होली के रंग ठंडाई के संग

होली के रंग ठंडाई के संग
होली के रंग ठंडाई के संग

ठंडाई एक शीलत पेय है, जो पारंपरिक रूप से होली और शिवरात्रि जैसे त्योहारों से जुड़ा है। तो होली के अवसर पर आपके लिए हम लेकर आए हैं ठंडाई की रेसिपी, ताकि आप होली से पहले इसे तैयार कर सकें।

ठंडाई गर्मियों के दिनों में बहुत ही स्वादिष्ट, ताजगी और ऊर्जा देने वाला पेय है। अगर एक आप गिलास ठंडाई (दूध ठंडाई) रोज सुबह पीते हैं, तो धूप में लगने वाली लू और नकसीर (नाक से खून आने) जैसी तकलीफों से भी बचे रहेंगे।

बाजार से भी तैयार ठंडाई खरीदी जा सकती है, लेकिन घर में बनी हुई ठंडाई आपको बिना मिलावट और प्रिसरवेटिव्स के मिलेगी, जो अवश्य ही आपके स्वास्थ्य के लिये फायदेमंद होगी। तो आइये आज हम ठंडाई बनायें।

तैयारी करने का समय – दो घंटे
कुकिंग समय – 20 मिनट
कुल समय – ढाई घंटे
कुल मात्रा – 4 गिलास

सामग्री:

बादाम – एक तिहाई कप
काजू – दो चम्मच
खसखस – एक चम्मच
मगज – 2 चम्मच
काली मिर्च – तीन चौथाई चम्मच
सौंफ – आधा चम्मच
हरी इलाइची – 5
जायफल – ताजा घिसा हुआ, चौथाई चम्मच
चीनी या गुड़ – 12 चम्मच
दूध – डेढ़ किलो
पानी – तीन चौथाई कप
खाने वाला गुलाब जल/गुलाब का सत/ गुलाब फूल की सूखी पंखुड़ियां – आधा चम्मच
केसर – कुछ रेषे
पिश्ता – कटे हुए, एक मुट्ठी

बनाने की विधिः
सबसे पहले खसखस को साफ पानी से तीन से चार बार धो लें, ताकि उसमें मौजूद धूल और मिटटी निकल जाए। अब बादाम, मगज और खसखस को दो घंटे भिगो लें। फिर बादाम को छील लें। मगज और खसखस का पानी निकाल कर निथार लें। दूध को उबाल लें और इसमें चीनी या गुड़ डालकर मिलाएं। चीनी घुलने के बाद गैस को बंद कर दूध को ठंडा होने दें।

अब छिले हुए बादाम, खसखस, काजू, सौंफ, काली मिर्च, हरी इलाइची के दाने व जायफल को मिक्सी में पीस कर पेस्ट बना लें। इसमें चौथाई कप पानी डालकर दोबारा से बारीक महीन पेस्ट के तौर पर पीसें। अब इस पिसे हुए पेस्ट को दूध में डालकर अच्छी तरह से चलाएं। इस पर ढक्कन रखकर इसे 15 मिनट तक पकाएं।

अब इस मिश्रण को छन्नी से छान लें। छन्नी में निकले मेवे के मोटे हिस्सों को दोबारा मिक्सी में डालकर बचे हुए आधा कप पानी के साथ फिर से पीसें। अब इस मिश्रण को फिर से दूध में डाल दें। इसमें केसर, गुलाबजल या पंखुड़ियां डालकर फिर से चलाएं। इसे कम से कम तीन घंटे के लिए फ्रिज में ठंडा होने के लिए रखे। आपकी ठंडाई तैयार है।
अब इस ठंडाई को गिलास में डालकर उपर से कटे हुए पिस्ते, चांदी के वर्क से सजे बादाम के टुकड़े व कुछ केसर के रेशे से सजाएं। ठंडा ठंडा पेश करें।

कल कृष्ण लीला सीरीज की अगली कड़ी में पढ़ें –  कृष्ण के गुरु संदीपनी इतने महान गुरु होते हुए भी अपने पुत्र को डाकुओं के चंगुल से क्यों नहीं बचा पाए ?

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    kafi achha hai ji…. mere blog par padhiya kavitaiye…holi ki http://holisms.in