नदी अभियान : देखें लाइव – भोपाल कार्यक्रम की झलकें

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23 सितम्बर के दिन भोपाल में नदी अभियान रैली कार्यक्रम आयोजित किया गया। मेज़बान थे माननीय मुख्य मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी। जानते हैं भोपाल में हुए कार्यक्रम के बारे में और देखते हैं कुछ तस्वीरें। 

इंदौर में एक सफल आयोजन के बाद, नदी अभियान रैली आज सुबह भोपाल के लिए रवाना हुई। इस शाम के आयोजन के लिए सद्‌गुरु और स्वयंसेवक इंदौर से सीधे भोपाल के लिए रवाना हुए। रैली के प्रतिभागी थोड़ा पहले उज्जैन की ओर निकल पड़े थे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन किए। महाकालेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

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सद्‌गुरु का आगमन

भोपाल शुरुआत से ही नदी अभियान रैली का केंद्र बना हुआ है, जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हमारी नदियों को बचाने के लिए सद्‌गुरु के आह्वान पर एक स्पष्ट कार्यवाही करते हुए नदियों के पुनरुत्थान को गति दी थी।

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कार्यक्रम के दौरान चर्चा करते सद्‌गुरु और माननीय मुख्य मंत्री शिवराज जी

 

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कार्यक्रम में मौजूद समर्थक

 

वे ऐसा करने वाले सबसे पहले मुख्यमंत्री थे। दो महीने से ज्यादा समय से अब, रैली से संबंधित जागरूकता अभियान पूरे जोरों पर है। ये अभियान खासकर उन ऊर्जावान स्वयंसेवकों की ओर से चलाए जा रहे, हैं जो यहाँ मौजूद हैं। ये नदी अभियान से भोपाल के जुड़ाव के अनुकूल ही था, कि भोपाल में प्रवेश करते ही हर जगह हमें रैली के बारे में पोस्टर और बैनर दिख रहे थे। एक भी लैंप पोस्ट या ट्रैफिक सिग्नल स्टेंड को छोड़ा नहीं गया था।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के आवास पर 23 सितंबर को हुए  15वें नदी अभियान कार्यक्रम में 5000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। एक हॉल स्वयंसेवक ने हमसे साझा किया कि अनुमानित 1600 लोग बिना किसी पास के आए थे, और यह कृपा ही थी कि वे उन अतिरिक्त कुर्सियों को ढूंढने में कामयाब रहे, जिन्हें किसी अन्य कार्यक्रम के लिए मंगवाया गया था। अनुमान है कि वीआईपी भी अपेक्षा से ज्यादा संख्या में पहुंचे थे और स्वयंसेवकों को उनके बैठने की व्यवस्था बेहतरीन तरीके से करने के लिए काफी नए तरीके खोजने पड़े।

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आयोजन स्थल में बैठे दर्शक

आयोजन में मनोरंजन के लिए केवल एक ही कलाकार समूह को आमंत्रित किया गया था, ताकि वास्तविक मुद्दे – नदी अभियान – से फोकस न भटके। एक स्थानीय कलाकार प्रह्लाद टिपानिया, जो कबीर भजनों में माहिर हैं और जिन्हें कुछ प्रशंसक “मालवा के रत्न” कहकर बुलाते हैं, ने अपने समूह के साथ सुंदर स्वदेशी गीत गाकर लोगों को उल्लासित किया।

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कबीर भजन गायक प्रह्लाद टिपानिया जी की प्रस्तुति

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प्रह्लाद जी की धुनों पर मंत्रमुग्ध दर्शक

उनका दूसरा गीत नदियों के महत्व पर था। उस गीत पर सद्‌गुरु खड़े होकर तालियाँ बजाने लगे, और फिर हॉल में बैठे सभी लोग भी ताली बजाते हुए एक लय में आ लगे। पूरा हॉल उन्माद में था।

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दर्शक प्रह्लाद जी के धुनों पर नाचते हुए

 

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झूमते नाचते दर्शक

प्रह्लाद जी के कॉन्सर्ट के समापन के बाद कोई समय बर्बाद नहीं किया गया, और गणमान्य व्यक्तियों ने मंच पर अपना स्थान ग्रहण किया। आयोजन की विशिष्ट बात ये थी, कि  इस रैली में मंच पर सद्‌गुरु के अलावा सिर्फ एक ही व्यक्ति था, और वे मध्य प्रदेश राज्य की रैली के सबसे बड़े कार्यकर्ता – माननीय मुख्यमंत्री जी थे।

नर्मदा नदी के किनारे पर पेड़ लगाकर, नदी अभियान को तत्काल प्रतिक्रिया देने वाले पहले मुख्यमंत्री होने के लिए सद्‌गुरु ने उनकी सराहना की। एक दिन में छह करोड़ वृक्ष लगाए गए! यह भी घोषणा की गई कि ईशा स्वयंसेवकों के साथ मिलकर एक गैर-लाभकारी संगठन जन अभियान परिषद, मिस्ड कॉल देने के प्रचार के लिए हर गांव में जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी को वचन दिया कि मध्यप्रदेश के 7.5 करोड़ लोग हमारी नदियों को बचाने के इस अभियान का समर्थन कर रहे हैं।

23 सितंबर एक और कारण से रैली के लिए महत्वपूर्ण था – यह सद्‌गुरु का सम्बोधि दिवस भी था। यह एक गहराई से छूने वाला क्षण था क्योंकि उन्होंने यह बताया कि इसी दिन पैंतीस साल पहले एक गहन अनुभव ने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया।

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सद्‌गुरु का वक्तव्य

अंत में, एक महिला ने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ नदी अभियान रैली की तुलना करते हुए एक सवाल पूछा और जानना चाहा कि क्या इस तरह के बड़े आंदोलन वास्तव में आवश्यक हैं या नहीं। सद्‌गुरु ने जवाब दिया कि स्वतंत्रता आंदोलन के मामले में, दुश्मन बाहरी था, जबकि इस मामले में दुश्मन हमारे भीतर है। यह एक ऐसी भौतिक इकाई नहीं है जिसे हम लड़ सकते हैं, इसलिए हमें एक बहुत बड़े आंदोलन की आवश्यकता है। यही कारण है कि इसे सफल बनाने के लिए भारत की संपूर्ण 130 करोड़ जनसंख्या की आवश्यकता है।

सद्‌गुरु ने नदी स्तुति गाकर कार्यक्रम का समापन किया, जिसके बाद लोग छंटने लगे। इसके बाद सद्‌गुरु मीडिया से मिलने चले गए। एक और कार्यक्रम ने हमारे अन्दर उत्साह भर दिया है, और हमें लगता है कि जैसे जैसे हम आगे बढ़ेंगे, नदी अभियान रैली नई ऊँचाइयों तक पहुंचेगी।


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