चम्मच क्‍या जाने सूप का स्वाद

गौतम बुद्ध
गौतम बुद्ध

अध्यात्म के मार्ग पर हम हमेशा अपने गुरु के पास रहना चाहते हैं लेकिन क्या किसी आत्मज्ञानी के केवल पास रहना ही हमारे विकास के लिए काफी है? आनंद अपने छोटे भाई और गुरु – गौतम बुद्ध – के साथ लम्बे समय तक रहे थे। आइये जानते हैं कि किस कारण से गौतम बुद्ध ने उन्हें पास रहने की अनुमति दी, और इसका क्या परिणाम निकला… 

इसके बाद आनंद ने अति कर दी, चाहे कुछ भी हो जाए, वह गौतम के ही कमरे में सोते और हमेशा उनके साथ मौजूद होते।
गौतम एक ऐसे समय और युग से ताल्लुक रखते थे, जहां बड़े भाई का कहना हर हाल में मानना पड़ता था। आनंद, गौतम के शिष्य थे लेकिन भिक्षु बनने से पहले वह एक बड़े भाई थे। भिक्षु बनने से पहले उन्होंने एक शर्त रखी, ‘देखो, मैं अब तुम्हारा शिष्य बनने जा रहा हूं। एक बार शिष्य बनने के बाद मुझे तुम्हारी हर बात माननी होगी, लेकिन फिलहाल मैं तुम्हारा बड़ा भाई हूं और तुम्हें मेरी बात माननी होगी। तो शर्त सिर्फ इतनी है कि चाहे जो भी हो जाए, हम जीवनभर साथ रहेंगे। चाहे कुछ भी हो, तुम मुझे कहीं नहीं भेज सकते, तुम मुझे कोई काम देकर कहीं नहीं दौड़ा सकते। तुम जहां भी रहोगे, मैं शारीरिक रूप से हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगा।’ वह भविष्य में गौतम के साथ अपनी जगह सुनिश्चित करना चाहते थे।

गौतम तब तक एक महान गुरु नहीं बने थे, वह किसी हद तक एक अनजान साधक ही थे लेकिन उन्हें ज्ञान प्राप्त हो चुका था। इसलिए आनंद ने पहले ही शर्त रख दी, ‘चाहे जो भी हो जाए, शरीर से मैं हमेशा आपके निकट रहूंगा।’ गौतम ने उनसे कहा, ‘यह आपके लिए अच्छा नहीं है, लेकिन आप बड़े भाई हैं, इसलिए मैं आपकी बात काट नहीं सकता। अगर आप आग्रह करेंगे, तो मुझे मानना पड़ेगा।’ आनंद बोले, ‘हां, यह मेरा आग्रह है।’ इसके बाद आनंद ने अति कर दी, चाहे कुछ भी हो जाए, वह गौतम के ही कमरे में सोते और हमेशा उनके साथ मौजूद होते।

वह तो पहले दिन से बुद्ध के साथ थे, मगर उन्हें कुछ पता क्यों नहीं चला?
वैसे यह हमारे लिए बहुत उपयोगी रहा क्योंकि उन्होंने गौतम की हर हरकत को दर्ज किया लेकिन हर समय उनका साया बने रहना जरूर गौतम के लिए कष्टदायक रहा होगा। जब आखिरी वक्त आया, गौतम के महाप्रयाण का समय आया तो काफी बाद में आने वाले लोगों ने वहां रोशनी देखी। उन लोगों ने आनंद की ओर देखकर पूछा कि ऐसा क्यों हुआ। वह तो पहले दिन से बुद्ध के साथ थे, मगर उन्हें कुछ पता क्यों नहीं चला? फिर उन लोगों ने गौतम से पूछा ‘क्यों वह आखिरी दिन तक अज्ञानी रहे? उनके साथ ऐसा क्यों हुआ? वह हर समय आपके साथ रहे, क्या आपके साथ रहकर कोई लाभ नहीं हुआ?’ गौतम बहुत निर्मम सौम्यता के साथ बोले, ‘चम्मच कभी सूप का स्वाद नहीं चख सकता।’ चम्मच हमेशा सूप में रहता है, मगर क्या वह सूप का स्वाद चख सकता है? 
Images courtesy: Petr & Bara Ruzicka from Flickr

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