कैलाश मानसरोवर यात्रा का अनोखा अनुभव


कैलाश पर्वत को विश्व के कई धर्मों में सबसे पवित्र स्थल के रूप में जाना जाता है। पर साथ ही ये एक ऐसी जगह है जहां की यात्रा बहुत कम लोग कर पाते हैं। पढ़ें कैलाश मानसरोवर की एक यादगार यात्रा का वर्णन …

‘‘यह सब फरवरी 2016 में शुरू हुआ। जब मैंने कहा कि मैं कैलाश यात्रा पर जाना चाहता हूं, तो हर तरफ  से तरह-तरह की सलाहों की बौछर होने लगी, ‘तुम बूढ़े हो’, ‘तुम्हें डायबिटीज है’, ‘यह यात्रा बहुत महंगी होती है’, ‘इसके लिए कार्डियोलॉजिस्ट से इजाजत लेनी पड़ेगी’, वगैरह – वगैरह।

कैलाश यात्रा की प्रेरणा

सद्‌गुरु कहते हैं कि हर किसी में जूझने की क्षमता होती है। कैलाश यात्रा पर जाने के लिए मेरे भीतर किसी चीज ने मुझे चुनौती दी।

कैलाश और मानसरोवर झील ज्ञान की व्यापक और अंतहीन संभावना पेश करते हैं। हर व्यक्ति दिव्य मौजूदगी को महसूस कर सकता है और अपने मन में उस पवित्र वातावरण को आत्मसात कर सकता है।
मैं यह सब जो लिख रहा हूं, इसका मकसद आपके साथ यात्रा की उन बातों को साझा करना नहीं है कि इस यात्रा में क्या करें और क्या न करें या क्या लेकर जाएं। बल्कि इसका मकसद एक अलग तरह की प्रेरणा देना है, जो आपको इस यात्रा पर ले जाए।

ऐसे बहुत से लोग हैं, जो पूरे सम्मान के साथ खाली पैर सोफे या बिस्तर पर लेटकर कैलाश यात्रा का वीडियो, यूट्यूब पर देखते रहेंगे। मगर बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो वीडियो देखना छोडक़र यात्रा की योजना बनाने लगते हैं। दूसरे लोग कैलाश के बारे में क्या कहते हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि उस अनुभव के बाद आप किस तरह और क्या महसूस करते हैं। सद्गुरु कहते हैं कि वह इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि यात्रा के बाद कैलाश का एक अंश हमेशा आपके साथ रहे।

मैंने अपने ध्यान में कैलाश पर्वत की कल्पना करना शुरू कर दिया और जल्द ही मुझे महसूस हुआ कि सभी अवरोध अपने आप हटते चले गए। अचानक यात्रा का खर्च निकल आया, मेरे डॉक्टर ने कुछ सामान्य टेस्टों के साथ खुशी-खुशी फिटनेस सर्टिफिकेट पर साइन कर दिए और कहा कि मैं कभी भी यात्रा पर जाने के लिए फिट हूं। मैं सप्ताह में पांच दिन, तीन मील लंबा वॉक करने लगा। जैसे-जैसे यात्रा की तिथि नजदीक आने लगी, ईशा के न्यूजलेटर मुझे यात्रा की छोटी-छोटी बातों और उसकी तैयारियों के बारे में सूचित करते रहे।

कैलाश और मानसरोवर झील ज्ञान की व्यापक और अंतहीन संभावना पेश करते हैं। हर व्यक्ति दिव्य मौजूदगी को महसूस कर सकता है और अपने मन में उस पवित्र वातावरण को आत्मसात कर सकता है। इस यात्रा की तीन चीजें उल्लेखनीय हैं:

पोटाला पैलैस के दर्शन

पहला बड़ा पड़ाव तिब्बत का ल्हासा शहर है। अगर आपके पास भारत से बाहर का पासपोर्ट है, तो आपको इस जगह जाने की अनुमति है। यह सिर्फ  एक महल नहीं है। यह कई शताब्दियों से दलाई लामाओं का पवित्र स्थान रहा है।

कैलाश के सारे रास्ते में भव्य पहाड़, नदियां, झील और झरने हैं। आप यह सुनिश्चित करें कि आप बस में सो न जाएं, वरना आप इन्हें देखने से चूक जाएंगे।
महल की सीढिय़ां बहुत संकरी हैं, हर जगह ढेर सारी कलाकृतियां हैं। निश्चित रूप से यह पिकनिक स्पॉट नहीं है, मगर पूर्व भिक्षुओं और उनकी जीवन शैली का इतिहास जानने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

बहुत से श्रद्धालु मंदिर के रास्ते पर दंडवत करते चलते हैं। जिस तरह दक्षिणी भारत के हिंदू मंदिर में, लोग शरीर के बल चलते हैं। हमारे गाइड ने यह भी दिखलाया कि तिब्बती महिलाओं के एप्रन पहनने के तरीके से यह पता चलता है कि वे शादीशुदा हैं या नहीं। पोटाला पैलेस आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है, जहां संस्कृत श्लोकों का व्यापक भंडार है। कैलाश के सारे रास्ते में भव्य पहाड़, नदियां, झील और झरने हैं। आप यह सुनिश्चित करें कि आप बस में सो न जाएं, वरना आप इन्हें देखने से चूक जाएंगे।

मानसरोवर झील

यह शांत और निर्जन झील कई तरह से आपको भ्रम में डाल सकती है। बहुत से लोग ब्रह्मांडीय ऊर्जा को महसूस करते हैं और अगर आप भाग्यशाली हैं, तो आप भोर की रश्मियां देख सकते हैं। यह जगह आपको कैलाश के लिए तैयार करती है। यहां आकर लोग बात कम करने लगते हैं और प्रकृति को महसूस करना चाहते हैं। इस जगह बहुत गहरी और तरह-तरह की निजी भावनाएं उभरती हैं। आपको एहसास होता है कि आप ईमेल या फेसबुक नहीं चेक कर रहे मगर फिर भी दिन आराम से गुजरता है। आप मानसरोवर झील में पवित्र स्नान कर सकते हैं।

कैलाश तक की चढ़ाई 

दक्षिणी सिरे से पश्चिम तक की तेरह किलोमीटर की पैदल चढ़ाई कइयों के लिए व्यक्तिगत तौर पर एक चुनौती है, मगर आपको इसका फ ल भी मिलता है! अगर आप हवा में मौजूद हल्के ऑक्सीजन का लाभ उठा सकते हैं, तो इस यात्रा में बहुत खूबसूरत झरने और ढेर सारी प्राकृतिक सुंदरता है।

कैलाश यात्रा को लोग अलग-अलग नजरिये से देखते हैं। कुछ लोग आंतरिक शांति और जीवन के नए अर्थ महसूस करते हैं। कुछ को दिव्य शक्ति की मौजूदगी महसूस होती है। कई लोगों को लगता है कि प्रकृति से करीबी हमें जीवन के कई सबक सिखाती है।

संपादक की टिप्पणी:

इस वर्ष की ईशा पावन प्रवास कैलाश यात्रा 8 अगस्त से 13 सितम्बर के बीच होगी। ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएं।


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