इनर इंजीनियरिंग पुस्‍तक का विमोचन लंदन में


सद्‌गुरुपिछले दिनों सद्‌गुरु की बेस्ट सेलर किताब का विमोचन लंदन में हुआ। इस किताब का सभी को काफी लम्बे समय से इंतज़ार था। इस समारोह में सद्‌गुरु के योगदान को सम्मानित भी किया गया।

16 नवबंरः 13 नंवबर की शाम को सद्‌गुरु ने लंदन में ‘इनर इंजीनयिरिंग: ए योगी’ज गाइड टु जाॅय’ नामक अपनी नई पुस्तक का लोकापर्ण किया। यह पुस्तक लंदन के एक्सेल हाॅल में 3600 लोगों से खचाखच भरे एक हाॅल में लोकार्पित की गई।

योगिक संस्कृति अज्ञानता का महत्व देती है और अगर कोई खुद को अज्ञानी के तौर पर पहचानता है तो वह स्वाभाविक तौर पर जिज्ञासु होगा, क्योंकि वह जानना चाहेगा।
हालाँकि यह पुस्तक उत्तरी अमेरिका में पाठकों के बीच पहले ही काफी लोकप्रिय हो कर न्यूयार्क टाइम्स की कई श्रेणियों में ‘बेस्ट सेलर’ यानी सर्वाधिक बिकने वाली किताबों की सूची में पहुँच चुकी है।

पश्चिमी पाठकों के लिए अपनी पहली किताब को लाॅन्च करने के लिए सद्‌गुरु ने पिछले ही महीने उत्तरी अमेरिका के 17 शहरों को दौरा पूरा किया। हर शहर में उत्साही दर्शकों और पूरी तरह से भरे कार्यक्रम स्थलों ने उनका ने उनका स्वागत किया। तीन हफ्ते के दौरे में लगभग 26,000 लोगों ने उनकी चर्चा व भाषण का आनंद लिया।

20 सालों से पुस्तक लाने की इच्छा थी मन में

अपनी किताब के बारे में बताते हुए सद्‌गुरु ने कहा कि पिछले बीस सालों से इस किताब को लाने की इच्छा उनके मन में थी। वह कहते हैं, ‘इस पुस्तक के जरिए मेरा लक्ष्य है कि खुशी को आपका स्थायी साथी बनाने में मैं आपकी मदद करूं।

उन्होंने सीमित मानव मेधा के बारे में भी बात की और यह भी बताया कि कैसे इंसान कभी बुद्धि या समझदारी से हर चीज नहीं ग्रहण सकता।
इसे साकार करने के लिए यह किताब आपको प्रवचन नहीं देती बल्कि एक विज्ञान देती है, आपको शिक्षा नहीं देती बल्कि एक तकनीक देती है, आपको नीति या उपदेश नहीं देती बल्कि एक रास्ता बताती है। हमारी बाकी सारी किताबें प्रेरक हैं, जबकि यह पुस्तक रूपांतरण करने वाली है।’ इनर इंजीनियरिंग अपने पाठक के लिए एक परिकृष्त गाइड है, जो उसे खुद को आत्म सशक्त बनाने और अपने अंदर योग पर आधारित भीतरी स्थायित्व का एक ढांचा तैयार करने में मदद करती है।

ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन में संबोधन

ईशा योग के संस्थापक सद्‌गुरु ने 15 नवंबर को विश्व की सबसे प्रतिष्ठित वाद-विवाद करने वाली संस्थाओं में से एक आॅक्सफोर्ड यूनियन में अपना भाषण दिया, जहां उन्होंने आॅक्सफोर्ड के विद्यार्थियों, विद्वानों और पूर्व छात्रों को संबोधित किया।

अपनी किताब के बारे में बताते हुए सद्‌गुरु ने कहा कि पिछले बीस सालों से इस किताब को लाने की इच्छा उनके मन में थी।
अपनी चर्चा में सद्‌गुरु ने आत्म कल्याण की प्राचीन तकनीक से जुड़े विज्ञान और मौजूदा समय में उसकी उपयोगिता, सामायिकता व महत्व के बारे में बात की। उन्होंने विकास की प्रक्रिया में मानव मस्तिष्क और मेधा के खिलने और निखरने पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने बताया कि कैसे मनुष्य अपनी इस क्षमता को संभाल नहीं पा रहा, फलस्वरूप इसकी वजह से परेशान हो रहा है। उन्होंने सीमित मानव मेधा के बारे में भी बात की और यह भी बताया कि कैसे इंसान कभी बुद्धि या समझदारी से हर चीज नहीं ग्रहण सकता।

यौगिक संस्कृती अज्ञान को महत्व देती है

सद्‌गुरु ने बताया कि क्यों ज्ञान सीमित है, और अज्ञानता असीमित। उनका कहना था, ‘योगिक संस्कृति अज्ञानता का महत्व देती है और अगर कोई खुद को अज्ञानी के तौर पर पहचानता है तो वह स्वाभाविक तौर पर जिज्ञासु होगा, क्योंकि वह जानना चाहेगा। जबकि खुद के द्वारा ज्ञानी के तौर पहचाना जाने वाला इंसान क्रूर या अत्याचारी हो उठता है।’

16 नवंबर को लंदन के लाॅर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड में इंडो यूरोपियन बिजनेस द्वारा आयोजित ग्लोबल बिजनेस मीट में सद्‌गुरु को मानवता के प्रति अमूल्य योगदान के तौर पर दुनियाभर में लाखों लोगों तक योग विज्ञान को पहंचाने के लिए ‘इंडो यूरोपियन बिजनेस फोरम एक्सिलेंस अवाॅर्ड’ से सम्मानित किया गया। समारोह में प्रमुख अतिथि हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री राम बिलास शर्मा थे।


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