शहद के फायदे और 12 स्वास्थ्य लाभ

शहद के 12 फायदे और स्वास्थ्य लाभ
शहद के 12 फायदे और स्वास्थ्य लाभ

Sadhguruशहद को भारत में ही नहीं दूसरी सभ्यताओं में भी बहुते पुराने समय से इस्तेमाल किया जा रहा है। आज तो मेडिकल साइंस भी इसके गूणों पर शोध कर रही है और इसके गुणों को स्वीकर करने लगी है। तो क्या-क्या गुण हैं इसमें?

शहद या मधु हमेशा से रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ रहा है, साथ ही सदियों से एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में भी उसका इस्तेमाल होता है। दुनिया भर में हमारे पूर्वज शहद के कई लाभों से अच्छी तरह परिचित थे। एक औषधि के रूप में उसका इस्तेमाल सबसे पहले सुमेरी मिट्टी के टेबलेटों में पाया गया है जो करीब 4000 साल पुराने हैं। लगभग 30 फीसदी सुमेरी चिकित्सा में शहद का इस्तेमाल होता था। भारत में शहद सिद्ध और आयुर्वेद चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण अंग है जो चिकित्सा की पारंपरिक पद्धतियां हैं। प्राचीन मिस्र में इसे त्वचा और आंखों की बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता था और जख्मों तथा जलने के दागों पर प्राकृतिक बैंडेज के रूप में लगाया जाता था।

आजकल चिकित्सा समुदाय में शहद पर काफी वैज्ञानिक शोध चल रहा है जो हमारे पूर्वजों द्वारा सोचे गए शहद के तमाम प्रयोगों की जांच कर के उन्हें पुष्ट कर रहा है। इनमें से कुछ पर नजर डालते हैं:

शहद के स्वास्थ्य लाभ

  1. शहद आपके खून के लिए अच्छा है

शहद शरीर पर अलग-अलग तरह से असर डालता है, जो इस पर निर्भर करता है कि आप उसका सेवन कैसे करते हैं। अगर शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पिया जाए तो उसका खून में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की संख्या पर लाभदायक असर पड़ता है। लाल रक्त कोशिकाएं मुख्य रूप से शरीर के विभिन्न अंगों तक खून में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। शहद और गुनगुने पानी का मिश्रण खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है, जिससे एनीमिया या खून की कमी की स्थिति में लाभ होता है। आयरन की कमी यानी एनीमिया की स्थिति तब आती है जब आहार में लौह तत्व को कम मात्रा में ग्रहण किया जाता है या शरीर उसे पर्याप्त रूप से सोख नहीं पाता। इससे रक्त की ऑक्सीजन ढोने की क्षमता प्रभावित होती है। ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम होने से थकान, सांस फूलना और कई बार उदासी और दूसरी समस्याएं होती हैं। शहद रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को बढ़ाते हुए इन समस्याओं को कम कर सकता है।

खून में ऑक्सीजन का होना बेहद जरूरी होता है। आपका शरीर कितना स्वस्थ है या बीमारी के बाद कितनी जल्दी खुद को ठीक कर पाता है, यह आपके खून में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा पर निर्भर करता है। खासकर महिलाओं को इस मामले में खास ख्याल रखने की जरूरत होती हैं, क्योंकि उन्हें हर महीने मासिकचक्र से गुजरना पड़ता है। चूंकि हर महीने उनके शरीर से एक खास मात्रा में खून बाहर निकल जाता है, इसलिए एनेमिया की संभावना उनमें पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा पाई जाती है। अगर मस्तिष्क को उचित मात्रा में खून नहीं मिलेगा तो शरीर और दिमाग को जैसा काम करना चाहिए, वे वैसे नहीं कर पाएंगे।

  1. शहद : रक्तचाप में फायदेमंद

शहद का नियमित सेवन सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है। अगर आपको निम्न रक्तचाप की शिकायत है और अगर आप नीचे बैठे-बैठे अचानक उठने की कोशिश करते हैं तो आपको चक्कर आ जाते हैं। निम्न रक्तचाप का मतलब दिमाग में ऑक्सीजन का कम मात्रा में पहुंचना है। इसी तरह से अगर आप अपना सिर नीचे करते हैं और आपको चक्कर आते हैं तो इसका मतलब है कि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है। या तो उच्च रक्तचाप की वजह से या फिर ऑक्सीजन की कमी की वजह से आपको चक्कर आते हैं।

शहद का सेवन हमारे शरीर के इन असंतुलनों को दूर करता है। शरीर में रक्त का दबाव शरीर की जरूरतों पर निर्भर करता है। लोगों को लगता है कि उच्च रक्तचाप एक बीमारी है, लेकिन सच्चाई यह नहीं है। दरअसल, शरीर अपनी जरूरतों के हिसाब से खून का दबाव तय करता है। अगर किसी कारण वश शरीर को सामान्य रूप से ज्यादा ऑक्सीजन या पोषक तत्वों की जरूरत होती है या फिर खून की गुणवत्ता वैसी नहीं होती, जैसी होनी चाहिए तो शरीर का खून पंप करने वाला पंपिंग सिस्टम ज्यादा खून पंप करना शुरू कर देता है। इसके लिए अंगों में शीघ्र और तेज प्रवाह के लिए दिल तेजी से खून को पंप करता है, जिससे खून का दबाव बढ़ता है।

निम्न रक्तचाप के पीछे भी वजह होती है, जैसे शरीर को ही निम्न दबाव की जरूरत हो सकती है या फिर जन्मजात वजहों से ही दिल इतना मजबूत नहीं होता कि वह शरीर की जरूरत के मुताबिक ज्यादा खून पंप कर पाए। ये भी हो सकता है कि शरीर के परिसंचरण तंत्र यानी सर्कुलेटरी सिस्टम में कोई दिक्कत हो अथवा खून की रासायनिक संरचना के चलते ऐसा हो रहा हो। अकसर एक साथ कई वजहों के चलते ऐसा होता है। ठीक इसी तरह उच्च रक्तचाप के कई परिणाम सामने आते हैं, लेकिन शुरु में तो उच्च रक्तचाप खुद ही एक परिणाम है- यह एक परिणाम है, कारण नहीं है।

योग का नियमित अभ्यास करने वाले व शरीर को खास तरह की प्रक्रिया में ढालने वाले लोगों के लिए अपने सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। शहद का नियमित सेवन इस संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको अपेक्षा कृत ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है।

  1.  कीमोथैरेपी में असरदायक

इसके भी कुछ प्रारंभिक प्रमाण हैं कि शहद कीमोथैरेपी के मरीजों में श्वेत रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की संख्या को कम होने से रोक सकता है। एक छोटे प्रयोग में कीमोथैरेपी के दौरान कम डब्ल्यूबीसी संख्या के जोखिम वाले 40 फीसदी मरीजों में उपचार के तौर पर दो चम्मच शहद पीने के बाद वह समस्या फिर से नहीं उभरी।

  1. शहद चीनी से कम नुकसानदायक है

शरीर पर सफेद चीनी के हानिकारक प्रभावों के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। शहद उसका एक बढ़िया विकल्प है जो उतना ही मीठा है मगर उसका सेवन अहानिकर है। हालांकि शहद के रासायनिक तत्वों में भी सिंपल शुगर होती है मगर वह सफेद चीनी से काफी भिन्न होती है। उसमें करीब 30 फीसदी ग्लूकोज और 40 फीसदी फ्रक्टोज होता है यानि दो मोनोसेकाराइड या सिंपल शुगर और 20 फीसदी दूसरे कांप्लेक्स शुगर होते हैं। शहद में एक स्टार्ची फाइबर डे‍क्सट्रिन भी होता है। यह मिश्रण शरीर में रक्त शर्करा का स्तर संतुलित रखता है।

 

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  1. शहद योगाभ्यासियों के लिए अच्छा है 

योग अभ्यासों को करने वाले लोगों के लिए शहद का सेवन रक्त के रसायन में संतुलन लाता है, इसलिए उन्हें खास तौर पर इसका सेवन करना चाहिए। शहद का नियमित सेवन शरीर को अधिक जीवंत बनाता है। सुबह अभ्यास शुरू करने से पहले गुनगुने पानी में थोड़ा सा शहद मिलाकर लेने पर शरीर सक्रिय हो जाता है।

  1. शहद एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक है

शहद का सेवन लाभदायक एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की संख्या को बढ़ाता है, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है और हानिकारक सूक्ष्मजीवों से लड़ता है। कई अध्ययनों में जख्मों की चिकित्सा में भी शहद के इस्तेमाल पर विचार किया गया है। एक अध्ययन में एक उपचारात्मक शहद का इस्तेमाल किया गया जो एक खास शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजरा था। इस अध्ययन में भाग लेने वाले सभी लोगों के जख्मों से सारा बैक्टीरिया नष्ट हो गया। एक और अध्ययन में असंसाधित (अनप्रोसेस्ड) शहद के इस्तेमाल से 59 मरीजों के जख्म और पैर के अल्सर ठीक हो गए। इन मरीजों में से 80 फीसदी पर पारंपरिक उपचार का कोई असर नहीं हुआ था। एक मरीज को छोड़कर बाकी सभी के जख्मों में सुधार हुआ। साथ ही शहद लगाने के एक सप्ताह के भीतर संक्रमित जख्म जीवाणुरहित हो गए। पारंपरिक चिकित्सा में, शहद के एक लाभ में श्वास संबंधी संक्रमणों का उपचार शामिल है।

क्लीनिकल रिसर्च से यह भी पता चला है कि मेडिकल ग्रेड शहद भोजन से पैदा होने वाले जीवाणुओं जैसे इशटीशिया कोली और सेलमोनेला को नष्ट कर सकता है। शहद उन बैक्टीरिया से लड़ने में भी प्रभावकारी साबित हुआ है, जिन पर एंटीबायोटिक्स का असर नहीं होता। शहद कई स्तरों पर संक्रमण से लड़ता है जिससे वह जीवाणुओं के लिए प्रतिरोधी क्षमता विकसित करना मुश्किल बना देता है। इसके विपरीत एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया पर उस समय हमला करते हैं, जब वे विकसित हो रहे होते हैं इससे वे उसे प्रतिरोधी क्षमता विकसित करने का मौका देते हैं। 

  1. शहद दिल की देखभाल में फायदेमंद

एक अनार का ताजा रस लेकर उसमें एक बड़ा चम्मच शहद मिलाएं। रोजाना सुबह खाली पेट लें।

खजूर में सुई चुभाते हुए उसमें छेद करें। उसे शहद में डुबा दें और दिन में दो बार 2-4 खजूर खाएं।

  1. सर्दी जुकाम के लिए शहद के उपचार

अगर आप सर्दी-जुकाम से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं या आपको हर सुबह बंद नाक से जूझना पड़ता है, तो नीम, काली मिर्च, शहद और हल्दी का सेवन काफी फायदेमंद हो सकता है। यहां कुछ सरल उपचार दिए गए हैं:

विकल्प 1:

काली मिर्च के 10 से 12 दानों को दरदरा कूट लें और उन्हें दो छोटे चम्मच शहद में रात भर भिगो कर रखें। सुबह खूब अच्छी तरह चबाते हुए काली मिर्च के दाने खा लें। आप शहद में थोड़ा हल्दी भी मिला सकते हैं।

विकल्प 2:

नीम के पत्तों का पेस्ट बना लें और उस पेस्ट से एक कंचे के आकार की गोली बनाएं। उस गोली को शहद में डुबाकर हर सुबह खाली पेट निगल लें। अगले 60 मिनट तक कुछ न खाएं ताकि नीम आपके शरीर में फैल जाए। इससे दूसरी तरह की एलर्जी जैसे त्वचा या किसी खाद्य पदार्थ से होने वाली एलर्जी में भी लाभ मिलता है। नीम में बहुत से औषधीय गुण हैं और यह आदत बहुत ही लाभदायक है। अगर आपको नीम के सामान्य पत्ते ज्यादा कड़वे लगते हैं, तो नीम के कोमल पत्तों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

  1. शहद एक बलवर्धक खाद्य पदार्थ (एनर्जी फूड) है

पारंपरिक औषधि में शहद का एक महत्वपूर्ण प्रयोग एक त्वरित बलवर्धक के रूप में किया जाता है। जैसा कि पहले भी जिक्र किया गया है, शहद में अलग-अलग तरह के शुगर कण होते हैं, खासकर ग्लूकोज और फ्रक्टोज। हालांकि सफेद चीनी, जिसमें फ्रक्टोज और ग्लूकोज एक साथ सुक्रोज के रूप में होते हैं, इसके विपरीत शहद में ये दोनों शर्कराएं अलग होती हैं। इसलिए शहद तत्काल शक्ति देता है।

संयुक्त राष्ट्र राष्ट्रीय शहद बोर्ड शहद के सेवन का सुझाव देता है क्योंकि इसमें कम मात्रा में बहुत से विटामिन और मिनरल होते हैं। इनमें कैल्शियम, कॉपर, आयरन, मैगनीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम और जिंक शामिल हैं।

  1. शहद पाचन में मदद करता है

शहद कब्ज, पेट फूलने और गैस में लाभकारी होता है क्योंकि यह एक हल्का लैक्सेटिव है। शहद में प्रोबायोटिक या सहायक बैक्टीरिया भी प्रचुर मात्रा में होते हैं जो पाचन में मदद करते हैं, प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाते हैं और एलर्जी को कम करते हैं। टेबल शुगर की जगह शहद का इस्तेमाल आंतों में फंगस से पैदा हुए माइकोटॉक्सिन के विषैले प्रभावों को कम करता है।

  1. शहद त्वचा और सिर की खाल के संक्रमणों से लड़ता है।

त्वचा और सिर की खाल के लिए भी शहद बहुत फायदेमंद होता है। 30 मरीजों पर किए गए एक छोटे स्तर के अध्ययन, जिसमें सेबोरिक डर्माटाइटिस और रूसी के उपचार पर शहद के प्रभावों की जांच की गई थी, इसमें प्रतिभागियों ने हर दूसरे दिन 2-3 मिनट तक अपने समस्याग्रस्त क्षेत्रों पर पतले अपरिष्कृत(अनप्रोसेस्ड) शहद से हल्की मालिश की। शहद को तीन घंटे तक छोड़ दिया गया, फिर गुनगुने पानी से धो दिया गया। सभी मरीजों को इस उपचार से लाभ दिखा। एक सप्ताह के भीतर खारिश में राहत मिली और स्केलिंग गायब हो गई, दो सप्ताह में जख्म गायब हो गए। मरीजों के बाल गिरने की समस्या में भी सुधार आया। इसके अलावा जिन मरीजों ने सप्ताह में एक बार शहद लगाते हुए छह माह तक उपचार जारी रखा, उन्हें यह समस्या दोबारा नहीं हुई।

 

शहद के 12 फायदे और स्वास्थ्य लाभ

 

  1. शहद बच्चों को गहरी नींद सोने में मदद करता है

कई अध्ययनों के शुरुआती नतीजे दर्शाते हैं कि शहद से बच्चों की नींद गहरी हो सकती है। माता-पिता की राय पर आधारित इस अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि शहद से रात के समय बच्चों में खांसी कम हुई और उन्हें अधिक गहरी नींद सोने में मदद मिली।

ध्यान में रखने लायक बातें

  • जो शहद गहरे रंग का होता है, उसमें ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होते हैं।
  • शहद खराब नहीं होता और उसे ठीक से बंद करके रखने पर लंबे समय तक रखा जा सकता है।
  • पुरातत्वविज्ञानियों को मिस्र के प्राचीन शहर थेब्स में फेरों की कब्रों में और तूतनखामन की कब्र में शहद के सीलबंद जार मिले हैं। यह पता नहीं चला है कि पुरातत्वविज्ञानियों ने उस शहद का क्या किया!
  • एक साल से कम उम्र के शिशुओं को शहद नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि उसमें बोटुलिज्म बैक्टीरिया के जीवाणु हो सकते हैं जिसकी वजह से शिशु बीमार हो सकता है। ये जीवाणु धूल और मिट्टी में पाए जाते हैं, जो शहद में जा सकते हैं। शिशु का शरीर इस तरह के संक्रमण से अपना बचाव करने के लिए तैयार नहीं होता है।
  • एक और ध्यान रखने लायक बात यह है कि मधुमेह के मामले में शहद सफेद चीनी से बहुत अलग नहीं है। दोनों ही रक्त शर्करा का स्तर बढ़ाते हैं और मधुमेह के रोगियों को दोनों में उतना ही ध्यान रखना चाहिए।

आयुर्वेद और सिद्ध में शहद का इस्तेमाल

शायद किसी ने शहद के लाभों को इतनी गहराई में नहीं खोजा है, जितना कि भारतीयों ने। शहद मानवजाति के लिए प्रकृति का उपहार माना गया और उसे हर रसोईघर का एक अनिवार्य अंग समझा गया। 12 महीने से ज्यादा उम्र के किसी भी व्यक्ति के लिए उसे आहार का एक अहम हिस्सा माना गया। शहद को एक सुपाच्य खाद्य पदार्थ माना जाता था जिसे इंसान आसानी से पचा सकते हैं। आयुर्वेद और सिद्ध दोनों पद्धतियों में शहद का एक इस्तेमाल औषधियों के एक वाहक के रूप में किया गया। शहद के साथ मिलाने पर औषधि आसानी से और तेजी से शरीर में समा जाती है और रक्त प्रवाह के द्वारा पूरे शरीर में फैल जाती है। कहा जाता है कि शहद किसी औषधि की क्षमता को भी बरकरार रखती है और उसके असर को लंबा करती है।

सिद्ध ग्रंथों में ऊष्णता संबंधी समस्याओं, अत्यधिक कफ, उल्टी, गैस समस्याओं और रक्त में अशुद्धियों के उपचार के अंग के रूप में शहद को लेने का सुझाव दिया गया है। सिद्ध ग्रंथों में सात अलग-अलग तरह के शहद की पहचान की गई है, जिसमें घने पहाड़ी वनों, जिन्हें मलयतन या पहाड़ी शहद कहा जाता है, से एकत्रित शहद को सबसे ज्यादा औषधीय महत्व का माना जाता है। इस शहद में कई औषधीय पौधों के गुण होते हैं, जिनसे मधुमक्खियां रस या पराग लेती हैं।

शहद के प्रयोग और पारंपरिक उपचार

शहद जल

  • एक गिलास सामान्य तापमान वाले जल में 1 से 3 छोटे चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार लेने पर ऊतकों को पोषण मिलता है और नर्वस सिस्टम की कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।
  • एक गिलास गुनगुने पानी में दो-तीन छोटे चम्मच शहद मिलाकर लेने से तत्काल शक्ति मिलती है और वजन कम करने में मदद मिलती है।

शहद के शरीर पर प्रयोग

  • खरोंचों पर शहद मलने से घाव तेजी से ठीक होता है और निशान हल्के पड़ते हैं।
  • दिन में दो बार 20-20 मिनट के लिए, चेहरे पर शहद और ताजे नींबू के रस को बराबर भाग में मिलाकर लगाएं। इससे चेहरे के काले धब्बे मिट जाते हैं।

 

शहद के कुछ स्वादिष्ट पेय

शहद का इस्तेमाल आप अपने दैनिक जीवन में कई तरीकों से के कर सकते हैं। उन्हीं मे से एक है – पेय के रूप में। आइए आपको बताते हैं शहद के कुछ पेय की रेसीपि

पेय 1

अदरक को कूटकर उसका रस निचोड़ लें। रस को 15 मिनट के लिए एक शीशे के बर्तन में रखें। नीचे जम गए पदार्थ को छोड़ दें और साफ रस को 5-6 दिनों के लिए रेफ्रिजरेटर में रखें।

इस अदरक के रस के दो छोटे चम्मच, दो छोटे चम्मच शहद के साथ मिलाकर हर दिन खाली पेट लें। इससे रक्त शुद्ध होता है। इसे 6 महीने में एक बार 48 दिनों तक लिया जा सकता है।

पेय 2

ताजा अदरक धोकर छील लें। अदरक को छोटे टुकड़ों में काट लें, उसे एक चौड़े मुंह वाले शीशे की बोतल में शहद में डुबा कर रख दें। बोतल के मुंह को एक पतले, सफेद, सूती कपड़े से ढक दें और 12 दिनों तक धूप में रखें। सुबह-शाम 2-4 टुकड़े खाएं, इससे अपच या बदहजमी की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

पेय 3

तीन चौथाई कप पानी में चार छोटे चम्मच अदरक का रस, चार छोटे चम्मच शहद और दो छोटे चम्मच नींबू का रस मिला कर पिएं। इससे जल्दी सर्दी-जुकाम नहीं होता।

पेय 4

तरबूज-अदरक-पुदीना का ठंडा पेय

यहां शहद और तरबूज के साथ एक ठंडे पेय का नुस्खा दिया गया है, जो गरमियों के दौरान बहुत बड़ा वरदान हो सकता है।

सामग्री:

तरबूज : एक चौथाई

अदरक : एक इंच का टुकड़ा

पुदीना : ¼ कप ताजी पत्तियां

नमक : स्वादानुसार

काली मिर्च पाउडर:  स्वादानुसार

शहद : 3 बड़े चम्मच

विधि:

तरबूज को छील कर उसके बीज निकाल लें और मोटा-मोटा काट लें। उसके टुकड़ों को एक ब्लेंडर में मिलाएं। अदरक को छील कर कूट लें और बर्तन में मिलाएं। पुदीने की पत्तियां, नमक, काली मिर्च पाउडर और शहद मिलाएं।

सभी को एक साथ पीस लें जब तक कि महीन पेस्ट न बन जाए। इसे एक छलनी से छान लें।

इस रस को गिलास में डालकर परोसें।

 

शहद और मधुमक्खियों के बारे में कुछ रोचक जानकारियां:

मधुमक्खियों की लगभग 25000 प्रजातियां होती हैं, जिनमें से कई पर दुर्भाग्यवश खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है।

सुपरमार्केट में करीब 80 फीसदी खाद्य पदार्थ मधुमक्खियों के परागण का नतीजा हैं।

इंसानों द्वारा शहद इकट्ठा करने का पहला प्रमाण 6000 ईसापूर्व में मिलता है। वलेसिना, स्पेन में मकड़ी गुफा के एक गुफा चित्र में इसे दर्शाया गया है।

500 ग्राम शहद बनाने के लिए मधुमक्खियों को पराग की खोज में 1 करोड़ बार भटकना पड़ता है जो दुनिया के 1.5 पूरे चक्कर के बराबर है।

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शहद एक ऐसा पदार्थ है, जिसकी रासायनिक संरचना काफी कुछ इंसान के रक्त से मिलती जुलती है।

शरीर पर शहद का प्रभाव काफी कुछ इसके इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करता है। यानी अगर आप सीधे शहद खाते हैं तो उसका प्रभाव अलग होगा, गर्म पानी या ठंडे पानी के साथ लेते हैं तो वह अलग तरह से असर करेगा।

योग में हम चाहते हैं कि आप इसे गुनगुने पानी के साथ लें, क्योंकि गुनगुने पानी के साथ यह हमारे सिस्टम को खोलता है।

एक चीज ध्यान रखें कि शहद को कभी भी उबलते पानी में न डालें और न ही इसे कभी पकाएं, क्योंकि एक खास तापमान पर पहुंचने के बाद शहद का कुछ हिस्सा जहरीला हो जाता है। इसलिए जिस पानी में आप शहद डालते हैं, वह उबलता हुआ न होकर गुनगुना होना चाहिए।

 


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