शहद: स्वाद और गुणों से भरपूर

शहद
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शहद एक ऐसा पदार्थ है जो ना केवल स्वादिष्ट है, रोगों में लाभदायक है, बल्कि आपके सिस्टम को खोलने का काम भी करता है जिससे आप ऊर्जावान महसूस कर सकते हैं।

शहद एक ऐसा पदार्थ है, जिसकी रासायनिक संरचना काफी कुछ इंसान के रक्त से मिलती जुलती है। खासकर जो लोग योगिक क्रियाएं कर रहे हैं, उनके लिए शहद का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है। शरीर पर शहद का प्रभाव काफी कुछ इसके इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करता है। यानी अगर आप सीधे शहद खाते हैं तो उसका प्रभाव अलग होगा, गर्म पानी या ठंडे पानी के साथ लेते हैं तो वह अलग तरह से असर करेगा। लेकिन योग में हम चाहते हैं कि आप इसे गुनगुने पानी के साथ लें, क्योंकि गुनगुने पानी के साथ यह हमारे सिस्टम को खोलता है। एक चीज ध्यान रखें कि शहद को कभी भी उबलते पानी में न डालें और न ही इसे कभी पकाएं, क्योंकि एक खास तापमान पर पहुंचने के बाद शहद का कुछ हिस्सा जहरीला हो जाता है। इसलिए जिस पानी में आप शहद डालते हैं, वह उबलता हुआ न होकर गुनगुना होना चाहिए। साथ ही ध्यान रखें कि एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए।

एनेमिया में लाभकारी

अगर आप रोजाना गुनगुने पानी के साथ एक निश्चित मात्रा में शहद का सेवन करते हैं तो थोड़े दिनों में आप महसूस करेंगे कि आपके शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ गई है।
एनेमिया यानी खून की कमी की स्थिति में शहद काफी उपयोगी है। एनेमिया का एक बड़ा कारण शरीर में लौह तत्व की कमी होती है। अगर खून में पर्याप्त लौह तत्व की मात्रा नहीं होती है तो पूरे शरीर में खून की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता में कमी आ जाती है, जिससे इंसान में जल्दी थकावट और आलस आने लगता है। अगर शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा नहीं होगी तो आपके दिल, दिमाग सहित शरीर के हर हिस्से के काम करने की क्षमता कम हो जाती है।

खून में ऑक्सीजन का होना बेहद जरूरी होता है। आपका शरीर कितना स्वस्थ है या बीमारी के बाद कितनी जल्दी खुद को ठीक कर पाता है, यह आपके खून में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा पर निर्भर करता है। खासकर महिलाओं को इस मामले में खास ख्याल रखने की जरूरत होती हैं, क्योंकि उन्हें हर महीने मासिकचक्र से गुजरना पड़ता है। चूंकि हर महीने उनके शरीर से एक खास मात्रा में खून बाहर निकल जाता है, इसलिए एनेमिया की संभावना उनमें पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा पाई जाती है। अगर मस्तिष्क को उचित मात्रा में खून नहीं मिलेगा तो शरीर और दिमाग को जैसा काम करना चाहिए, वे वैसे नहीं कर पाएंगे।

अगर आप रोजाना गुनगुने पानी के साथ एक निश्चित मात्रा में शहद का सेवन करते हैं तो थोड़े दिनों में आप महसूस करेंगे कि आपके शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ गई है। अगर आपके खून में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन होगी तो आप अपने भीतर उर्जा का प्रवाह महसूस करेंगे। अचानक आपको अपने भीतर काफी ताकत महसूस होने लगेगी, आपकी सक्रियता व कोशिकाओं के पुनः र्निर्माण का स्तर बढ़ जाएगा, साथ ही आपके शरीर और दिमाग की सुस्ती व थकावट गायब होने लगेगी। महिलाएं अगर पुरुषों की अपेक्षा जल्दी डिप्रेशन का शिकार होती हैं तो इसका एक बड़ा कारण उनके रक्त-प्रवाह में ऑक्सीजन की कमी का होना है। अगर ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हुआ तो इंसान आसानी से डिप्रेशन से घिर सकता है।

कुदरत ने पुरुषों को महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा मेहनत वाले काम करने की क्षमता दी है, इसलिए उनमें ज्यादा मजबूत मांसपेशियां पाई जाती हैं। ज्यादा व ताकतवर मांसपेशियों का मतलब ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत। महिलाओं में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा कम होती है, क्योंकि महिलाओं की मांसपेशियां पुरुषों से कम होती है, नतीजा होता है कि उनको कम ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसीलिए महिलाएं खून में ऑक्सीजन की कमी को पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा समय तकझेल सकती हैं। योग में शरीर से जुड़े ऐसे ही आश्चर्यजनक सूक्ष्म भेदों के बारे में जागरूक किया जाता है। ऐसे भेदों के बारे में आप जितना ज्यादा जानेंगे, उतनी ही आपकी जिंदगी बेहतर होती जाएगी। वरना जीवन का मतलब रह जाएगा बस, खाइए, सोइए और मर जाइए।

रक्तचाप में फायदेमंद

शहद का नियमित सेवन सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको अपेक्षा कृत ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है।[
अगर आपको निम्न रक्तचाप की शिकायत है और आप नीचे बैठे-बैठे अचानकउठने की कोशिश करते हैं तो आपको चक्कर आ जाते हैं। निम्न रक्तचाप का मतलब अधिकखून होना नहीं, बल्कि दिमाग में ऑक्सीजन का कम मात्रा में पहुंचना है। इसी तरह से अगर आप अपना सिर नीचे करते हैं और आपको चक्कर आते हैं तो इसका मतलब है कि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है। या तो उच्च रक्तचाप की वजह से या फिर ऑक्सीजन की कमी की वजह से आपको चक्कर आते हैं।

शहद का सेवन हमारे शरीर के इन असंतुलनों को दूर करता है। शरीर में रक्तका दबाव शरीर की जरूरतों पर निर्भर करता है। लोगों को लगता है कि उच्च रक्तचाप एक बीमारी है, लेकिन सच्चाई यह नहीं है। दरअसल, शरीर अपनी जरूरतों के हिसाब से खून का दबाव तय करता है। अगर किसी कारण वश शरीर को सामान्य रूप से ज्यादा ऑक्सीजन या पोषक तत्वों की जरूरत होती है या फिर खून की गुणवत्ता वैसी नहीं होती, जैसी होनी चाहिए तो शरीर का खून पंप करने वाला पंपिंग सिस्टम ज्यादा खून पंप करना शुरू कर देता है। इसके लिए अंगों में शीघ्र और तेज प्रवाह के लिए दिल तेजी से खून को पंप करता है, जिससे खून का दबाव बढ़ता है।

निम्न रक्तचाप के पीछे भी वजह होती है, जैसे शरीर को ही निम्न दबाव की जरूरत हो सकती है या फिर जन्मजात वजहों से ही दिल इतना मजबूत नहीं होता कि वह शरीर की जरूरत के मुताबिक ज्यादा खून पंप कर पाए। ये भी हो सकता है कि शरीर के परिसंचरण तंत्र यानी सर्कुलेटरी सिस्टम में कोई दिक्कत हो अथवा खून की रासायनिक संरचना के चलते ऐसा हो रहा हो। अकसर एक साथ कई वजहों के चलते ऐसा होता है। ठीक इसी तरह उच्च रक्तचाप के कई परिणाम सामने आते हैं, लेकिन शुरु में तो उच्च रक्तचाप खुद ही एक परिणाम है- यह एक परिणाम है, कारण नहीं है।

योग का नियमित अभ्यास करने वाले व शरीर को खास तरह की प्रक्रिया में ढालने वाले लोगों के लिए अपने सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। शहद का नियमित सेवन इस संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको अपेक्षा कृत ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है।

मुख्य बातें
गुनगुने पानी के साथ शहद

  • गुनगुने पानी के साथ शहद लेने से यह हमारे शरीर को खोलता है। खासकर जो लोग योगिक क्रियाएं कर रहे हैं, उनके लिए शहद का इस्तेमाल काफी फायदेमंद होता है।
  • खून की कमी की स्थिति में शहद काफी उपयोगी है। अगर आप रोजाना गुनगुने पानी के साथ एक निश्चित मात्रा में शहद का सेवन करते हैं तो थोड़े दिनों में आप महसूस करेंगे कि आपके शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ गई है।
  • अगर आपके खून में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन होगी तो आप अपने भीतर उर्जा का प्रवाह महसूस करेंगे। अचानक आपको अपने भीतर काफी ताकत महसूस होने लगेगी, आपकी सक्रियता व कोशिकाओं के पुनर्निर्माण का स्तर बढ़ जाएगा, साथ ही आपके शरीर और दिमाग की सुस्ती व थकावट गायब होने लगेगी।
  • एक चीज ध्यान रखें कि शहद को कभी भी उबलते पानी में न डालें और न ही इसे कभी पकाएं, क्योंकि एक खास तापमान पर पहुंचने के बाद शहद का कुछ हिस्सा जहरीला हो जाता है। एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए।

यह लेख ईशा लहर मई 2014 से उद्धृत है।

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