सुपरमैन बनने की जरूरत नहीं

Superman

आपको अतिमानवीय गुणों से भरपूर सुपरमैन बनने की जरूरत नहीं हैजिसमें सब कुछ करने की काबिलियत हो। लेकिन अगर आप वह भी नहीं करतेजो करने में आप सक्षम हैं तो फिर यह ठीक नहीं है। यह आपकी असफलता है। 

अगर आप जीवन में सचमुच कोई उत्तम सौदा करना चाहते हैं, तो सौदा करने की कोशिश ही छोड़ दीजिए। आपको ऐसा होना चाहिए कि आपका ग्राहक, चाहे वह खरीददार हो या व्यापारी, आप ही को पसंद करे। यह कोई चाल नहीं है। अगर जरूरी हुआ तो सौदा होगा, अन्यथा नहीं होगा। सौदा दोनों की भलाई के लिए है, इसलिए दोनों को इसकी जरूरत होनी चाहिए। इस संसार में लेन-देन होते ही रहते हैं। कुछ व्यक्तिगत होते हैं, तो कुछ दूसरी तरह के, लेकिन वे सब आपके जीवन को प्रभावित करते हैं।

 समस्या यह है कि आप एक लेन-देन को दूसरे से ऊपर रखते हैं। आप एक के साथ बहुत लीन हो जाते हैं और दूसरे में आपकी वैसी रुचि नहीं होती। ऐसे काम नहीं चलेगा।
आप जिसे प्रेम संबंध कहते हैं, वह क्या है? वह बिना शर्त जुड़ना है। अगर आप में जुड़ने का भाव नहीं है, तो आप हमेशा किसी भी व्यक्ति के साथ एक बढ़िया सौदा ही पटाने की कोशिश करेंगे। तब आपको सिर्फ मूर्ख व्यक्तियों से ही मिलना चाहिए, जो आपके झांसे में आ जाएं। बुद्धिमान लोग आपके बेकार सौदों को कभी भाव नहीं देंगे।

जब आप स्वयं को समर्पित करते हैं और इसका ध्यान रखते हैं कि उस से दोनों को कैसे फायदा हो सकता है, तभी सच्चा सौदा संभव होगा। बेशक, बाहरी सौदा कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे बाजार या दुनिया की हालत, लेकिन अगर आप अपनी आंतरिक स्थिति को सही ढंग से स्थापित करें और अपनी ओर से जो भी सबसे अच्छा कर सकते हैं, वही करते रहें, तो आपकी क्षमता के अनुसार जो भी अच्छा होना है, वही होगा। जो आपकी क्षमता के बाहर है, वह तो वैसे भी नहीं होगा।

अगर आपका पूरा जीवन सौदा पटाने में ही बीतता है, तो इसका मतलब है कि आप शैतान के शिष्य बन गए हैं। शैतान हमेशा किसी न किसी के साथ सौदा करता रहता है। ईश्वर ने कभी किसी के साथ सौदा नहीं किया। इसलिए संभव है कि आप अपने ईश्वरीय स्वभाव तक ही नहीं पहुंच पाए हों। लेकिन इस मामले में कम से कम थोड़ी देर के लिए भी हमें ईश्वर की नकल करनी चाहिए। ईश्वर सौदा नहीं करता।

जब आप स्वयं को समर्पित करते हैं और इसका ध्यान रखते हैं कि उस से दोनों को कैसे फायदा हो सकता है, तभी सच्चा सौदा संभव होगा।
देखा जाए तो इस दुनिया में हर व्यक्ति एक तरह से व्यापारी है। हरेक इंसान कुछ सौदे हथियाने की कोशिश कर रहा है- कोई बाजार में, कोई घर पर, तो कोई मंदिर में। कुछ लोग अपनी आध्यात्मिक प्रक्रियाओं में भी। जब आप अच्छा, फायदेमंद सौदा करते हैं, तब आप संयत और सुशील रहते हैं, लेकिन अगर सौदा घाटे का होता है, तो आप चीखने-चिल्लाने लगते हैं।

आपको अतिमानवीय गुणों से भरपूर सुपरमैन बनने की जरूरत नहीं है, जिसमें सब कुछ करने की काबिलियत हो। लेकिन अगर आप वह भी नहीं करते, जो करने में आप सक्षम हैं तो फिर यह ठीक नहीं है। यह आपकी असफलता है। इसलिए बहुत सारे सौदे पटाने की चिंता मत कीजिए, बल्कि किसी भी स्थिति में अपने आप को समर्पित करना सीखिए। तब, अगर वह उनकी जरूरत का हुआ तो लोग सहज ही उसे लेंगे।

चाहे आप टैक्सी ड्राइवर से एक मिनट के लिए बात करें या किसी अफसर से, ग्राहक से बात करें या पति- पत्नी और बच्चे से -हर लेन-देन आपके जीवन पर असर डालता है। समस्या यह होती है कि आप एक लेन-देन को दूसरे से ऊपर रखते हैं। आप एक के साथ बहुत लीन हो जाते हैं और दूसरे में आपकी वैसी रुचि नहीं होती। ऐसे काम नहीं चलेगा।

जीवन को हर तरह से सफल बनाने के लिए आपको इन सभी चीजों की जरूरत है। आप पूरी स्थिति के साथ प्रेम से क्यों नहीं जुड़ जाते? जब तक आप उस परिस्थिति में बने रहना चाहते हैं, तब तक क्यों न उसे एक सहज प्रेम के संबंध की तरह बनाया जाए। ऐसा ही होना चाहिए।


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