कामवासना हावी क्‍यों हो जाती है?

काम-वासना
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Sadhguruजीवन में हम तमाम चीजों से छुटकारा पाना चाहते हैं। इसके लिए अक्सर हम जोर जबरदस्ती का रास्ता चुनते हैं, जिससे चीजें छूटने की बजाय और बड़ी समस्याओं का रूप ले लेती हैं। किसी भी चीज को  छोड़ने का सही तरीका क्या है, इसी बारे में बता रहे हैं सद्‌गुरु

प्रश्‍न: मैं अपनी कामवासना की तीव्र इच्छा से कैसे छुटकारा पाऊं?

सद्‌गुरु: हम लोग अक्सर किसी न किसी चीज से छुटकारा पाने के बारे में सोचते रहते हैं। आप जोर जबरदस्ती करके किसी चीज से छुटकारा नहीं पा सकते। अगर आप जबरदस्ती किसी चीज को छोड़ना चाहें, तो यह किसी और रूप में उभर कर सामने आ जाएगी, और आपके भीतर कोई दूसरा विकार पैदा कर देगी। अगर आप किसी चीज को छोड़ने की कोशिश करेंगे, तो वह चीज पूरी तरह से आपके दिमाग व चेतना पर हावी होने लगेगी। लेकिन उस चीज की तुलना में अगर आप कुछ ज्यादा महत्वपूर्ण चीज को पा लेते हैं, तो पुरानी चीज कम महत्व की बन जाती है। महत्व कम होने से वह खुद-ब-खुद आपसे छूटने लगती है। क्या आपने कभी गौर किया है कि जो लोग बौद्धिककार्यों में ज्यादा डूबे रहते हैं, वे सेक्स करने की बजाय कोई किताब पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं।

जब आप बच्चे थे, तब जिन चीजों से आप खेलते थे, जो चीजें आपके लिए बेशकीमती होतीं थीं वे बड़े होने पर आपसे छूट गईं, क्योंकि उम्र के साथ आपने जीवन में कुछ ऐसी चीजें पाईं, जिन्हें आप ज्यादा बड़ा समझने लगे। 
आज आपकी जानकारी में काम-सुख ही सबसे बड़ा सुख है। आपकी काम-वासना के तीव्र होने का यही कारण है , है न ? अगर कोई आपसे कहता है कि ‘यह बुरी चीज है, इसे छोड़ दो।’ तो क्या वाकई आप इसे छोड़ पाएंगे? लेकिन अगर आप इससे भी बड़ी चीज का स्वाद चख लें, तब यह अपने आप आपसे छूट जाएगी। फिर इसे छोड़ने  के लिए आपसे किसी को कुछ कहना नहीं पड़ेगा। इसके लिए आपको अपने जीवन का थोड़ा समय ऐसी दिशा में लगाना होगा, जिससे कि एक बड़ा आनंद आपके जीवन का हिस्सा बन सके। अगर आपको जीवन में अपेक्षाकृत ज्यादा आनंदित करने वाली चीज मिल जाए, तो जाहिर है कि छोटे सुख की इच्छा अपने आप ही मिट जाएगी। सबसे अच्छी बात यह होगी, कि छोटे सुख की चाहत आपके कोशिश करने से नहीं मिटी, बल्कि रुचि कम हो जाने से आपने छोटे सुख को चाहना बंद कर दिया है। आपकी रूचि इसलिए कम हो गयी, क्योंकि अब आपने कोई बड़ी चीज़ खोज ली है। बस इतनी सी बात है। जब आप बच्चे थे, तब जो चीजें आपके लिए बेशकीमती होतीं थीं, वे बड़े होने पर आपसे छूट गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उम्र के साथ आपने जीवन में कुछ ऐसी चीजें पाईं, जिन्हें आप ज्यादा बड़ा समझने लगे। अब भी यही बात लागू होती है। अगर आपको जीवन में ज्यादा तीव्रता वाली, ज्यादा गहरा सुख और आनन्द देने वाली चीज मिल जाए, तो जाहिर है कि ये चीजें अपने आप आपसे छूट जाएंगी।

जानवर हर वक्त इस बारे में ही नहीं सोचते रहते। जब उनमें कामोत्तेजना पैदा होती है, तभी वे इसके बारे में सोचते हैं, अन्यथा वे हर समय नहीं सोचते रहते कि – कौन नर है, कौन मादा!
कामवासना आपके व्यक्तित्व का बस एक छोटा सा हिस्सा है। बेवकूफी भरी नैतिकता और इसे जबरदस्ती  छोड़ने की कोशिशों में  पड़ कर लोग और ज्यादा कामुक हो गए हैं। आप जिसे मर्द या औरत कहते हैं वह, बस एक छोटे से शारीरिक अंतर की बात है, जो एक खास प्राकृतिक प्रक्रिया को पूरा करने के लिए है। आखिर हमने शरीर के एक अंग को इतना अधिक महत्व क्यों दे रखा है? शरीर का कोई भी अंग इतना ज्यादा महत्व दिए जाने योग्य नहीं है। अगर शरीर के किसी अंग को इतना अधिक महत्व देना ही हो, तो महत्व दिमाग को देना चाहिए, न कि जननांग को।

दुर्भाग्यवश, हर तरफ  से मिलने वाली कुछ बेवकुफी भरी सीख जैसे- ‘आपको पवित्र रहना चाहिए, आपको इसके बारे में नहीं सोचना चाहिए’ – ने मामले को उल्टा कर दिया है, लोग सिर्फ  इसी के बारे में सोचने लग गए हैं। अगर आप जीवन को वैसे ही देखें, जैसा कि यह वास्तव में है, तो कामवासना आपके जीवन में बस उतनी ही छोटी जगह पाएगी, जितनी उसे मिलनी चाहिए। तब यह आपके जीवन में इतनी बड़ी चीज नहीं रहेगी, और होना भी यही चाहिए। जगत के सभी जीवों के साथ ऐसा ही होता है। जानवर हर वक्त इस बारे में ही नहीं सोचते रहते। जब उनमें कामोत्तेजना पैदा होती है, तभी वे इसके बारे में सोचते हैं, अन्यथा वे हर समय नहीं सोचते रहते कि – कौन नर है कौन मादा! सिर्फ इंसान ही ऐसा जीव है, जो इस सोच में हर वक्त अटका हुआ है। एक पल के लिए भी इसे न भूल पाने की वजह, उसमें भरी हुई वे मूखर्तापूर्ण सीखें और नैतिकता के पाठ हैं, जिनका जीवन से कोई लेना देना नहीं हैं।

अगर लोग जीवन को वैसे ही देखें, जैसा कि यह वास्तव में है, तो अधिकतर लोग बहुत थोड़े समय में ही कामवासना से बाहर आ जाएंगे। बहुत से लोग इसमें पड़े बिना ही इससे बाहर आ जाएंगे। बात सिर्फ इतनी है कि जीवन का फोकस ठीक न होने की वजह से हर चीज बिगड़ गई है, और बढ़ा-चढ़ा दी गई है। वरना आप देखते, कि ज्यादातर लोगों की इसमें कोई खास रुचि हीं नहीं होती, या फिर इसमें उनकी रुचि सिर्फ उतनी होती जितनी जरुरी है।


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  • sanjeev

    Bahoot hee khoob, saral aur seedhi soch !! Saadar dhanyawaad !! 🙂

  • Abhishek Singh

    Bahoot badhiya kaha aapne ..///

  • Vaibhav Salunke

    मे सहमत नही हु अगर ये होता bill clinton कीव वासना मे पडता ऊसके सामने तो बहोत बडे कार्य थे काम वासना कि तुलना मे

    • Shree Photostate

      Vaibhav salunke sir, unke liye wo chota kaam kyuki wo use bahut salo se kr rhe h

      • Vaibhav Salunke

        देश का पंतप्रधान कोई छोटा पद

        • Shree Photostate

          में समझा नही क्या कहना चाहते हैं आप

          • Vaibhav Salunke

            bill clinton पंतप्रधान था ऊसके पास ईतना बडा पद था फिरभ कामवासना मे फस गया

          • Sourav Kumar

            Vaibhav Salunke Ji आपने सद्गुरू के लेख को सिर्फ पढ़ा है और समझा नही हैं।आपका जो कहना है बिल क्लिंटन के बारे मे उसे स्पष्ट कर दूँ कि इंसान को सिर्फ पंतप्रधान का पद दे देने से ही वह पंतप्रधान नहीं हो जाता बल्कि उसे उस पद की गरिमा को भी समझना पड़ता है और साथ ही साथ उसे अपने कर्मों में भी सम्मिलन करना पड़ता हैं।एक बात और बता दूँ कि कामवासना कोई गलत या अनैतिक वासना(desire) नही हैं,अगर ऐसा होता तो सारे जीव अनैतिक होतें।हमें सिर्फ इतना ध्यान में रखना है कि कामवासना को ही ज्यादा महत्व न दें। बाकि आपकि मर्जी, धन्यवाद।

          • Vaibhav Salunke

            कामवासना से तीव्र ता वाला पद देश के पंतप्रधांने का था 1) देश का पंतप्रधांने ऐसे ही नहीं चुनके आता है
            2) सद्गुरु वाली बात यह पर 100./.लागू नहीं होती गलत लिखा है सद्गुरु ने

        • ठाकुर युवराज सिंह

          उन्हें उस काम मे sex से ज्यादा आनंद नही मिलता होगा कामवासना तब छूटेगी जब इससे अधिक आनंदायक काम मिल जाये
          उदहारण:- आज लोग पैसे कमाने को इतना महत्व देते जिससे पति पत्नी एक दूसरे को समय नही दे पाते और उनके अंदर कामवासना काम होती है

          • Vaibhav Salunke

            उदाहरण गलत धिया आज के जमाने मे पती ऑफिस मेअलगसे ओर एक चकर चलता है कीव की व कि उसकी वासना पुरी नहि होती बडे ऑफिसो मे boss सेक्रटरी के साथ या कोलगार्ल के पास इंद्र देव ने भी यही किया था इंद्र होकर भी क्या क्या किया था विश्वा मित्र ऋषी भी तो इसमे फासा था

          • Vaibhav Salunke
  • Vaibhav Salunke

    मे सहमत नही हु अगर ये होता bill clinton कीव वासना मे पडता ऊसके सामने तो बहोत बडे कार्य थे काम वासना कि तुलना मे

    The Lewinsky scandal was an American political sex scandal that involved 49-year-old President Bill Clinton and a 22-year-old White House intern, Monica Lewinsky. The sexual relationship
    took place between 1995 and 1996 and came to light in 1998. Clinton
    ended a televised speech with the statement that he did not have sexual
    relations with Lewinsky. Further investigation led to charges of perjury and led to the impeachment of President Clinton in 1998 by the U.S. House of Representatives and his subsequent acquittal on all impeachment charges of perjury and obstruction of justice in a 21-day Senate trial.[1] Clinton was held in civil contempt of court by Judge Susan Webber Wright for giving misleading testimony in the Paula Jones case regarding Lewinsky[2] and was also fined $90,000 by Wright.[3] His license to practice law was suspended in Arkansas for five years; shortly thereafter, he was disbarred from presenting cases in front of the United States Supreme Court.[4]