क्या पुनर्जन्म की जानकारी रिश्ते बदल सकती है?

सद्‌गुरुजिज्ञासु: अगर हमारा पिछला जन्म रहा हो, तो क्या उसका संबंध इस जन्म के लोगों से होता है? यह सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि जब आप पहली बार यहां आए थे, तो मेरी पत्नी इस कार्यक्रम में शामिल हुई थी। फिर उसने पूछा, ‘मैंने आपसे शादी कैसे की?’ यह उसका सवाल था।

 

सद्‌गुरु:

तो ‘मैंने तुमसे शादी ही कैसे की?’ मेरे ख्याल से बहुत से लोग यह सवाल पूछते हैं। तो अगर कोई यह सवाल पूछ रहा है, तो आपको अपनी ओर देखना चाहिए, आपके साथ क्या हो रहा है। इतने सालों बाद कोई सोच रहा है, ‘मैंने तुमसे शादी ही कैसे की?’ तो आपको वाकई अपने अंदर देखने की जरूरत है।

तो आप अपने पिछले जीवन में क्या थे, यह आपके पिता के बारे में पूछने से भी बदतर है। अभी आप क्या हैं – यह सबसे अहम है, है न? आपने अभी अपने जीवन को क्या रूप दिया है – यह सबसे अहम चीज है।
पिछले जन्मों में नहीं, इस जन्म में आप कैसे रह रहे हैं। तो अगर आपमें से कोई सोचता है, ‘मैंने तुमसे शादी कैसे की,’ तो पिछले जन्मों के बारे में मत सोचिए, आपको यह देखना होगा कि आप यह जीवन कैसे जी रहे हैं। यह बहुत अहम है। मेरे ख्याल से यह सब बांबे टाकीज वाली समस्या है – जन्म जन्म में… जो भी। शायद नई फिल्मों में यह सब अब खत्म हो गया है। अगर आप 70, 80 के दशक की फिल्मों को देखकर बड़े हुए, तो उसमें सारी जन्म जन्म वाली बातें होती थीं। सभी युवा नई फिल्में ही देखते हैं। अब फिल्मों में जन्म जन्म का साथ नहीं दिखाया जाता। उनमें रिश्तों, एक्सपायरी डेट की बातें की जाती हैं और… अगर सच की आपकी खोज कमर्शियल सिनेमा से प्रेरित है, तब तो आप मुसीबत को न्यौता दे रहे हैं।

पुनर्जन्म की जानकारी बदलाव नहीं लाती

अगर आप सिर्फ इस वजह से किसी से जुड़े रह सकते हैं, कि हम कई जन्मों से साथ हैं, तो यह साथ रहने का बहुत वाहियात तरीका है। नहीं? ‘नहीं, मैं तुम्हारे साथ इसलिए हूं क्योंकि मैं यहां कई जन्मों से तुम्हारे साथ हूं’ यह साथ रहने का बहुत बेकार तरीका है, है न? मैं इसलिए तुम्हारे साथ हूं क्योंकि मैं तुम्हारे साथ होना चाहता हूं, यह किसी के साथ रहने का एक खूबसूरत तरीका है, है न? ‘मैं तुम्हारे साथ इसलिए हूं क्योंकि पिछले तीन जन्मों में…’ – कृपया अपने जीवन में इस तरह का आतंक न फैलाएं। अगर आप तीन जन्मों से साथ हैं, तो इसका मतलब है कि अब अलग होने का समय है। है न? लोग मेरे पास आते रहते हैं, वे हर समय मुझे इन चीजों में डालते रहते हैं, ‘सद्‌गुरु, क्या मैं पिछले जन्म में आपके साथ था?’ आपको लगता है कि अगर पिछले जन्म में मैं आपसे मिला होता, तो मैं फिर से आपके सामने आता?

 

मैं आपको बता रहा हूं, कल क्या हुआ, वह बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं है। क्या हुआ, क्या हुआ होगा, इसको आप महत्वपूर्ण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आप यह जानते तक नहीं कि दूसरे जीवन में क्या हुआ होगा। यह ऐसा ही है कि करीब-करीब हर कोई अपने स्कूली जीवन या विद्यार्थी जीवन के बारे में बात करता है, ‘अरे, वे तो मेरे जीवन के सुनहरे साल थे।’ हम जानते हैं कि वे सुनहरे साल क्या थे। जब आप उस दौर में थे, तो आप परेशान रहते थे, अपनी परीक्षाओं से बुरी तरह डरे हुए रहते थे, अपने शिक्षकों से नफरत करते थे और स्कूल नहीं जाना चाहते थे – अब वे सुनहरे साल हैं क्योंकि वे बीत चुके हैं। चूंकि अब आपको स्कूल नहीं जाना है, इसलिए वे साल सुनहरे हैं। मेरे ख्याल से आप अपनी शादी के बारे में भी बाद में ऐसा ही महसूस करेंगे… अगर अपनी शादी खत्म होने के बाद आप उसके बारे में इस तरह महसूस करते हैं तो यह किसी काम का नहीं है। अगर आप शादी में रहते हुए इस तरह महसूस करते हैं, तो यह बहुत बढ़िया बात है, है न? जब वह खत्म हो जाती है, और आपको लगता है ‘अरे, वह रिश्ता कितना बढ़िया था, मगर…’ तो यह किसी काम नहीं आएगा। अगर आप शादी के कायम रहते हुए इस तरह महसूस कर रहे हैं, तो यह बहुत अच्छी बात है।

रिश्तों का मूल्य इसी पल समझें

इसलिए अतीत को कुरेदते हुए अपना समय बर्बाद मत कीजिए। मैं आपको बता रहा हूं कि यह कमबख्त याददाश्त आपको पंगु बना रही है। यह आपको किसी चीज को समझने के उपकरण, जीवन के आयामों को खोलने वाले उपकरण के रूप में अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं करने दे रहा। आप उस सारे ढेर को इकट्ठा करना चाहते हैं जिसे दूसरे लोग भूल गए हैं और आप सिर्फ इसी तरीके से अपने पति या पत्नी से जुड़ सकते हैं। यह लोगों से जुड़ने का कितना दयनीय तरीका है। ऐसा मत कीजिए। देखिए अगर आप अपने सामने बैठे इंसान में कोई गुण खोज सकते हैं, जैसा वह इस समय है, जैसा वह पहले कभी था, इसके लिए नहीं।

इसलिए अतीत को कुरेदते हुए अपना समय बर्बाद मत कीजिए। मैं आपको बता रहा हूं कि यह कमबख्त याददाश्त आपको पंगु बना रहा है।
आज आधुनिक समाज का सारा पहलू ही यह है कि हम आपकी कद्र इसलिए नहीं करते कि आपके पिता कौन थे, आप जो हैं, हम उसके लिए आपकी कद्र करते हैं। हम्म? मुंबई में, अब भी आपके पिता अहम हैं? आपका पिता नहीं है, मगर आप जो हैं, उसके लिए आपकी कद्र की जाती है, यह बहुत महत्वपूर्ण है, है न? ‘क्योंकि अरे, आप किसके बेटे हैं या बेटी हैं’ यह महत्वपूर्ण नहीं है। बदकिस्मती से ज्यादातर लोग अब भी उसी में जी रहे हैं। आप जो हैं, वही अहम है, है न? आपने खुद को क्या रूप दिया है, वह महत्वपूर्ण है। आपके पिता कौन थे, यह महत्वपूर्ण नहीं है। यह हमारी पहले की सामंती जीवनशैली से आधुनिक समाज में बहुत बड़ा बदलाव है। हम थोड़े अस्त-व्यस्त हैं, मगर यह बहुत बड़ा कदम है, है न? यह बहुत महत्वपूर्ण कदम है कि कोई मुझसे नहीं पूछता कि तुम्हारे पिता कौन हैं, वे सिर्फ यह देखते हैं कि मैं कौन हूं। क्या यह बहुत बड़ा कदम नहीं है? लेकिन अगर आप 50 साल या 100 साल पहले यहां होते, तो कोई आपका चेहरा देखकर आपसे नहीं पूछता कि आप कौन हैं, वे सिर्फ यह पूछते कि आपके पिता कौन हैं। है न? यह स्थिति बदल गई है। अगर आप पूछेंगे कि आपके पिता कौन हैं – तो आप तो गए! आप कौन हैं, यह महत्वपूर्ण है।

 

तो आप अपने पिछले जीवन में क्या थे, यह आपके पिता के बारे में पूछने से भी बदतर है। अभी आप क्या हैं – यह सबसे अहम है, है न? आपने अभी अपने जीवन को क्या रूप दिया है – यह सबसे अहम चीज है। तो अपना समय और जीवन किसी चीज को खोद कर निकालने में व्यर्थ मत कीजिए।


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