ईशा लहर जुलाई 2017 : ज्योतिष ज्ञान – भ्रम या विज्ञान


ईशा लहर का जुलाई अंक ज्योतिष विद्या के अनके पहलूओं को समर्पित है। क्या ज्योतिष अध्यात्म से जुड़ा है? क्या ज्योतिष द्वारा बताये गए भविष्यफल हमेशा सही होते हैं? जानते हैं ईशा लहर के इस अंक में…

असीम संभावनाओं से भरा है मानव जीवन। विश्व के महाकाव्यों और शास्त्रों में इसकी भव्यता, दिव्यता और विशालता की भरपूर चर्चा की गई है। इसका सौंदर्य और रमणीयता संगीत, नृत्य, कला व सृजन के विभिन्न रूपों में प्रतिबिंबित है। पर ऐसा दुर्लभ जीवन पाकर भी मानव के कष्टों का अंत नहीं है।

आध्यात्मिक नहीं, भौतिक है ज्योतिष

जीवन का जादू दफन हो गया है उन सांसारिक चीजों के ढेर में, जिनमें हम उलझे हुए हैं। इन्हीं सांसारिक चीजों में एक है ज्योतिष। ज्योतिष कोई आध्यात्मिक आयाम नहीं है, यह तो भौतिक है, लौकिक है। हालांकि ज्योतिष में कुछ भी गलत नहीं है, यह एक तरह की विद्या है, शास्त्र है। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड का प्रत्येक पिंड हर दूसरे पिंड को अपनी ओर खींचता है। खगोलीय पिंड, मानवीय पिंड को कैसे प्रभावित करते हैं, इसी का अध्ययन है ज्योतिष।

आखिर क्या बताते हैं ये ज्योतिष-फल? आइए जरा गौर करें। ज्योतिष से आपको यह जानकारी मिलती है कि एक खास समय में आपकी सक्षमता का स्तर क्या होगा… आप बाहरी दुनिया में कितने प्रभावशाली होंगे… आपकी काबिलियत आपको कितनी प्रतिष्ठा, पद और शोहरत दिलाएगी, आदि-आदि।

आनंद और कल्याण भीतर से तय होते हैं

अगर गौर करें तो हमारी हंसी-खुशी और कल्याण को पूरी तरह से बाहरी दुनिया में अर्जित सफ लता के आधार पर तौला जाता है। पर यह सच्चाई नहीं है।

ज्योतिष जिसे दुर्भाग्य कहता है, उसे ही हम अपने परम कल्याण का सोपान बना सकते हैं।
बाहरी दुनिया में आप कितने सक्षम और प्रभावशाली हैं, आपने कितने महान कार्य किए हैं – इनका संबंध आपकी भीतरी खुशी व कल्याण से नहीं है। आपने कितना कुछ किया है यह महत्वपूर्ण नहीं, आप अपने अंदर किस तरह से हैं, कितने जागरूक हैं, चेतना में कितने विकसित हैं, यही तय करता है आपके आनंद और कल्याण को। जीवन में कोई भी चीज समस्या नहीं है, हर चीज एक संभावना है। ज्योतिष जिसे दुर्भाग्य कहता है, उसे ही हम अपने परम कल्याण का सोपान बना सकते हैं। जीवन के हर पहलू को, हर अनुभव को अपनी पूर्ण सामथ्र्य में विकसित होने का एक जरिया बना सकते हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता है कि एक सचेतन इंसान हमेशा मुश्किलों में तप कर ही निखरता है, फलता-फूलता है।

लोग केवल सफलता के लिए ज्योतिष से जुड़ते हैं

ज्योतिष का अगर सही रूप में इस्तेमाल किया जाए तो यह जीवन को समृद्ध बना सकता है पर अधिकतर लोग इसकी शरण में सफलता व आश्वासन पाने के लिए ही जाते हैं। सफलता और असफलता की हमारी धारणाएं बेहद बचकानी हैं, जिंदगी के समस्त दुखों और कष्टों की बुनियाद ये धारणाएं ही हैं। यह जीवन किसी से बेहतर बनने के लिए नहीं है, यह तो अपनी परम प्रकृति में खिलने के लिए है। एक इंसान के तौर पर अगर हमने खुद को अपने शरीर और मन के दायरे में ही सीमित कर रखा है, तो भविष्यवाणियां शत-प्रतिशत सही साबित हो सकती हैं, पर अगर हमने खुद को चेतना के उच्च आयामों में स्थापित कर लिया है तो भविष्यवाणियों को झूठा साबित किया जा सकता है। सद्गुरु कहते हैं, ‘भविष्य-फल इसलिए लिखे जाते हैं कि आप उन्हें गलत साबित कर सकें। आपमें इसकी काबिलियत है।’

आप अपनी इस काबिलियत को जानें, समझें और आजमाएं, इसी कामना के साथ हम यह अंक आपको सौंपते हैं।

 

– डॉ सरस

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