स्वतन्त्रता दिवस 2014; सद्‌गुरु का सन्देश

 

आज हमें सद्‌गुरु देश के सामने मौजूद चुनौतियों और संभावनाओं के बारे में बता रहे हैं…

आज एक देश के रूप में हम एक कगार पर खड़े हैं। आजादी के इन सात दशकों का सफर कोशिशों और त्याग, भ्रष्टाचार और घपलों, महान उपलब्धियों और गंवा दिए गए मौकों का सफर रहा है। इतने सालों में हमें चार युद्ध देखने पड़े और अब भी देश आतंकवाद के खतरों से जूझ रहा है। इन सब के बावजूद, हम उस मुकाम तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं जहां एक देश के रूप में हम एक बिल्कुल नई संभावना हमारे सामने मौजूद है।

आने वाला दशक एक विशाल जनसमूह की गरीबी और अभाव की लंबे समय से चली आ समस्याओं को सुलझाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पहली बार हमें एक ऐसा मौका मिला है कि हम बड़ी संख्या में लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बना सकें। अगर एक देश के रूप में हम एकजुट होकर जागरूकता के साथ और ध्यान लगाकर काम करें, तो यह एक हकीकत बन सकता है। हमारी पीढ़ी को अब तक असंभव रही इस संभावना को साकार करने का सौभाग्य मिलेगा। हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह देश को चलाने की जिम्मेदारी उठाने वाले लोगों के हाथ मजबूत करे।

मेरी कामना है कि हमारा देश नई संभावनाओं के युग में प्रवेश करे।

प्रेम व प्रसाद,

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