साउंड्स ऑफ़ ईशा का हिंदी एल्बम : चंद्रजीवन

आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले हर भाव, हर विचार और मनुष्य के अनुभव के हर आयाम को गहराई से अनुभव करते हैं। गुरु के प्रति प्रेम, विरह की पीड़ा, गुरु के सान्निध्य का उत्सव, और यहां तक कि असमंजस भी मधुर लगने लगता है। साधक की इन्हीं भावों को ध्वनी और शब्दों के माध्यम से व्यक्त करने का एक प्रयास है “चंद्रजीवन”।

 

इस संगीत को अपने भीतर गूंजने दें और इसकी मिठास जानें।

 

यह एल्बम अलग-अलग अवसरों के लिए रचे गए 7 गीतों का एक संकलन है। यह साउंड्स ऑफ़ ईशा का पहला हिंदी सेट है। इसे आप कोई भी राशी डोनेट कर के डाउनलोड कर सकते हैं।

 

 

 

आए हैं सांवरे, चंद्रजीवन एल्बम का एक ट्रैक है। इस गीत को, 6 महीने के अंतराल के बाद सद्‌गुरु का आश्रम लौटने पर स्वागत करने के लिए, रचा गया था।
आए हैं सांवरे
आए हैं सांवरे, ओ मोरे गांव रे
मिली इक ठांव रे, न जाओ सांवरे
आसमां फूल बरसाओ, हवाओं इत्र फैलाओ
अपनी पलकें बिछा करके, धरा तुम मंगल तो गाओ
पखारूं चरण कमलों को, मैं अपने भीगे नैनों से
चरणामृत पान करके, धरा तुम धन्य हो जाओ
निशा तुम कोमल हस्तों से, इन्हें काजल लगा देना,
शशी इन भव्य भालों पे चन्दन तिलक सजा देना
मुखड़ा यह तेजोमंडित है रवि तू ना शर्माना
इन से जान लेना तू नभ में अपना ठिकाना

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