शादी या संन्यास – क्‍या करूं, क्‍या ना करूं?

शादी या संन्‍यास

एक जिज्ञासु ने सद्‌गुरु से यह जानना चाहा कि गृहस्थ के रूप में साधना करना और एक ब्रह्मचारी के रूप में साधना करने में क्या अंतर है? सद्‌गुरु बता रहे हैं कि सभी पर एक ही नियम लागू नहीं होता। हर किसी को अपनी निजी जरूरतों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए, और साथ ही उसके परिणामों को ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार करने के लिए तैयार रहना चाहिए। आइए आगे पढ़ते हैं…

हर व्यक्ति पर एक नियम लागू नहीं होता

अगर आप एक गृहस्थ हैं और साधना करना चाहते हैं तो आपको कई लोगों से अनुमति लेनी पड़ती है। वे अनुमति दे भी सकते हैं और नहीं भी दे सकते।

 आपको यह देखना चाहिए कि आप जो काम करने जा रहे हैं, उसके पीछे आने वाले परिणामों के सिलसिले के लिए आप तैयार हैं या नहीं। 
उसमें कई समस्याएँ होती हैं, लेकिन अगर आप एक ब्रह्मचारी हैं तो आप अपने लिए निर्णय ले सकते हैं। जब आप एक  गृहस्थ होते हैं तो कुछ खास तरह की साधनाओं को करना थोड़ा कठिन होता है। वहां आवश्यक वातावरण बनाना संभव नहीं होता। तो क्या सत्य को जानने के लिए हर एक व्यक्ति को ब्रह्मचारी बन जाना चाहिए? नहीं। इसकी ज़रूरत नहीं है। अगर आपको अपने भीतर के सत्य को जानना है तो यह मायने नहीं रखता कि बाहरी स्थितियां कैसी हैं। आप इस पर गौर करें कि आपके जीवन में क्या महत्वपूर्ण है, आपके जीवन की क्या – क्या जरूरतें हैं, उसी हिसाब से आप चुनाव कर सकते हैं।

किसी ने शादी कर ली और किसी ने ब्रह्मचर्य ले लिया। कौन सही है और कौन गलत? या कौन बेहतर है? ऐसी कोई चीज़ नहीं है। हर व्यक्ति को अपनी प्राथमिकताओं और व्यक्तिगत ज़रूरतों के आधार पर यह चुनाव करना चाहिए। कुछ लोगों के लिए शादी जरूरी है और उनकी शादी हो जाती है। कुछ लोगों के लिए यह ज़रूरी नहीं है, और वे ब्रह्मचर्य ले लेते हैं। हर व्यक्ति पर एक ही नियम लागू नहीं होता। जिसको शादी की ज़रूरत है अगर उस व्यक्ति को ब्रह्मचर्य दे दिया जाए तो उसका जीवन नरक बन जाएगा। जो शादी नहीं करना चाहता, अगर उसकी बलपूर्वक शादी कर दी जाए, तो वह दूसरी तरह के नरक से गुजऱेगा।

शादी असफल कब होती है?

ऐसा नहीं है कि शादी गलत है। यह दो लोगों के लिए जीवन साझा करने का और एकसाथ रहने का एक अवसर होता है। यह जीने का एक अच्छा तरीका है, और इसे जीने के एक खूबसूरत तरीके में परिवर्तित किया जा सकता है।

मात्र सामाजिक बाध्यताओं को लेकर दो लोग वर्षों तक चिपके रहते हैं, यह पागलपन है। इस तरह से लोग बस एक दूसरे को बर्बाद कर रहे हैं।
चूंकि लोग पूरी तरह परिपक्व नहीं होते, वे एक दूसरे के ऊपर बहुत ज्यादा अधिकार जताने लगते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि वे एक दूसरे का इस्तेमाल करके अपना जीवन बनाने की कोशिश करते हैं। आप अपना जीवन एक दूसरे से बाँट सकते हैं और एकसाथ रह सकते हैं, लेकिन लोग एक दूसरे का इस्तेमाल करके अपना जीवन बनाने की कोशिश करने लगते हैं। तब शादी का असफल होना निश्चित है, कोर्ट-कचहरी में भले ही न जाना पड़े, लेकिन जीवन में ऐसा होना ही है। यह रिश्ता अच्छे से निभता है जब आप या तो निरे मूर्ख हैं कि आपको कुछ भी पता नहीं है, आप बस सहज रहते हैं, या आप ऐसे व्यक्ति हैं जो पूरी तरह से समर्पित है। अगर आप में दूसरे व्यक्ति के प्रति पूरा समर्पण है, तो यह अच्छी तरह से चलता है। या आप वाकई में एक दूसरे से इतना प्रेम करते है कि आप दोनों के बीच में सब कुछ बढ़िया है, दूसरा चाहे किसी भी तरह से रहे, फिर भी कोई समस्या नहीं है, सब ठीक है। अन्यथा इसका निभना संभव नहीं है। मात्र सामाजिक बाध्यताओं को लेकर दो लोग वर्षों तक चिपके रहते हैं, यह पागलपन है। इस तरह से लोग बस एक दूसरे को बर्बाद कर रहे हैं।

हर काम के परिणाम होते हैं

मैंने स्त्रियों और पुरुषों दोनों को देखा है, यह स्त्री और पुरुष दोनों के लिए सत्य है। जब वे जवान होते हैं तब उनमें ज़्यादा उमंग और जीवंतता होती है। फिर वे शादी कर लेते हैं – मैंने ऐसे प्रेमियों को कॉलेज में देखा है।

अगर आप एक बुद्धिमान व्यक्ति हैं, तो आपको यह देखना चाहिए कि आप जो काम करने जा रहे हैं, उसके पीछे आने वाले परिणामों के सिलसिले के लिए आप तैयार हैं या नहीं।
उन्होंने सोचा कि वे तो एक दूसरे के लिए ही बनाए गए हैं। वे आगे बढ़े और भारी विरोध के बीच शादी कर ली। वे माता पिता के खिलाफ, समाज के खिलाफ  चले गए और शादी कर ली। वे बहुत जोशीले और जीवंत लोग थे। शादी के बाद, चार-पाँच साल के अंदर ही दोनों बहुत दुखी इंसान बन गये। आप उनके चेहरों पर दु:ख देख सकते हैं, सारी जीवंतता चली गई। लोगों को इस तरह से देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।

अगर आप प्रेम से कुछ हासिल करने की कोशिश करते हैं, तो प्रेम चला जाएगा; केवल हासिल की गई चीज़ बच जाएगी। दुर्भाग्यवश, सभी लोग यही करने की कोशिश करते हैं। उन्हें बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन लोग सीखते नहीं हैं। लोग वास्तव में एक बड़ी कीमत चुकाते हैं। आपका दु:ख ही सबसे बड़ी कीमत है जिसे आप चुका सकते हैं, और क्या शेष रह जाता है? इस प्रक्रिया में आप अपना प्रेम और आनंद खो देते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि आप अपना प्यार खो देते हैं। इससे बड़ी कीमत और क्या हो सकती है? आपको नरक में जाने की ज़रूरत नहीं है। यह काफी है, है कि नहीं? कम से कम, अगर आप कॉलेज के उस प्रेम संबंध को याद करते तो वह आपके जीवन में आनंद का एक स्त्रोत होता। हां, लेकिन जब आपके सपने साकार हो गए तो आपने इससे एक व्यापार बना लिया। वह खूबसूरत व्यक्ति, जो एक समय आपके लिए सब कुछ होता था, वह आपके लिए एक कुरूप व्यक्ति में बदल गया। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन लोग पीढ़ी दर पीढ़ी यही काम कर रहे हैं। यह समय बदलाव का है। वास्तव में यह वक्त बदलने का है और यह निर्णय लेने का है कि आपके लिए क्या महत्व रखता है और क्या नहीं।

देखिए, आप जो भी काम करते हैं, उसके बाद परिणामों का एक पूरा सिलसिला शुरु होता है। अगर आप एक बुद्धिमान व्यक्ति हैं, तो आपको यह देखना चाहिए कि आप जो काम करने जा रहे हैं, उसके पीछे आने वाले परिणामों के सिलसिले के लिए आप तैयार हैं या नहीं। और फिर निर्णय लीजिए कि वह काम आपके लिए आवश्यक है या नहीं। सोचिए और निर्णय लीजिए कि उन परिणामों का सामना करने के लिए और उन्हें खुशी-खुशी स्वीकार करने के लिए आप तैयार हैं या नहीं। आपको इसे परखना चाहिए और फिर निर्णय लेना चाहिए। हर व्यक्ति के लिए एक ही बात तय नहीं की जा सकती।

Images courtesy: Christian Kadluba

संबन्धित पोस्ट


Type in below box in English and press Convert