ईशा लहर फरवरी 2017 : आदियोगी शिव – योग के मूलदाता


सद्‌गुरुमहाशिवरात्रि के अवसर पर ईशा लहर के फरवरी अंक में आप पढ़ सकते हैं  अदियोगी शिव के अनेक पहलूओं के बारे में, और साथ ही ईशा योग केंद्र में होने वाली प्राण प्रतिष्ठा के बारे में। पढ़ते हैं इस माह का सम्पादकीय स्तंभ…

आदियोगी शिव के मुख की प्रतिष्ठा

आज हम समय की एक ऐसी दहलीज पर खड़े हैं, जहां नकारात्मक शक्तियां सकारात्मक शक्तियों की अपेक्षा दुनिया को अधिक प्रभावित कर रही हैं।

हमें विश्व को बताना होगा कि योग के जन्मदाता आदियोगी शिव थे, जिन्होंने मुक्ति के 112 मार्ग बताए।
जीवन विरोधी तत्वों को सोशल मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में अगर हम जीवन का निर्माण व पोषण करने वाले जीवनदायी तत्वों को हर इंसान के लिए सहज उपलब्ध नहीं करा पाए, तो आने वाली पीढिय़ां इस धरती की सबसे अभागी पीढिय़ां होंगी।

महाशिवरात्रि के अवसर पर ईशा योग केंद्र में आदियोगी शिव के भव्य व विशाल मुख का अनावरण मानव की मुक्ति की दिशा में उठाया जाने वाला बेहद महत्वपूर्ण कदम होगा। मानव मात्र के लिए खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करने तथा तर्क व विज्ञान पर आधारित योगिक प्रक्रिया के द्वारा सदियों से छायी धार्मिक कट्टरता के अंधकार को मिटाने में यह कदम बहुत कारगर साबित होगा। हमें विश्व को बताना होगा कि योग के जन्मदाता आदियोगी शिव थे, जिन्होंने मुक्ति के 112 मार्ग बताए। योग को अपना कर इंसान न सिर्फ खुशी और शांति पा सकता है, बल्कि अपने जीवन, मृत्यु और भाग्य की बागडोर अपने हाथ में ले सकता है। एक साधक मित्र ने अपनी इस कविता के माध्यम से आदियोगी शिव और योग के प्रति अपने भाव उजागर किए हैं:

आदियोगी तुम योग के दाता
बद्ध प्राणी भी मुक्त हो जाता
अब देर न हो, यही है आशा
जन-जन जाने योग की भाषा।

हे योगेश्वर! छा जाओ जग में
जैसे सूरज की किरणें फैली नभ में
अब समय आनंद में लीन होने का
दरिद्र दलितों को भी कुलीन होने का।

आदियोगी अब जब यहां हैं
कुछ और हो, समय कहां है
भोग को भी योग बनाना है
दुनिया को निरोग बनाना है।

धरा कहां, गगन कहां है
आज मेरा मन कहां है
तुल सके जो इसके आगे
जग में ऐसा धन कहां है।

हर पल में प्रकट, कण-कण में छाया
सकल जगत है जिसका साया
जीवन के उस मूल सत्य को
खोज लेगें अब हम उस परम तत्व को।

रूपांतरण के परम साधन हैं
योग की ये अनगिनत विधाएं
सद्‌गुरु का सान्निध्य पाकर
आइए, जीवन को धन्य बनाएं।

ईशा योग केंद्र में महाशिवरात्रि

दक्षिण का कैलाश कहे जाने वाले वेलिंगिरि पर्वतों के बीच स्थित ईशा योग केंद्र में महाशिवरात्रि बहुत ही अनोखे ढंग से मनाई जाती है। इस बार के अंक में हमने आदियोगी शिव और महाशिवरात्रि पर योग केंद्र में हो रहे आयोजनों से आपको अवगत कराया है। यह महाशिवरात्रि की रात बेहद अद्भुत और अद्वितीय रात होने वाली है, जो इंसान के जीवन में बार बार नहीं आती। कलर्स और आस्था टीवी चैनलों के माध्यम से 24 फरवरी की रात को आप महाशिवरात्रि का भरपूर आनंद उठा पाएंगे। हम इस कामना के साथ आपको यह अंक सौंपते हैं कि महाशिवरात्रि की यह आगामी रात आपके जीवन से अंधियारे को मिटा, उसे ज्ञान और अनुभूति के प्रकाश से सराबोर कर दे! शुभ महाशिवरात्रि!

– डॉ सरस

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