सफलता के मूल मंत्र

क्या हैं सफलता के मूल मंत्र?

सद्‌गुरुहमारे सभी कार्य कलाप जीवन के किसी न किसी आयाम में सफल होने के लिए होते हैं। किन बातों का ध्यान रख सकते हैं सफलता पाने के लिए?

सफलता मिलेगी या नहीं – ये विचार चिंता देगा

आपकी अभिलाषा कौन-सी है? जो भी काम हाथ में लें उसमें सफलता मिलनी चाहिए, यही न?

पश्चिम के मनोवैज्ञानिक यही सीख देते हैं, ‘सफलता मिले’, ‘सफलता मिले’ इन्हीं शब्दों को बार-बार रटते रहें।

गौर से देखिए। खेल में भी जो टीम मन में तनाव लेकर खेलती है उसकी हार होती है। खेल का आनंद लेते हुए खेलने वाले विजयी होते हैं।

आपका प्रत्येक कार्य, हरेक कदम सफलता पर लक्षित रहे।

ऐसे प्रयास से, बहुत संभव है, आपका रक्तचाप बढ़ जाए।

सफलता पर ही ध्यान रखते हुए कड़ी मेहनत करने पर भी मन में ‘कामयाबी मिलेगी या नहीं मिलेगी’ इस द्वंद्व के चलते तनाव, आशंका, चिंता, मानसिक क्लेश जैसे कई सारे पिशाच आपके ऊपर हावी हो जाएँगे।

इस क्षण का काम पूरे समर्पण से करें

जेन दर्शन कहता है, लक्ष्य पर अपनी एक आँख गड़ा देने पर आदमी आधा अंधा हो जाता है। बाकी बची हुई एक आँख से बेचारा किस हद तक काम कर सकता है?

इस तरह आधे-अधूरे ध्यान के साथ काम न कीजिए।

सफलता पर ही ध्यान रखते हुए कड़ी मेहनत करने पर भी मन में ‘कामयाबी मिलेगी या नहीं मिलेगी’ इस द्वंद्व के चलते तनाव, आशंका, चिंता, मानसिक क्लेश जैसे कई सारे पिशाच आपके ऊपर हावी हो जाएँगे।
इस क्षण में जो काम करना है उसे दोनों आँखों का प्रयोग करते हुए पूर्ण रूप से संपन्न कीजिए। इससे अपने लक्ष्य को पकडऩे के लिए उचकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि आप सफलता के लक्ष्य को आसानी से छू सकते हैं।

ठीक-ठीक समझ लें।

आपको ध्यान के साथ मेहनत करनी चाहिए, कड़ी मेहनत करने की जरूरत नहीं है। इस बात को स्पष्ट करने के लिए जेन में एक दिलचस्प वाकया मिलता है।

कड़ी मेहनत से सफल हो सकते हैं पर आनंदित नहीं

चान सू नाम से एक जेन गुरु रहते थे। तलवारबाजी में उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता था। उनके पास एक नया चेला आया। उसने गुरु से पूछा, ‘क्या आप मुझे इस देश का सर्वश्रेष्ठ वीर बना सकेंगे?’

‘क्यों नहीं… दस साल में मैं तुम्हें उस लायक तैयार कर दूँगा’ गुरुजी ने कहा। ‘ओह, दस साल? पाँच साल में यह क्षमता आनी चाहिए गुरुदेव! मैं दूसरों की बनिस्बत दुगुनी मेहनत करने को तैयार हूँ।’

विश्व के महान आविष्कार, वैज्ञानिकों के जीवन में उन्हीं क्षणों में घटित हुए हैं जब वे पूर्ण रूप से मानसिक रूप से आराम की स्थिति में थे।

चान सू ने कहा, ‘तब तो बीस साल लगेंगे।’

 

चेला चकित रह गया, ‘यदि उतनी मेहनत काफी नहीं हो तो चौगुनी ज्यादा मेहनत करने के लिए तैयार हूँ।’

‘ऐसा करोगे तो चालीस साल लग जाएँगे न?’ गुरु ने कहा। हाँ, ज्यों-ज्यों आप अपने को, अपने शरीर को ज्यादा दुख देंगे, लक्ष्य को पाने में उसी अनुपात में ज्यादा समय लगेगा। चान सू ने उस चेले को यही मर्म समझाया।

कड़ी मेहनत करने वाले लोग कभी-कभी सफल तो हो जाएँगे, लेकिन वे उसकी खुशी का अनुभव नहीं पा सकते।

महान आविष्कार भी आराम की स्थिति में हुए हैं

विश्व के महान आविष्कार, वैज्ञानिकों के जीवन में उन्हीं क्षणों में घटित हुए हैं जब वे पूर्ण रूप से मानसिक रूप से आराम की स्थिति में थे।

पेड़ के नीचे निरुद्देश्य बैठे रहने के समय न्यूटन ने सेब को नीचे गिरते देखा।

कड़ी मेहनत करने वाले लोग कभी-कभी सफल तो हो जाएँगे, लेकिन वे उसकी खुशी का अनुभव नहीं पा सकते।

उसी क्षण पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का रहस्य उनके दिमाग में कौंध गया और एक अद्भुत आविष्कार का जन्म हुआ।

‘स्नान के टब’ में लेटकर आराम से नहाते वक्त ही आर्किमिडीज ने तैरने से संबंधित नियमों का आविष्कार किया।

गौर से देखिए। खेल में भी जो टीम मन में तनाव लेकर खेलती है उसकी हार होती है। खेल का आनंद लेते हुए खेलने वाले विजयी होते हैं।

सफलता के बारे में सोचने से मन शांत नहीं रह पाएगा

सफलता… सफलता… का मंत्र रटते हुए जब भी आप स्वयं को दुख देते रहेंगे तो ऐसे समय आप शरीर और मन दोनों दृष्टियों से कमजोर हो जाएँगे।

सफलता के बारे में चिंता करना छोडक़र मन को शांत रखिए। शरीर अपने आप तेजी से काम करेगा।

लेकिन आपमें से ज्यादातर लोग इसके ठीक विपरीत स्थिति में होते हैं। मन से अस्थिर और चंचल रहते हैं। ऐसे में शरीर की तेजी भी कम हो जाती है।

इसी तरह शंकरन पिल्लै के साथ एक बार एक अजीब घटना हुई।

परिणाम के बारे में चिंता करना छोडि़ए। हर बार पूरी लगन के साथ काम कीजिए। सफलता स्वयं आकर आपके दरवाजे पर दस्तक देगी।

‘शाम को घर पहुँचने के बाद कोई काम बिना चूके करना है, इसमें भूल न होनी चाहिए’ ऐसा सोचते हुए शंकरन पिल्लै ने रूमाल में गाँठ बाँध ली।

लेकिन घर पहुँचने पर वे उस बात को ही भूल गए जिसे याद रखने के लिए रूमाल में गाँठ डाली गई थी।

शंकरन पिल्लै भारी तनाव में आ गए। दिमाग पर जोर डालकर सोचते रहे। छत पर काफी देर टहलते रहे, याद नहीं आया। माथा ठोक-ठोक कर सोचा, कॉपी पर उल्टे सीधे जाने क्या-क्या लिखकर देखा, ऊहूँ… याद नहीं आया।

उनकी श्रीमती जी ने सलाह दी, ‘चुपचाप लेटकर सो जाइए। जो भी बात हो, कल सुबह जरूर याद आ जाएगी, देख लेंगे।’

‘स्नान के टब’ में लेटकर आराम से नहाते वक्त ही आर्किमिडीज ने तैरने से संबंधित नियमों का आविष्कार किया।

‘ना, यह नहीं होने का। कोई अहम बात होगी, जिसे आज ही पूरा करने की जरूरत होगी। उसका पता लगे बिना मैं कैसे सोऊँ?’ यों कहते हुए पिल्लै बिस्तर पर करवट लेते रहे।

यह काम था… या वह…? सोचने-विचारने के इसी उधेड़बुन में दिमाग के अंदर लाखों विचार और चिंताएँ कीड़े बनकर उड़ते रहे। आखिर रात के दो बजे सभी ओर से हारकर शंकरन पिल्लै ने रूमाल को दूर फेंक दिया उसी क्षण झट से बात याद आ गई।

‘आज रात को नौ बजे ही सो जाना है’ इसी काम की याद दिलाने के लिए रूमाल पर गाँठ बाँधी गई थी!

परिणाम के बारे में न सोचें पूरी लगन से काम करें

दिमाग पर ज्यादा जोर डालेंगे, उसे तनाव में रखेंगे तो आपके साथ भी वही घटेगा जो शंकरन पिल्लै पर घटा था।

परिणाम के बारे में चिंता करना छोडि़ए। हर बार पूरी लगन के साथ काम कीजिए। सफलता स्वयं आकर आपके दरवाजे पर दस्तक देगी।


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  • सफलता के मंत्र

    बहुत अच्छा लेख है। शांत चित्त से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। मैंने मेरे अनुभव से जाना है के सफलता के चार प्रमुख सूत्र हैं आप उन्हें यहाँ जान सकते हैं https://youtu.be/-NnTsxswrTk

  • Rampratap Sahni

    very good post

  • Achhi Advice.com

    badhiya bate