हो जाते हैं, तो इसका यह अर्थ नहीं है कि आपके जीवन में कृपा नहीं है। आध्यात्मिक प्रक्रिया जारी है। यही कृपा है। कृपा का यह अर्थ नहीं है कि आपके साथ हर समय सब कुछ बहुत अच्छा होगा। कृपा का मतलब है – आपको कहीं पर ठहरने न देकर लगातार जल्दी-जल्दी चलाना। अगर हमें सिर्फ तसल्ली चाहिए होगी, तो इन सब चीजों की कोई जरूरत नहीं होगी। हम बस आपसे अच्छे-अच्छे झूठ बोलते, जैसे, ‘ईश्वर आपका ख्याल रखेगा’ और ‘सब ठीक हो जाएगा’। ऐसी चीजें लंबे समय से लगभग हर धर्म और समाज में बोली जाती रही हैं। क्या ऐसी कहानियां सुनकर आपका मन नहीं भरा?

बस अपनी क्रिया पर ध्यान दें

बस अपनी क्रिया पर ध्यान दें। अपने मन और भावनाओं को एक ही दिशा में कैसे लाएं? सिर्फ अपने मन, भावनाओं और शरीर को अपनी ऊर्जा की दिशा में प्रेरित करने के लिए हम आपको एक सरल क्रिया सिखाने में इतना समय लगाते हैं। आपकी ऊर्जा हमेशा परम तत्व के मार्ग पर रहती है, मगर आध्यात्मिक क्रियाओं के साथ हम उस प्रक्रिया को तेज करते हैं। विकास की कुदरती प्रक्रिया में वह धीमी गति से चलती है। अब वह तेज गति से चलती है।

जब विकास की आपकी प्रक्रिया धीमी गति से चल रही थी, तब भी कष्ट था मगर आपको वह उतना महसूस नहीं होता था क्योंकि आप बहुत धीमी गति से सफर कर रहे थे। अब जब आप तेज गति से बढ़ रहे हैं, तो एक पहिये के दूसरी दिशा में मुड़ जाने पर आपको ज्यादा परेशानी होगी। यह आपकी कार की तरह है – अगर उसके चारो पहिये एक दिशा में होंगे, तभी वह ठीक से चलेगी। अगर एक पहिया दूसरी दिशा में जाएगा, तो घर्षण या टकराव होगा। अभी यही हो रहा है। अगर ऐसा हो रहा है तो आप एक सरल सी चीज कर सकते हैं, किसी इनर इंजीनियरिंग प्रोग्राम में स्वयंसेवा करें। पूरी तरह सजग रहकर सब कुछ सुनें और उसे समझें। इससे आपका मन और भावनाएं फिर से पटरी पर आ जाएंगे।

अगर आपका मन किसी चीज में उलझ जाता है, तो यह ऐसा ही है जैसे चलती कार से हाथ बाहर निकाल कर आप किसी पेड़ की टहनी को पकड़ लें। ऐसे में किसी एक चीज का टूटना तय है – या तो टहनी टूट जाएगी या आपका हाथ उखड़ जाएगा या कार घूमने लगेगी। कोई न कोई घर्षण जरूर होगा।x

सिर्फ अगर आप विकास चाहते हैं तब

अगर आप वाकई विकास करना, आगे बढ़ना चाहते हैं, तभी मेरे साथ बैठें। आपने मेरे साथ बैठकर जो ग्रहण किया है, अपनी सुविधा के अनुसार उसके बारे में समझ बनाना मत शुरू कर दें।

अगर ऐसा हो रहा है तो आप एक सरल सी चीज कर सकते हैं, किसी इनर इंजीनियरिंग प्रोग्राम में स्वयंसेवा करें। पूरी तरह सजग रहकर सब कुछ सुनें और उसे समझें। इससे आपका मन और भावनाएं फिर से पटरी पर आ जाएंगे।
एक बार आदमखोरों के एक मुखिया ने नरभक्षियों की धार्मिक सेवा के लिए मिशनरी भेजने पर पोप को धन्यवाद पत्र लिखा। उसने लिखा, ‘श्रद्धेय पोप, मैं उन तीन मिशनरी को भेजने के लिए आपको बहुत धन्यवाद देता हूं। वे बहुत दयालु, सौम्य, करुणामय और ज्ञानी थे। उन्होंने हमें जीसस के मधुर तरीके सिखाए। वे काफी नर्म और बहुत ही स्वादिष्ट थे।’

आप क्या पाते हैं, उसके बारे में आपकी समझ आपकी सुविधा पर आधारित नहीं होनी चाहिए। अगर आप सहूलियत चाहते हैं, तो आपको किसी स्पोर्ट्स क्लब या सोशल क्लब में जाना चाहिए, जहां आप गपशप कर सकें। आप सुविधा के लिए आध्यात्मिक मार्ग पर नहीं आते। आप इस पर इसलिए आते हैं क्योंकि आप जीवन की एक अधिक बड़ी संभावना को खोलना चाहते हैं।

अपने मन और भावनाओं को मूल ऊर्जा की सीध में लाएं – जीवन का आपका अनुभव सुंदर होगा।

संपादक की टिप्पणी:

*कुछ योग प्रक्रियाएं जो आप कार्यक्रम में भाग ले कर सीख सकते हैं:

21 मिनट की शांभवी या सूर्य क्रिया

*सरल और असरदार ध्यान की प्रक्रियाएं जो आप घर बैठे सीख सकते हैं। ये प्रक्रियाएं निर्देशों सहित उपलब्ध है:

ईशा क्रिया परिचय, ईशा क्रिया ध्यान प्रक्रिया

नाड़ी शुद्धि, योग नमस्कार


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