4 टिप्स जो बदल दें जिंदगी

चार टिप्स जो बदल दें जिंदगी
चार टिप्स जो बदल दें जिंदगी

सद्‌गुरुजीवन में बहुत बड़े बदलाव के लिए हमें बहुत बड़े काम करने की जरूरत नहीं है। बड़े बदलाव बस छोटे-छोटे कदमों से आ जाते हैं। सिर्फ चार छोटे टिप्स जो आपके जीवन को बदल कर रख देंगे। क्या हैं वो चार टिप्स?

1. सत्य का स्पर्श

सत्य का हमारे साथ बहुत गहरा संबंध है। अगर ऐसा न होता तो हमारा अस्तित्व ही नहीं होता। लेकिन आजकल हाल ये है कि आप सत्य से कोई संबंध ही नहीं रख रहे हैं। यह एकतरफा प्यार जैसा है। आप अपनी जिंदगी में चाहे जिन भी हालातों से गुजर रहें हों, पर आपका अगर सत्य के साथ प्रेम संबंध नहीं है तो आपको ऐसा लगेगा कि जिंदगी रोज आपका बलात्कार कर रही है।

अगर किसी भी चीज के साथ आपका जुड़ाव नहीं है, तो आप परेशानी और कष्ट महसूस करेंगे। किसी सुबह हो सकता है कि आपको ऐसा भी लगे कि उठने का क्या फायदा, लेकिन अगर किसी तरह से आपने किसी ऐसी चीज का स्पर्श कर लिया जो आपके द्वारा बनाई हुई नहीं है, अगर आपने सत्य का स्पर्श कर लिया, तो अचानक आप उत्साह से भर जाएंगे।

2. झूठ का खात्मा

सत्य के साथ संबंध स्थापित करने और उसकी ओर बढऩे का मतलब यह है कि जो कुछ भी झूठ है, उसे मार डाला जाए, उसे खत्म कर दिया जाए। बस दो पल खर्च करके अपने बारे में कम से कम एक ऐसी चीज ढूंढने की कोशिश कीजिए, जो आपके जीवन के लिए आवश्यक नहीं है और उसे आज ही खत्म कर दीजिए। देखिए, खत्म करने से मेरा मतलब ये नहीं है कि आप अपने बॉस के बारे में, अपनी सास के बारे में या अपने पड़ोसी के बारे में सोचना शुरू कर दें। आपको अपने भीतर की किसी ऐसी चीज को मारना है, जो आपके जीवन के लिए उपयोगी नहीं है। कुछ ऐसा जैसे कि ‘मैं अपने क्रोध को मार दूंगा।’ अगर आप किसी चीज को मार रहे हैं तो यह वास्तव में मरनी चाहिए यानी कल को यह लौटकर न आए।

किसी ऐसी खास चीज का पता लगाइए, जिसके बिना आप बेहतर इंसान हो जाएंगे। कोई ऐसी चीज, जिसे लेकर आज ही आप एक ठोस कदम उठा सकते हैं, चाहे वह कदम कितना भी छोटा या मामूली क्यों न हो, आपके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। आपके जीवन में उठाया गया ऐसा छोटा सा कदम भी इस धरती के तमाम धर्मग्रंथों को पढऩे से कहीं बेहतर होगा। जिन धर्मग्रंथों को आत्मसात नहीं किया गया, जिन्हें पढ़ा गया और फिर भुला दिया गया, ऐसे धर्मग्रंथों का कोई उपयोग नहीं है। अगर आप एक साधारण सा कदम उठा लें तो जीवन में बदलाव आ जाएगा, कम से कम कुछ हद तक ही सही, लेकिन बदलाव आ जाएगा।  मैं बस एक साधारण से कदम की बात कर रहा हूं, कोई ऐसी लंबी चौड़ी लिस्ट नहीं बनानी है, जिसे आप पूरा ही नहीं कर पाएंगे। किसी ऐसी बात पर मत जाइए, मसलन मैं भूत की बातों के बारे में नहीं सोचूंगा। मैं भविष्य की चिंता नहीं करूंगा। मैं वर्तमान में जिऊंगा। क्योंकि ये ऐसी चीजें नहीं हैं, जिन्हें आप केवल पक्के इरादे से हासिल कर सकें। इसके लिए बोध और चेतना की जरूरत है। बस एक छोटी सी खास चीज को चुनें, जिसे आप आगे नहीं करेंगे, चाहे जो हो जाए। ‘मैं क्रोध से भरे शब्दों का प्रयोग नहीं करूंगा। मैं क्रोध नहीं करूंगा।‘ ऐसी बातें सोचना झूठ होगा, क्योंकि यह आपके बस में ही नहीं है।

किसी ऐसी चीज के बारे में सोचिए, जिसे आप कर सकते हैं और आप करेंगे। जीवन को रूपांतरित करने का यही तरीका है। आप छोटे-छोटे कदम उठाइए और इन कदमों पर वास्तव में काम कीजिए। एक बार जिन चीजों को खत्म करने का फैसला आपने ले लिया, वे दोबारा सिर न उठाएं। अगर आप जीवन के सच की ओर बढऩा चाहते हैं, तो जो सच नहीं है, उसे आप कम से कम बढ़ावा न दें। एकदम से झूठ खत्म हो जाए, यह संभव नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे आपको इसे कम करते रहना होगा।

3. मौजूदा स्थिति से निकलना

इस बात पर ध्यान दें कि जीवन में क्या बदला जा सकता है। जिन चीजों को आप बदल नहीं सकते, उनके बारे में रोने-धोने से पता चलता है कि आप मौजूदा स्थिति में ही रहना चाहते हैं। अगर आप किसी मरे हुए व्यक्ति पर रोते नहीं हैं, अगर आप उन स्थितियों का विलाप नहीं करते, जिन्हें बदलना आपके वश में नहीं, तो आपको लगता है जैसे आपको कोई चिंता ही नहीं है। इसी के चलते आप वैसा नहीं होना चाहते और उन चीजों को लेकर भी रोते रहते हैं जिन्हें आप बदल नहीं सकते। जिन चीजों को बदला जा सकता है, आप उनके बारे में कुछ भी नहीं करते। आपको ऐसे झूठ को हमेशा ओढ़ करके नहीं जीना चाहिए।

अगर आप झूठ को बढ़ावा देना कम कर दें, तो सच अपने आप बढऩे लगेगा। कम से कम महीने में एक बार हर पूर्णिमा के दिन पूरी जागरूकता के साथ देखें और अपने बारे में एक छोटी सी चीज का पता लगाएं, जो आप बदलना चाहते हैं। मसलन जब भी मैं भोजन करूंगा, उससे पहले दस सेकंड के लिए मैं भोजन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करूंगा, जो अब मेरा हिस्सा बनने जा रहा है। या जब भी मैं कोई चीज इस्तेमाल करूंगा, जोकि मेरे जीवन का एक जरूरी हिस्सा है, जैसे धरती, पानी, हवा और मेरे आसपास की ऐसी ही कोई और चीज, तो मैं उसका कम से कम एक फीसदी की बचत करूंगा। या जब भी मैं घर में घुसूंगा, हर बार मै अपने जूते साफ जरूर करूंगा। या मैं अपनी प्लेट में उतना ही भोजन लूंगा, जितना मैं खा सकता हूं। ये छोटी-छोटी बातें आपके जीवन की दिशा बदल देंगी और आपको एक अलग दिशा मिलेगी।

4. समर्पण

जीवन के मूल ताने-बाने को ठीक करने और सत्य की ओर बढऩे का सबसे आसान तरीका यह है कि या तो आपको जागरूकता चुननी चाहिए, जो कि एक मुश्किल काम है या आपको भक्ति या समर्पण की राह चुननी चाहिए, जो आसान तो है, लेकिन दूसरे मायनों में कठिन भी है। भक्ति एक दिल-रहित चीज है। इसमें आपका दिल आपका नहीं रह जाता। आप इसे पूरे ब्रह्माण्ड में फेंक देते हैं, लेकिन हर वक्त भक्ति की टीस आपके भीतर उठती रहती है। अगर आप भक्ति की आग जलाए रखते हैं, तो जागरूकता अपने आप पैदा होगी।

तो भक्ति एक जरिया है, जो आपको खुद से अलग करता है। अगर भक्ति की आग आपके भीतर जलनी शुरू हो जाए और मैं आपको एक छोटी सी तकनीक बता दूं, तो यह सब एक शानदार प्रक्रिया के रूप में काम करने लगेगा। अगर यह आधार नहीं है तो कोई तकनीक या तरीका वास्तव में आपको रूपांतरित नहीं कर सकता। चाहे वह इनर इंजीनियरिंग हो, भाव स्पंदन हो या सम्यमा प्रोग्राम हो। केवल तकनीक की प्रशंसा करना काफी नहीं है। कोई चीज कितनी शानदार है, मसला यह नहीं है। वह कितनी कारगर साबित हुई, असली बात यह है। अगर आप जीवन के मूल ताने-बाने को ठीक कर सकें तो यह शानदार तरीके से काम करेगा।

ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें भक्ति या समर्पण शब्द से बड़ी एलर्जी है क्योंकि उन्हें लगता है कि भक्ति का अर्थ मंदिर, चर्च या ऐसे ही किसी और स्थान पर जाना है। भक्ति से मेरा यह मतलब नहीं है। क्या इस दुनिया में किसी भी इंसान ने बिना अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हुए कोई बड़ा और महत्वपूर्ण कार्य किया है? बिना समर्पण के आप जो भी काम करेंगे, वह औसत दर्जे का ही होगा। वास्तविक अर्थों में महान चीजें तभी होती हैं जब कोई शख्स उस काम के प्रति जबर्दस्त समर्पण और जुनून दिखाता है, जो वह कर रहा है।

यह केवल आध्यात्मिक प्रक्रिया के मामले में ही सत्य नहीं है। बात चाहे विज्ञान की हो, आर्ट की हो, संगीत की हो या किसी और क्षेत्र की, जब तक कोई शख्स अपने लक्ष्य के प्रति अपना जीवन समर्पित नहीं करता, तब तक कभी कुछ बड़ा और महत्वपूर्ण नहीं कर पाता। जिस भी चीज को आप उपयुक्त समझते हैं, जिस भी चीज को आप अपने जीवन में उच्चतम स्थान देते हैं, उसके प्रति खुद को समर्पित कर दीजिए। अगर आपने इस तरह से अपने जीवन के ताने-बाने को, जीवन रूपी कपड़े को अपने लिए सेट कर लिया, तो मैं एक टांका लगाऊंगा और यह एक जबर्दस्त डिजाइन बन जाएगा।

 


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