भगवान कौन हैं – ये बच्चे को कैसे समझाएं?

भगवान कौन हैं - ये बच्चे को कैसे समझाएं?

सद्‌गुरुएक साधक ने सद्‌गुरु से सवाल पूछा कि उनकी पांच साल की बेटी ये जानना चाहती है कि भगवान कौन हैं और भगवान की मां कौन हैं? इसे बच्चे को कैसे समझाया जाए? जानते हैं सद्‌गुरु का उत्तर

प्रश्न : सद्‌गुरु, मेरी पांच साल की बेटी मुझसे पूछती है, ‘भगवान कहां से आए हैं और उनकी मां कौन हैं?’ बताइए मैं उसे क्या जवाब दूं?

सद्‌गुरु : अरे आप तो भारत के हैं, आपको तो पता होगा कि भगवान की मां कौन हैं, वह कब पैदा हुए और उनके बारे में और भी कई तरह की जानकारियां होंगी आपके पास। भले ही औरों को पता न हो, लेकिन आप तो भारतीय हैं, आपको तो सब पता ही होगा।

प्रश्न : लेकिन आप तो जानते ही हैं कि सवाल पर सवाल निकलता चला जाता है।

साफ़-साफ़ मान लीजिये कि आप नहीं जानते

सद्‌गुरु : देखिए, एक परिपक्व और बहुत बड़े ज्ञानी पिता की तरह व्यवहार करने के बजाय अपने बच्चे से साफ-साफ कह दीजिए कि मैं भी तुम्हारी ही तरह मूर्ख हूं, मुझे भी तुम्हारी तरह इन सब चीजों के बारे में कुछ नहीं पता।

माता-पिता जो सबसे बड़ी गलती करते हैं, वो यह कि वे खुद को अपने बच्चों से एक पायदान ऊपर रखते हैं।
यह अच्छी बात होगी अगर आप खुद को अपने बच्चे के बराबर रखें। माता-पिता जो सबसे बड़ी गलती करते हैं, वो यह कि वे खुद को अपने बच्चों से एक पायदान ऊपर रखते हैं। अपने बच्चों के साथ जो सबसे बड़ी गलती आप कर सकते हैं, वह यही है। आप उन्हें अपने बराबर रखें। हो सकता है कि तब शायद वो आपके प्रति उतने आज्ञाकारी न हों, लेकिन आपका यह रवैया उनके जीवन में शानदार चीजें कर सकता है। वे अपेक्षाकृत बेहतर इंसान बनेंगे।

बता दें कि आपको कोई जानकारी नहीं है

उनसे हमेशा एक कदम ऊपर रहकर भले ही आप उन्हें हर चीज दे सकते हैं, आप उन्हें गले लगा सकते हैं, आप उन्हें पुचकार और दुलार सकते हैं, लेकिन ऐसा करके आप उनको कई तरीके से बर्बाद कर देते हैं।

उन्हें बताइए कि आपको बस इतना पता है कि जीविका कैसे कमाई जाती है। इसके अलावा, आप कुछ नहीं जानते।
आप उनके साथ ऐसा व्यवहार मत कीजिए कि उन पर हर वक्त लाड़-प्यार लुटाते रहें। आप उनके साथ एक आम इंसान की तरह व्यवहार कीजिए। इससे वे अच्छी तरह बड़े होंगे। आप ऐसा मत दिखाइए कि आपको दुनिया में हर चीज के जवाब जानना जरूरी है। आपको इसकी कोई जरूरत नहीं है। उन्हें साफ-साफ बता दीजिए कि आप को किसी भी चीज के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्हें बताइए कि आपको बस इतना पता है कि जीविका कैसे कमाई जाती है। इसके अलावा, आप कुछ नहीं जानते। कृपया उन्हें यह स्पष्ट कर दीजिए, ‘मैं इसी तरह अज्ञानता में रहकर बड़ा हुआ। मैं नहीं चाहता कि यही सब तुम्हारे साथ भी हो। चलो इस पर विचार करते हैं।’

उन्हें जीवन में कुछ और पता होना चाहिए

जो कुछ आपके साथ हुआ, वो सब उनके साथ नहीं होना चाहिए। जब तक वे आपकी उम्र में पहुंचेंगे, उन्हें जीवन में कुछ और पता होना चाहिए।

आपके लिए आपके भौतिक आराम व सुविधाएं और आपका जीवनयापन इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि आप बाकी सारी चीजों से मुंह मोडऩे के लिए तैयार हैं।
अगर आप उनकी बहुत ज्यादा देखभाल करेंगे तो उनका जीवन भी आप जैसा ही बन जाएगा। इस तरह जीने का कोई मतलब नहीं है। जहां तक रोजी-रोटी की बात है तो वह अपने जीने लायक कमा लेंगे, यह मत सोचिए कि वे भूखे मरेंगे। रोजी-रोटी कमाने के बहुत से तरीके हैं। फिलहाल आपने पैसे कमाने को बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया है, जिसके चलते आप जीवन के दूसरे पहलुओं की अनदेखी कर रहे हैं। यह दुनिया बहुत असंतुलित है। आप सामाजिक मजबूरियों के अनुसार काम कर रहे हैं, जिसके चलते आप बेहद असंतुलित हो गए हैं। आपने अपने साथ यह बहुत बड़ा अन्याय किया है। आपके लिए आपके भौतिक आराम व सुविधाएं और आपका जीवनयापन इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि आप बाकी सारी चीजों से मुंह मोडऩे के लिए तैयार हैं। मुझे उम्मीद है कि यह चीज आप अपने बच्चों के साथ नहीं करेंगे।

 


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