हर दिन – माँ का दिन

माँ का दिन
माँ का दिन

सद्गुरुअपनी माँ के प्रति हमारे अंदर असीम प्रेम होता है, क्योंकि हमने अपने अस्तित्व की शुरुआत उसी के एक अंश के रूप में की थी।  लेकिन हम इस प्रेम को और कई गुना बढ़ा सकते हैं, अगर हम इसे करीब से देखें कि सृष्टि में एक भी चीज ऐसी नहीं है, जिसके बिना हमारा अस्तित्व हो सकता है। ऐसा हो सकता है अगर हम अस्तित्व की हर चीज को एक माँ के रूप में देखें।

सद्‌गुरु:

अगर आप किसी को पसंद या नापसंद करते हैं, तो भी आप चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर देखते हैं। बढ़ा-चढ़ाकर देखने का मतलब है कि जाने-अनजाने आप सच्चाई से भाग रहे हैं। सच्चाई से भागने का मतलब है कि आप अपने खिलाफ काम कर रहे हैं।
अभी आप जिस शरीर को ढो रहे हैं, यह वही शरीर नहीं है जो आपकी माँ की गर्भ से बाहर आया था – वह तो पूरी तरह बदल चुका है। आज आपने अपने शरीर में जितना भी किलोग्राम बढ़ा लिया है, वह सब धरती माँ का दिया हुआ है। मैं आपको जन्म देने वाली मां को छोटा दिखाने की कोशिश नहीं कर रहा हूं, बात सिर्फ इतनी है कि अगर आप एक आध्यात्मिक जिज्ञासु हैं तो सभी चीजों को सही नजरिये से देखना बहुत ही महत्वपूर्ण है। अगर आप अपने मन में या अपनी भावनाओं में चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर देखते हैं, तो आप खुद को गलत दिशा में ले कर चले जाएंगे और काफी समय तथा जीवन बरबाद कर लेंगे। अगर आप किसी से प्रेम करते हैं, या किसी से नफरत करते हैं, तो आप चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर देखेंगे। अगर आप किसी को पसंद करते हैं या नापसंद करते हैं, तो भी आप चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर देखते हैं। बढ़ा-चढ़ाकर देखने का मतलब है कि जाने-अनजाने आप सच्चाई से भाग रहे हैं। सच्चाई से भागने का मतलब है कि आप अपने खिलाफ काम कर रहे हैं। जो अपने खिलाफ हो जाता है, उसे किसी दुश्मन की जरूरत नहीं होती। इसे अपनी मदद करना कहते हैं! आपके जीवन की खूबसूरती यही है – आप पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं।

इसलिए हम जन्म देने वाली माता और धरती माँ, दोनों के आभारी हैं और दोनों की कद्र करते हैं। हम इस माँ और उस मां दोनों के कारण यहां पर हैं। आपको अपने जीवन के हर दिन उन सभी चीजों और उन सभी लोगों की कद्र करनी चाहिए जो आपके जीवन को वैसा बनाने में योगदान कर रहे हैं, जैसा वह आज है।

अगर आप करीब से देखें तो सृष्टि में एक भी चीज ऐसी नहीं है, जिसके बिना आपका अस्तित्व हो सकता है। इसलिए मैं चाहता हूं कि आप हर चीज को एक माँ के रूप में देखें।
आपकी खुशहाली के लिए जो कुछ भी जरूरी है, उसका सृष्टा द्वारा पूरा ध्यान रखा जाता है। हर पल हर कदम पर यह धरती आपका साथ देती है, कभी आपके कदम रखने पर यह धरती टूट नहीं जाती। ऐसा नहीं होता कि हवा वातावरण से भाग जाए और आपकी सांस में आने से मना कर दे। मां-बाप की तरह ये लाखों शक्तियां आपके जीवन में हर पल आपकी मदद कर रही हैं। आपने ये चीजें मांगी नहीं और आप इनके लिए कोई पैसे भी नहीं देते। यूं ही सब कुछ मिल जाता है। इसलिए प्रकृति और आपके आस-पास के लोग आपको जो कुछ भी दे रहे हैं, इन सब के लिए क्या आपको आभार में शीश नहीं झुकाना चाहिए? क्योंकि आप इन शक्तियों के सहयोग के बिना, जो वे बिना मांगे देती हैं, अपना जीवन चलाने में असमर्थ हैं ।

अगर आप इस बात की कद्र नहीं करते, अगर आपने पूरी तरह अपनी चेतना खो दी है, तो ऐसा इसलिए है क्योंकि आप अपने दिमाग में चल रहे मूर्खतापूर्ण विचारों में ज्यादा व्यस्त हैं। आपके दिमाग में जो चल रहा है, वह इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि आप अपने बारे में कुछ ज्यादा सोचते हैं।

अगर आप करीब से देखें तो सृष्टि में एक भी चीज ऐसी नहीं है, जिसके बिना आपका अस्तित्व हो सकता है। इसलिए मैं चाहता हूं कि आप हर चीज को एक माँ के रूप में देखें। आज वृक्ष- माता का दिन है, कल पर्वत- माता का दिन है, अगला दिन आपकी जैविक माँ का दिन है। ये दिन इसलिए निर्धारित किए गए हैं क्योंकि वैसे लोग अपनी माँ के बारे में कभी नहीं सोचेंगे। संस्कृतियां इसी तरह की बन गई हैं। लेकिन अगर आप थोड़े अधिक चेतन हैं, अगर आप अपने आप को याद दिलाएं और इसे इस तरह देखें, ‘अरे, यह पेड़ मुझे ऑक्सीजन दे रहा है। वे हर पल मेरी मदद कर रहे हैं।’ अगर आप सभी चीजों के साथ, जहां भी आप जाते हैं, यह भावना रखें, तो आप चैतन्य हो जाएंगे।


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