ज्योतिष और वास्तु के चक्रव्यूह से बाहर कैसे निकलें?

ज्योतिष और वास्तु के चक्रव्यूह से बाहर कैसे निकलें

सद्‌गुरुसद्‌गुरु हमें बता रहे हैं कि ज्योतिष के भरोसे रहने के बजाए ये जरुरी है कि हम अपने शरीर, मन और जीवन ऊज्राओं पर नियंत्रण हासिल करें। इन पर नियंत्रण होने से भाग्य पूरी तरह हमारे हाथों में होगा।

ज्योतिष और वास्तु आपके भय और असुरक्षा के साथ खेलने का विज्ञान है। अपने देश में हर किसी के पास उसकी कुंडली है। इसका मतलब है कि आपको पता है कि आपके पूरे जीवन में क्या होने वाला है। क्या आपको पता है कि अगले दस मिनट में आपके जीवन में क्या होने जा रहा है? आपको नहीं पता। जिस शख्स ने आपकी कुंडली बनाई क्या उसे मालूम है कि उसके जीवन में अगले पांच मिनट में क्या होने जा रहा है? नहीं, उसे अपने जीवन के अगले पांच मिनट के बारे में नहीं पता, लेकिन आपके पूरे जीवन की जानकारी उसे है। कितनी जबर्दस्त बात है न?

इन पर भरोसा करने से आप बुद्धि का इस्तेमाल नहीं करते

एक बार इन सब चीजों पर भरोसा करते ही आप अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। यही समस्या है।

मुझे लगता है कि अब वक्त आ गया है कि आप इस ग्रह के बारे में सोचें। इस ग्रह पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन हर कोई दूसरे ग्रहों की ओर देख रहा है।
क्योंकि फिर आप यह मानने लगते हैं कि आपके हाथ में कुछ नहीं रहा, ग्रहों की दशा कुछ ऐसी हो, तभी आप किसी दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। इस तरह की बातों ने इस देश को पूरी तरह से बर्बाद करके रख दिया है। आज देश जहां है, वह इन्हीं सब वजहों से है। पूरा देश निष्क्रिय हो चुका है, क्योंकि आखिरकार नौ ग्रह ही सब कुछ हैं। हाल ही में एक नया ग्रह खोजा गया। किसी ने ज्योतिषी से पूछा, नए ग्रह के बारे में आपको क्या कहना है? उसने कहा – नहीं, नहीं वह बहुत ज्यादा दूर है, इसलिए उसका हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वाह क्या बात है! बाकी ग्रह भी बहुत ज्यादा दूर हैं। फिर हम उनके प्रभाव के बारे में कैसे जानते हैं? मुझे लगता है कि अब वक्त आ गया है कि आप इस ग्रह के बारे में सोचें। इस ग्रह पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन हर कोई दूसरे ग्रहों की ओर देख रहा है।

जीवन और भाग्य पर करें 100 फीसदी नियंत्रण

अगर आपका अपने शरीर पर अधिकार है, तो जिंदगी और भाग्य का पंद्रह से बीस फीसदी हिस्सा आपके हाथ में होगा।

अगर तीन पहलुओं पर आपका पूरा नियंत्रण हो गया तो जीवन इस हद तक आपके हाथों में होगा – कि आप उस गर्भ को भी चुन सकते हैं जिसमें आपको जन्म लेना है।
अगर आपका अपने मन पर नियंत्रण है तो जिंदगी और भाग्य का पचास से साठ फीसदी हिस्सा आपके हाथों में होगा। अगर आपका अपनी जीवन ऊर्जा पर नियंत्रण है तो शत-प्रतिशत जीवन और भाग्य आपके हाथों में होगा। फिर जीवन पर आपका नियंत्रण इस हद तक होगा कि आप जन्म और मृत्यु के पल को भी चुन सकते हैं। अगर तीन पहलुओं पर आपका पूरा नियंत्रण हो गया तो जीवन इस हद तक आपके हाथों में होगा – कि आप उस गर्भ को भी चुन सकते हैं जिसमें आपको जन्म लेना है। या तो आप खुद के ऊपर काम करके अपने शरीर, मन और ऊर्जा पर नियंत्रण हासिल करें या फिर आसमान में सितारों को देखकर अचानक कुछ अच्छा हो जाने की आस में जीवन जीते रहिए। इस दुनिया में जो लोग आसमान की ओर देख रहे हैं, वे लगातार आसमान में ही देख रहे हैं। जो लोग आगे की ओर देख रहे हैं, वे आगे बढ़ रहे हैं, क्या ऐसा नहीं है?


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