क्या कॉफी आपकी आदत बन चुकी है?

कॉफ़ी

क्या आप उन लोगों में से हैं, जो एक प्याली गर्म और कड़ी कॉफी के बिना अपने दिन की शुरुआत कर ही नहीं पाते। साथ ही, आप हर वक्त यह भी सोचते रहते हैं कि कैसे अपनी इस आदत पर काबू पाया जाए। खैर अगर ऐसा है भी, तो आप अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं।

कॉफी पीने को लेकर दुनियाभर में बहस होती रहती है। जहां बहुत सारी बीमारियों के लिए इस पेय को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है, वहीं इसके फायदों की भी चर्चा की जाती है। एक तरफ कहा जाता है कि कॉफी की मदद से डायबीटीज और पर्किसंस जैसी बीमारियों से निजात पाई जा सकती है, तो दूसरी तरफ दिल के रोगों और कैंसर आदि जानलेवा बीमारियों के लिए इसे जिम्मेदार बताया जाता है। कॉफी पीने वालों को एक दिन में औसतन कितनी कॉफी पीनी चाहिए जैसे सवालों पर विशेषज्ञों की बहस तो जारी रहेगी, फिलहाल हम जवाब के लिए चलते हैं  सद्‌गुरु के पास।

 सद्‌गुरु कहते हैं

अगर आप कॉफी के गुणों की चर्चा करना चाहते हैं, तो यकीनन यह आपको चुस्त दुरुस्त रखती है। खासकर अगर आप इसे महीने में एक बार पिएं तो, अपने अंदर आप एक असाधारण स्फूर्ति पाएंगे और खुद को एक असाधारण व्यक्ति महसूस करेंगे। लेकिन आप अगर रोज कॉफी पीने लगेंगे, तो धीरे-धीरे इस पर आपकी निर्भरता बढ़ती जाएगी। इससे कुछ समय के लिए आपकी व्यग्रता जरूर थमेगी, लेकिन आप इसके आदी हो जाएंगे।

अगर आप दो-एक महीने के लिए कॉफी पीना बिलकुल छोड़ देते हैं और फिर एक सुबह एक कप कड़ी कॉफी पीते हैं, तो आप देखेंगे कि आपके हाथ कांप रहे हैं। अगर आप छह महीनों तक लगातार रोजाना कॉफी पीते हैं और एक दिन आपको कॉफी नहीं मिलती, तो आप अपने अंदर एक अजीब सी बेचैनी महसूस करेंगे। इसका मतलब साफ है कि कॉफी आपके शरीर को नुकसान पहुंचा रही है।

तो सवाल उठता है कि क्या हमें कॉफी पीनी बिलकुल छोड़ देनी चाहिए।

नहीं, बल्कि इसकी प्राथमिकता छोड़ देनी चाहिए। मैं आपको कभी कुछ भी छोड़ने की सलाह नहीं दूंगा। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि दुनिया में किसी भी वस्तु या आदत का गुलाम नहीं बनना चाहिए। जीवन में जो भी करें, उसके नतीजे को जानते-समझते हुए करें। चाहे वह कॉफी हो, सिगरेट हो या फिर भगवान की बात ही क्यों न हो, जो भी करें अच्छी तरह समझ-बूझ कर करें। क्या चीज कितनी मात्रा में ली जाए, यह केवल आप ही तय कर सकते हैं। लेकिन यह जरूर समझ लें कि यदि आप लंबे समय तक किसी भी उत्तेजक पदार्थ का सेवन करते रहेंगे, तो उसका खामियाजा आपको उठाना ही होगा। अगर आप सोचते हैं कि जिंदगी छोटी ही ठीक है और आप 90 साल के बजाए 70 साल तक ही जीना चाहते हैं, तो फिर ठीक है। मैं इस नजरिये के खिलाफ नहीं हूं। न ही मैं कॉफी के खिलाफ हूं।

  मैं आपको कभी कुछ भी छोड़ने की सलाह नहीं दूंगा। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि किसी भी वस्तु या आदत का गुलाम नहीं बनना चाहिए। जो भी करें, उसके नतीजे को जानते-समझते हुए करें।

यह कोई ऐसी चीज नहीं, जिसे पीने के लिए आप बाध्य हों। आपको इसका स्वाद पसंद है। कभी आप एक बड़ा प्याला कॉफी पीते हैं और आपको बड़ा आनंद आता है। कभी-कभी कॉफी पीने में कोई बुराई भी नहीं। लेकिन जब यह आपकी रोज की आदत बन जाती है, तो फिर दिक्कत शुरू हो जाती है। और जब आपकी हालत ऐसी हो जाए कि अगर किसी सवेरे आपको कॉफी न मिले, तो आप बेचैन हो जाएं और आपका सारा दिन बेकार हो जाए, तो फिर समझ लीजिए कि आपको मदद की जरूरत है।

एक कॉफी का कप यह कैसे तय कर सकता है कि आपका दिन कैसा बीतना चाहिए। मैं यहां आपको यह नहीं बता रहा हूं कि आपको क्या खाना और क्या पीना चाहिए। मैं सिर्फ यह कह बता हूं कि कॉफी के सेवन के क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं। आप अपने साथ चाहे जो भी करें, उसके सभी पहलुओं को जानते हुए करें, अनजाने में कुछ न करें। अगर आप मौत की तरफ बढ़ रहें हैं, तो आपको वह भी पता होना चाहिए, मैं सिर्फ इतना कह रहा हूं।


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  • Natasha

    एक बहुत ही अलग नज्जरिया . यह मुज़्हे जीवन के हर पेहलु में निर्णय लेने के लिए अधिक सक्षम बनायगा . मुज़्हे ख़ुशी है के सध्गुरु ने कॉफ़ी के संदर्भ में कोई ठोस निर्णय लेने के लिए बाध्य नहीं किया अपितु चुनाव की स्वतंत्रता दी.मैं अपनी कोफ्फे का अब अधिक स्तर्कुता से लम्बे समय तक आनंद ले सकती हूँ 🙂

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