चली मैं शिव की डगरिया

dhyanalinga-iam-shiva-640x360

महाशिवरात्रि करीब है। उस पावन रात की तैयारी में, हम आपके लिए एक अनिवासी भारतीय छात्रा का संस्मरण ले कर आए हैं। वह अपने उस परिवर्तनकारी अनुभव के बारे में बता रही हैं जब कुछ वर्ष पहले वह पहली बार ध्यानलिंग आई थीं, तब कैसे शिव ने उनकी ज़िन्दगी को पूरी तरह बदल दिया था।

कंकरीले रास्ते पर टैक्सी के टायर चरमराहट की आवाज के साथ रुके तो मैं समझ गई कि उबड़-खाबड़ रास्ते का यह सफर आखिरकार अपने मुकाम पर आ पहुंचा है। जब मैंने दरवाजा खोला, तो मेरे चारो ओर मौजूद हरे-भरे घने जंगल ने मेरी विदेशी नजरों का स्वागत किया, मुझे बाद में पता चला कि वह जंगल छिपे हुए वन्यजीवन से भरपूर है। मैं सावधानी से पथरीली पट्टी पर उतरी और अपने माता-पिता के पीछे-पीछे फूस के छप्पर वाली एक छोटी सी कुटिया की ओर चल पड़ी जो झाड़ियों के बीच बनी हुई थी। वहां पर एक मुस्कुराते हुए दक्षिण भारतीय चेहरे ने हमारा स्वागत किया और वो हमें और आगे ले गए जहां वीराने में पत्थर का एक विशाल भवन बना था। मैं ग्रेनाइट के स्तंभों और नक्‍काशियों से होते हुए एक विशाल गुंबद के प्रवेश द्वार तक पहुंची, जहां अंदर बहुत मद्धम रोशनी थी।

एक नया अनुभव

फिर धीरे-धीरे घोर मौन मुझ पर व्याप्त हो गया और मैंने बंद पलकों के पीछे अंधेरे खालीपन में अपने आप को डूबता महसूस किया। मैं एक दूसरी दुनिया में पहुंच गई थी, अंदर की एक अपरिचित विशाल दुनिया में, जिससे मेरा सामना पहले कभी नहीं हुआ था।

मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि मैं एक ऐसे स्थान पर जाऊंगी, जो मेरे जीवन का मार्ग ही बदल कर रख देगा। मैं एक दूसरी दुनिया में पहुंच गई थी। वह अंतर्मन की एक विशाल अपरिचित दुनिया थी, जिससे मेरा सामना पहले कभी नहीं हुआ था।

श्वेत कपड़ों में एक चश्माधारी, घुटे सिर वाले भिक्षु ने हमारा स्वागत किया। उस भिक्षु की प्रफुल्लित मुस्कुराहट के बाद मैंने इस बात की ओर ध्यान दिया कि वह एक महिला, एक ब्रह्मचारिणी थीं। उन्होंने हमें मौन रहने और अपनी डिजिटल कलाई घड़ियों को मूक करने का इशारा किया। बाद में मुझे यह एहसास हुआ कि यदि उन्होंने यह जरूरी हिदायत नहीं दी होती, तो मैं उन अनुभवों से वंचित रह जाती। हम खामोशी के साथ गुंबद में प्रवेश किए और नीचे बैठ गए। अंदर ठीक बीच में एक विशाल लिंग था। मैंने कभी इतना बड़ा लिंग नहीं देखा था। उस काले रंग के लिंग से फूलों की एक लंबी माला लिपटी हुई थी।

इसका संबंध शिव से था यह बात अमेरिका में जन्मा मेरा भारतीय मन समझ सकता था। मैं ऐसी बहुत जगहों पर नहीं गई थी क्योंकि मेरा परिवार मूल रूप से वैष्णव है। लेकिन मेरी मां इस बात पर अडिग थी कि हम तमिलनाडु के इस स्थान पर जरूर जाएं, इसलिए मेरे पिता और मेरे पास कोई चारा नहीं था। मेरे लिए यह कोई मायने नहीं रखता था। मैं एक कॉलेज छात्रा थी जो अपने पैतृक देश में गरमी की छुट्टियां मनाने आई थी। मैं बस अपनी किताबों से दूर एक और दिलचस्प सैर पर थी। मैंने सपने में भी उम्मीद नहीं की थी कि मैं एक ऐसी जगह जा रही हूं जो मेरे जीवन का रास्ता ही बदल देगा।

मैं कुछ देर तक लिंग को निहारती रही। फिर धीरे-धीरे घोर मौन मुझ पर व्याप्त हो गया और मैंने बंद पलकों के पीछे अंधेरे खालीपन में अपने आप को डूबता महसूस किया। शांति की एक तीव्र भावना उत्पन्‍न हुई और ऐसा लगा मानो मेरा शरीर और मन दूर होता जा रहा है। मैं एक दूसरी दुनिया में पहुंच गई थी, अंदर की एक अपरिचित विशाल दुनिया में, जिससे मेरा सामना पहले कभी नहीं हुआ था। शाश्वत और आदिम मौन के इस आयाम में, मेरा तुच्छ अस्तित्व बस एक अस्थायी घटना थी। इसने मेरे सूक्ष्म मन को पूरी तरह अभिभूत कर लिया। मुझे नहीं पता कि मैं कितनी देर वहां बैठी रही। मुझे तब होश आया जब मेरे पिता मुझे उठने के लिए कह रहे थे। मैं स्तब्ध सी उस दोपहर की धूप में बाहर निकली बिल्कुल हक्की-बक्की। मैं अब तक जितनी जगहों पर गई थी, यह स्थान उन सबमें सबसे विचित्र था।

शिव की खोज

मेरे लिए मंदिर आदि पूजा-पाठ के स्थल अप्रिय स्थान होते थे जहां मैं बहुत अनिच्छा से जाती थी। गंदगी, घंटियों के शोर और मंत्रों के निरंतर उच्चारण के साथ कभी खत्म नहीं होने वाले धार्मिक रिवाजों से मैं बोर हो जाती थी। लेकिन यह स्थान पूरी तरह शांत था, जहां कोई पूजा नहीं हो रही थी और निस्संदेह बहुत ही साफ-सुथरा था। इस दर्शन ने मेरे पूर्वाग्रह को खत्म कर दिया और एक नया द्वार खोल दी जिसने मेरे अंदर शिव के बारे में और अधिक जानने की उत्सुकता जगा दी।

हर बार जब मैं उस स्थान में प्रवेश करके अपनी आंखें बंद करती हूं और सोचते हुए कि आगे जो होने वाला है, वह मैं जानती हूं, लेकिन मेरा अनुभव बिल्कुल अलग होता है।

मैंने पढ़ना शुरू किया। मैं जानती थी कि शिव एक हिंदू देवता हैं, जिनकी भूमिका विनाशक की रही है। मुझे पता चला कि भारत में एक समय अधिकांश मंदिर शिव के थे और बहुत बाद में जाकर दूसरे मंदिर बनने लगे।

पुराने लोग सुरक्षा या खुशहाली के लिए नहीं, बल्कि विनाश के लिए उनसे प्रार्थना करते थे! वे चाहते थे कि शिव उनके सीमित अस्तित्व को मिटा दें ताकि वे असीम और अनंत को प्राप्त कर सकें। उन्हें श्‍याम रंग  का माना गया है। श्‍याम या अंधेर का अर्थ हे एक असीम  शून्‍यता जिसमें सारी सृष्टि निहित है। उन्हें एक विरक्त तपस्वी, एक प्रेम करने वाला पति और विचित्र गणों की संगत में रहने वाला मस्‍तमौला  माना गया है। उनके उन्मत्त नृत्य से सृष्टि निकल आती है और उनके क्रोध ने कामदेव को जला कर भस्म कर दिया था। वह एक अच्छे आदमी थे या बुरे? कभी वह सभी अच्छी चीजों के अवतार नजर आते हैं, तो कभी इतने भयानक जीव कि मैं उनके आस-पास भी नहीं फटकना चाहूँ। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि उन्हें किस रूप में देखूं। उन्होंने मेरी प्रिय-अप्रिय सभी चीजों को एक साथ अपने अंदर समेट लिया था।

शिव के प्रति आकर्षण

मैं शिव की आसानी से व्याख्या नहीं कर सकती थी। मैं जितना ज्यादा पढ़ी, भ्रम और गहराता गया। वह एक व्यक्ति थे या अस्तित्व के आधार या दोनों? जानने की मेरी लालसा और तीव्र होती गई और कुछ वर्षों बाद मैंने सच का अनुभव करने के लिए जोर-शोर से अपनी आध्यात्मिक खोज शुरू कर दी। मैंने ध्यान और प्राणायाम करना शुरू किया और विभिन्न योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जहां मैंने कुछ ऐसे पल महसूस किए जहां शांति और मौन मुझ पर हावी हो जाते थे। उन पलों ने मुझे अपनी खोज के लिए और उकसाया और अब भी वह क्रम जारी है।

उस पहले दर्शन के चार वर्ष बाद मैं लौटी और इस बार हमेशा के लिए। उसने कहीं न कहीं मुझे इतने गहरे स्पर्श किया था कि बस मैं दूर नहीं रह सकती थी। शायद ही ऐसा कोई दिन बीतता है, जब मैं लिंग के पास ध्यान में समय नहीं बिताती। हर बार जब मैं उस स्थान में प्रवेश करके अपनी आंखें बंद करती हूं और सोचते हुए कि आगे जो होने वाला है, वह मैं जानती हूं, लेकिन मेरा अनुभव बिल्कुल अलग होता है। वहां होना कुछ ऐसा होता है जैसे अपने से बहुत बड़ी किसी चीज, किसी जीवित हस्ती के सामने होना जो सब कुछ अपने भीतर समेट लेता है।

मुझे नहीं लगता है कि नाम से बहुत फर्क पड़ता है, लेकिन मेरे लिए शिव कोई व्यक्ति या ईश्वर नहीं हैं, जिन्हें लोग पसंद या नापसंद कर सकते हैं। वह मानव-तर्क और व्याख्या की सीमाओं से परे हैं, समय और स्थान से परे हैं। वह एक अटल और असंदिग्ध उपस्थिति और अनुपस्थिति हैं। वह एक परम संभावना हैं, जो मैं एक दिन खुद बनने की उम्मीद करती हूं।

संपादक की टिप्पणी: इस वर्ष ईशा योग केंद्र में महाशिवरात्रि महोत्‍सव 27 फरवरी को मनाया जा रहा है। सद्‌गुरु के साथ रात भर चलने जाने वाले इस उत्सव में सद्‌गुरु के प्रवचन और शक्तिशाली ध्यान प्रक्रियाओं के साथ-साथ पंडित जसराज जैसे कलाकारों के भव्‍य संगीत कार्यक्रम भी होंगे। आस्‍था चैनल पर सीधे प्रसारण का आनंद लें शाम 6 बजे से सुबह सुबह 6 बजे तक।

शिव को पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए ईशा एक ऑनलाइन ’थंडरक्‍लैप’ अभियान शुरू कर रहा है। यदि आप लोगों का ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं और महाशिवरात्रि के बारे में जागरूकता फैलाना चाहते हैं, तो हमारे साथ शामिल हों। इसके लिए आपको सिर्फ एक ट्वीट करना होगा। (फेसबुक संदेश भी निमंत्रण का काम करते हैं!)


संबन्धित पोस्ट


Type in below box in English and press Convert