पूस का महीना : खुद को तराशने का समय

hatayogaschool

तमिल पंचांग के अनुसार  मार्गली(मार्गशीर्ष) महीना शरीर में एक कुदरती स्थिरता लाता है। बहुत से आध्यात्मिक जिज्ञासु हमेशा आगे-पीछे करते रहते हैं। यही समय है संतुलन और स्थिरता लाने का।

यह साल का ऐसा समय है, जिसे आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मार्गली का तमिल महीना 16 दिसंबर को शुरू होता है। साल के इस समय के दौरान, पृथ्वी सूर्य के सबसे नजदीक होती है। उत्तरी गोलार्ध में इसे सबसे गर्म महीना होना चाहिए, मगर यह सबसे ठंडा महीना होता है, क्योंकी पृथ्वी का उत्तरी भाग सूर्य के दूसरी तरफ  होता है।

योग प्रणाली में, किसी भी मानसिक असंतुलन को हमेशा जल तत्व के बेकाबू होने के रूप में देखा जाता है।
सूर्य के साथ पृथ्वी ऐसा कोण बनाती है कि सूर्य की किरनें धरती पर आते ही बिखर जाती हैं। इसलिए वे धरती को गर्म नहीं कर पातीं। मगर धरती पर सूर्य का जो गुरुत्वाकर्षण काम कर रहा है, वह इस समय अधिकतम होता है। 3 जनवरी के दिन पृथ्वी सूर्य के सबसे करीब होती है, इसलिए सूर्य के गुरुत्वाकर्षण का अधिकतम खिंचाव इस समय होता है। मार्गली महीने का मानव शरीर पर यही असर होता है – यह आपको आधार की तरफ  खींचता है।

मार्गली का महीना सिस्टम में संतुलन और स्थिरता लाने का समय है। योग प्रणाली में इस से जुड़े अभ्यास हैं, जिन्हें कई अलग-अलग रूपों में संस्कृति में शामिल किया गया है। यह ऐसा समय है, जब पुरुष वह काम करते हैं, जो आम तौर पर स्त्रियों को करना होता है, और स्त्रियां पुरुषोचित काम करती हैं। तमिलनाडु में, पुरुष नगरसंकीर्तन में जाते हैं, वे गाते हैं और भक्ति करते हैं, जिसे काफी हद तक स्त्री सुलभ या स्त्रैण काम माना जाता है। ज्यामिति और पौरुष सीधे-सीधे एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। स्त्रैण गुण हमेशा किसी वस्तु के रंग और बाहरी रूप को सबसे ज्यादा महत्व देता है। पौरुष गुण हमेशा ज्यामितिक आधार को सबसे पहले देखता है। तो इस महीने, स्त्रियां ज्यामिति का अभ्यास करती हैं – कागज पर नहीं, अपने घरों के बाहर, जहां वे ज्यामितीय आकृतियां या कोलम बनाती हैं।

सामान्य तौर पर नीचे की ओर खिंचाव के कारण, मूलाधार चक्र प्रधान हो जाता है और इस तरह जीवन की रक्षक प्रकृति प्रधान हो जाती है। इस समय उत्तरी गोलार्ध में सारा जीवन अपने न्यूनतम रूप में होता है। अगर आप कोई बीज बोते हैं, तो इस समय उसका विकास सबसे धीमा होगा और उसका अच्छे से अंकुरण नहीं होगा।

यह ऐसा समय है, जब पुरुष वह काम करते हैं, जो आम तौर पर स्त्रियों को करना होता है, और स्त्रियां पुरुषोचित काम करती हैं। तमिलनाडु में, पुरुष नगरसंकीर्तन में जाते हैं, वे गाते हैं और भक्ति करते हैं, जिसे काफी हद तक स्त्री सुलभ या स्त्रैण काम माना जाता है।
चूँकि जीवन शक्ति में एक खास निष्क्रियता के कारण विकास बाधित होता है, इसलिए इस समय शरीर अपना खोया बल प्राप्त कर सकता है और खुद को सुरक्षित कर सकता है। इसे देखते हुए, अब भी तमिलनाडु में मार्गली के दौरान कोई शादी नहीं होती। यह गर्भधारण के लिए सही समय नहीं होता। यहां तक कि गृहस्थ भी इस समय ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं।

यह मानसिक असंतुलनों से जूझ रहे लोगों के लिए खास तौर पर अच्छा समय होता है क्योंकि सूर्य की ऊर्जा नीचे की ओर खिंचती है और वे खुद को स्थिर कर सकते हैं। योग प्रणाली में, किसी भी मानसिक असंतुलन को हमेशा जल तत्व के बेकाबू होने के रूप में देखा जाता है। अगर आपके पास पानी से भरी टंकी है, और आप उसे हिलाएं, तो वह गंदला हो जाएगा। जल तत्व किसी व्यक्ति में बहुत तरह के असंतुलन पैदा कर देता है, अगर उसे ठीक करने के लिए सही चीजें न की जाएं। पारंपरिक रूप से इस महीने जल के संपर्क में रहने के लिए कई अभ्यास होते हैं। आम तौर पर लोग ब्रह्ममुहूर्त (प्रात: 3.40 बजे, जो आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल समय होता है) से नहीं चूकना चाहते। सबसे साधारण चीज लोग यह करते हैं कि वे सुबह 3.40 बजे मंदिरों के पवित्र कुंडों में डुबकी लगाते हैं।

मार्गली का महीना शरीर में एक कुदरती स्थिरता लाता है। बहुत से आध्यात्मिक जिज्ञासु हमेशा आगे-पीछे करते रहते हैं। यह बहुत से लोगों के साथ होता है, क्योंकि वे खुद को  स्थिर करने के लिए पर्याप्त साधना नहीं करते। अगर आपको ऊपर की ओर खींचा जाता है, और आप अपने भीतर स्थिर नहीं हैं, तो यह असंतुलनों को जन्म देगा। इस महीने शरीर में स्थिरता लाने की कोशिश की जाती है और अगले महीने, यानि थाई के महीने का इस्तेमाल, शरीर में गतिशीलता लाने के लिए किया जाता है। अगर आपने अपने अंदर पर्याप्त स्थिरता बना ली है, तभी आप गतिशील होने का साहस कर पाएंगे। यह संतुलन और स्थिरता लाने का समय है।


संबन्धित पोस्ट


Type in below box in English and press Convert