भीतरी यात्रा : कैसे करें?

भीतरी यात्रा: कैसे करें?
भीतरी यात्रा: कैसे करें?

सद्‌गुरुहमारी परंपरा हमें बताती है कि इश्वरत्व हर जगह और हर समय मौजूद है. तो फिर ऐसे में आध्यात्मिक लक्ष्य की ओर बढ़ने के, या अपनी भीतर की यात्रा करने का क्या अर्थ है?

प्रश्न:

मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि यह अंतरतम की यात्रा क्या है? हम उसे कैसे करते हैं? मैं इस अंतरतम की यात्रा पर कैसे जा सकता हूं?

सद्‍गुरु:

हमें इसे ठीक से समझना होगा.. अंतरतम की यात्रा – अगर आपको कोई यात्रा करनी है, तो आपको एक दूरी की जरूरत होती है, है न? यात्रा करने की बुनियादी जरूरत है कि आपके पास एक दूरी होनी चाहिए।

दुनिया में सबसे आसान काम है, कुछ न करना। लेकिन फिलहाल आपने उसकी उल्टी दिशा में इतनी मेहनत कर ली है कि अब उसने गति पकड़ ली है। अब उसे उलटना और कुछ न करना एक असंभव सा काम लगता है।
अगर दूरी नहीं होगी, तो आप यात्रा कैसे करेंगे? तो अंतरतम की यात्रा करने की कोशिश मत कीजिए। लेकिन ‘मैं अंदर जाना चाहता हूं,’ किसके अंदर? कौन किसके अंदर जाना चाहता है? ‘मैं अपने अंदर जाना चाहता हूं,’ यह क्या है?  क्या कोई अपने अंदर जा सकता है?

अंतरतम की कोई यात्रा नहीं होती। अगर किसी को ऐसा लगता है तो उसे ईलाज की जरूरत है। उसे गुरु की नहीं, मानसिक चिकित्सक की जरूरत है। गुरु उन लोगों के लिए होता है, जो सामान्य होते हैं लेकिन कुछ और जानना चाहते हैं। अगर आप असामान्य हैं, तो आपको गुरु की नहीं, मानसिक चिकित्सक की जरूरत है।

तो किसी तरह की यात्रा करने की कोशिश मत कीजिए। सिर्फ एक काम कीजिए, आज घर जाइए, कहीं भी जाने की कोशिश मत कीजिए, न बाहर की यात्रा, न अंदर की यात्रा, सिर्फ चुपचाप बैठिए। अगर आप सिर्फ एक पल के लिए बैठ सकते हैं, तो आप कामयाब हो गए। लेकिन समस्या यह है कि अगर आप यहां बैठते हैं, तो आप कहीं भागना चाहते हैं। सिर्फ चुपचाप बैठें, आपका शरीर कहीं नहीं जा रहा, आपका मन कहीं नहीं जा रहा, आपकी भावनाएं कहीं नहीं जा रहीं, आपकी कल्पनाएं कहीं नहीं जा रहीं। कहीं भी मत जाइए। सिर्फ बैठिए। बस यही तरीका है।

तो अंतरतम की यात्रा की कोई जरूरत नहीं है। आप यहां आ चुके हैं। अगर आपका जन्म नहीं हुआ होता, तो आपको खुद को ढूंढने के लिए यात्रा पर जाना पड़ता। आप तो यहां आ चुके हैं। क्या आप यहां मौजूद हैं? आपको लगता है कि अगर आप यहां बैठें, तो आपकी जिन्दगी बरबाद हो जाएगी। आपको कहीं जाना है। आपको हर समय कहीं न कहीं जाना है। नहीं, बस यहां बैठकर देखिए।

दुनिया में सबसे आसान काम है, कुछ न करना। लेकिन फिलहाल आपने उसकी उल्टी दिशा में इतनी मेहनत कर ली है कि अब उसने गति पकड़ ली है। अब उसे उलटना और कुछ न करना एक असंभव सा काम लगता है। तो, अब आप अंतरतम की यात्रा भी करना चाहते हैं। मान लीजिए, वहां बहुत ट्रैफिक हुआ और रास्ता जाम हो गया, तो आप क्या करेंगे? अगर आप कोई यात्रा करने की कोशिश करेंगे, तो ट्रैफिक की समस्याएं होंगी। हर तरह की समस्याएं आएंगी।

सिर्फ एक काम कीजिए, आज घर जाइए, कहीं भी जाने की कोशिश मत कीजिए, न बाहर की यात्रा, न अंदर की यात्रा, सिर्फ चुपचाप बैठिए।
और अगर लाल बत्ती हो गई, तो आप क्या करेंगे? इसलिए किसी तरह की यात्रा मत कीजिए। इतनी सरल चीज को जटिल मत बनाइए। केवल यह समझिए कि आप जीवन का एक हिस्सा हैं। आप कोई विचार नहीं हैं, आप कोई भावना नहीं हैं। आप हाड़-मांस नहीं हैं। आप बस जीवन हैं। लगातार अपने आप को याद दिलाएं कि ‘मैं सिर्फ जीवन हूं’। ये सब चीजें मेरे साथ घटित हुईं, शरीर घटित हुआ, विचार घटित हुए, भावनाएं घटित हुईं, शादी घटित हुई, बच्चे घटित हुए, लेकिन मैं बस जीवन का एक हिस्सा हूं। क्या यह सच है? या मैं आपको प्रभावित कर रहा हूं? यह सच है। कृपया आप सिर्फ सच्चाई के साथ रहिए, बाकी चीजें अपने आप हो जाएंगी। सिर्फ सच के साथ रहें, बाकी चीजें अपने आप हो जाएंगी। आप हर समय खुद से झूठ बोलते रहते हैं, ऐसी चीजें बोलते रहते हैं जो सच नहीं हैं। कृपया ध्यान दीजिए कि आप किस किस तरीके से खुद से झूठ बोलते हैं। ईमानदारी से इस बात पर ध्यान दीजिए। बस ये बेकार की चीजें बंद कर दीजिए। लेकिन आप सरल नहीं होना चाहते, आप थोड़ा जटिल होना चाहते हैं। सरलता मूर्खता की तरह लगती है, लेकिन ऐसा नहीं है। जो भी चीज गहरी होती है, वह सरल होती है।

 


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