जनसंख्या पर काबू करने के लिए हमें आवाज उठानी होगी

जनसंख्या पर काबू करने के लिए हमें आवाज उठानी होगी

सद्‌गुरु1.2 अरब जनसंख्या वाले देश में अब भी बहुत से लोगों के पास मूलभूत सुविधाओं नहीं हैं। अगर देश की दशा बदलनी है तो हमें अपनी जनसंख्या के ऊपर गंभीरता से विचार करना होगा।

प्रश्न: मैं पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करता था। मुझे खिड़की वाली सीट पर बैठना पसंद था। मगर मुंबई में खिड़की की सीट पर बैठकर बाहर देखने से सुबह रेलवे ट्रैक पर शौच करते लोग दिखते हैं। झुग्गी बस्तियों में डिश एंटीना तो मौजूद हैं, लेकिन उनके पास शौचालय जैसी सुविधाएं नहीं हैं। लोगों के पास पैसा है मगर वे उसे सही चीजों में नहीं लगा रहे हैं। लोगों के अंदर जरूरी अनुशासन कैसे लाया जा सकता है?

यह अनुशासन का सवाल नहीं है

सद्‌गुरु : मुझे नहीं लगता कि यह अनुशासन का सवाल है। यह सवा अरब लोगों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने का सवाल है। मेरे ख्याल से यह अंधाधुंध जनसंख्या बढ़ाने का नतीजा है।

अगर हर सरकार और शासन व्यवस्था यह निश्चय कर ले कि अगले 50-60 सालों में इंसानी जनसंख्या को 30 से 40 फीसदी तक कम करना है, तो सभी समस्याएं हल हो सकती हैं।
इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए कोई भी सुविधा मुहैया कराना असंभव है। वह भी तब, जब वह जनसंख्या बेवजह लगातार बढ़ती ही जा रही हो।

आपको यह बात समझनी होगी कि एक देश के तौर पर भारत में इतने लोगों के लिए पर्याप्त जमीन, पानी, या प्राकृतिक दृश्य भी नहीं हैं। हालांकि उनके पास प्राकृतिक शौचालय जरुर है। सवा अरब लोगों के लिए आसमान का एक टुकड़ा तक नहीं है। दुनिया में जितनी भी समस्याएं हैं, उन सब की मुख्य वजह हमारी मौजूदा जनसंख्या है। 20वीं सदी की शुरुआत में इंसानी जनसंख्या लगभग 1.6 अरब थी। आज हमारी जनसंख्या 7.2 अरब से अधिक है। 100 सालों में हमारी संख्या चार गुना से अधिक बढ़ी है। यह गैरजिम्मेदाराना प्रजनन है। हमारी भोजन व्यवस्था, जीने की प्रक्रिया और दूसरी चीजों के बेहतर व्यवस्थित हो जाने और पहले के मुकाबले चिकित्सा के बेहतर होने का यह मतलब नहीं है कि हम अपनी जनसंख्या को मरने की हद तक बढ़ा लें। सिर्फ मरने नहीं, पूर्ण विनाश की हद तक।

आज लोग इकोलॉजिकल समस्याओं और धरती को बचाने के बारे में जागरूक हो गए हैं। इसके लिए कुछ खास करने की जरूरत नहीं है। अगर हर सरकार और शासन व्यवस्था यह निश्चय कर ले कि अगले 50-60 सालों में इंसानी जनसंख्या को 30 से 40 फीसदी तक कम करना है, तो सभी समस्याएं हल हो सकती हैं। ऐसा करना मुश्किल काम नहीं है। इसके बाद हम सब एक अच्छा जीवन बिता सकते हैं। कम से कम अगली पीढ़ी का जीवन बेहतर हो सकता है।

जनसंख्या के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी

अभी हमारे देश के सवा अरब लोगों के लिए पर्याप्त बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं हैं। आपको कहीं न कहीं नित्य कर्म करना होता है। अगर आप गांव में रहते, तो आप अपने खेतों में ऐसा कर सकते थे। यह खेत के लिए भी अच्छा है, जैविक खाद का काम करता है।

मेरे विचार से समाज के सभी जिम्मेदार लोगों को इस मुद्दे पर आगे आकर बोलना चाहिए क्योंकि अंतहीन तरीके से प्रजनन करते जाना विनाशकारी है।
लेकिन शहर में यह तरीका नहीं चल सकता। इसे घृणा से देखने की बजाय हमें जरूरी सुविधाओं के निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। लोगों को शौचालय बनाने पर खर्च करना चाहिए। इससे भी जरूरी यह है कि हमें अपनी जनसंख्या घटाने के तरीकों के बारे में सोचना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया है कि 2050 तक दुनिया की जनसंख्या 9.6 अरब हो जाएगी। इतनी जनसंख्या में अगर आपका स्टॉक मार्केट 40,000 भी पहुंच जाए, तो आपका जीवन स्तर अच्छा नहीं होगा – मैं चाहता हूँ कि आप ये बात समझें। कहा जा रहा है कि 2050 तक दुनिया के हर नागरिक के पास आज से 40 फीसदी कम संसाधन होंगे। संसाधन से मेरा अर्थ भोजन, पानी, हवा से है। मैं आपके नाती-पोतों की सेहत और खुशहाली के स्तर की कल्पना कर सकता हूं। चाहे आपके पास कितनी भी दौलत हो, खुशहाली नहीं होगी।

मेरे विचार से समाज के सभी जिम्मेदार लोगों को इस मुद्दे पर आगे आकर बोलना चाहिए क्योंकि अंतहीन तरीके से प्रजनन करते जाना विनाशकारी है। हर किसी के लिए बच्चे पैदा करना जरूरी नहीं है। क्या हम अपनी जनसंख्या को अपने संसाधनों के हिसाब से व्यवस्थित नहीं कर सकते? जरूरी जानकारी और जागरूकता मिलने पर हर इंसान यह कर सकता है।


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