महाशिवरात्रि – 2014 ईश्वरीय कृपा और अनुकंपा से सराबोर रात

महाशिवरात्रि – 2014 ईश्वरीय कृपा और अनुकंपा से सराबोर रात

आयोजकईशा फाउंडेशन

आयोजन स्‍थान – ईशा योग केंद्र, कोयंबटूर

दिनांक – 27 फरवरी 2014

समय – शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक

मुख्‍य आकर्षण

  • सद्‌गुरु के साथ महासत्‍संग व रात्रिजागरण
  • ध्‍यान प्रक्रियाओं में दीक्षित करेंगे सद्‌गुरु
  • अन्‍नदान, मध्‍यरात्रि ध्‍यान और प्रश्‍नोत्‍तर

 

 साथ ही होगी संगीत और नृत्‍य की बहार

पद्म विभूषण पंडित जसराज-  शास्त्रीय गायक

अशित देसाई – संगीतकार

राजस्थान रूट्स – लोक संगीत बैंड

साउंड्स ऑफ ईशा – ईशा की संगीत मंडली

ईशा योग केंद्र से सीधा प्रसारण देखें

सीधा प्रसारण (वेब स्‍ट्रीम)   www. mahashivarathri.org

  • आज दुनिया के हर कोने से करीब 6  लाख लोग इस महोत्‍सव में भाग लेने ईशा योग केन्द्र पहुंच रहे हैं
  • टेलिविजन प्रसारण के जरिए दुनिया भर के 3 करोड़ लोग इस महोत्‍सव में भाग लेंगे
  • भारत और दुनिया भर में अन्य 70 केन्द्रों में भी यह उत्सव रात भर पूरे उल्लास के साथ मनाया जाएगा

 

महाशिवरात्रि से कैसे लाभ उठाएं?

  • आज ग्रहों की दशा कुछ ऐसी होती है कि मानव शरीर में ऊर्जा सहज ही ऊपर की ओर चढ़ती है
  • आज के लिए नुस्खा यह है कि आप समानांतर या क्षैतिज अवस्थाओं में न लेटें
  • हमेशा मेरूदण्ड सीधा रखें। शरीर में हो रहे ऊर्जा के इस उमाड़ से भरपूर लाभ उठाएं
  • यह एक अनूठा अवसर है, जहां जीवन में एक  नई दृष्टि खुलने की संभावना पैदा होगी, जीवन में एक स्‍पष्‍टता आएगी।

“भौतिक प्रकृति के नियमों को तोड़ना ही तो आध्यात्मिक प्रक्रिया है। इस अर्थ में हम सभी नियम तोड़ने के दोषी हैं, गुनाहगार हैं और सबसे बड़े गुनाहगार तो स्वयं शिव हैं। फिर तो अभी आप शिव से प्रार्थना करना छोड़कर उनके गैंग में शामिल हो जाएं।” –   सद्‌गुरु

आइए शामिल हो जाएं इस ज्ञान ध्‍यान आनंद महोत्‍सव में

इस ब्लाग पर आप सारी रात चलने वाले महोत्सव के सीधे प्रसारण का आनंद लें । शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक

19.40

निर्वाण षट्कम: राग व रंगों से परे हर इंसान किसी न किसी रंग में रंगा है, किसी न किसी राग में मस्त है। हमारा जीवन कभी रंगों में इठलाता व इतराता है तो कभी सुबकता व सिसकता है; कभी खिलता व फबता है तो कभी सूखकर मुरझा जाता है। रंगों से शुरू होकर रंगों में ही खत्म हो जाता है। लेकिन हम जीवन की संपूर्णता को, जीवन के असली आनंद को तब तक नहीं जान पाएंगे जब तक हम उस आयाम तक न पहुंच जाएं जो राग व रंगों से परे है। ईशा के ब्रह्मचारी गुंजित ध्वनि में निर्वाण षट्कम गा रहे हैं। इस देव गीत को सुनकर मन सहज ही रागों से मुक्त होने लगता है।

 

18.30

ध्‍यानलिंग में पंचभूत अराधना

भूमि, जल, अग्नि, वायु और आकाश – ये पांच तत्व न केवल इस शरीर के, इस धरती के, बल्कि इस पूरी सृष्टि के आधार हैं। इन्हीं पांच तत्वों से सृजन होता है। आप इस सृष्टि में जो कुछ भी देखते हैं, वह बस इन पांच तत्वों की बाजीगरी है।

आप जिस वायु में सांस लेते हैं, जो पानी पीते हैं, जो खाना खाते हैं, जिस भूमि पर चलते हैं और अग्नि जो जीवन-ऊर्जा के रूप में काम कर रही है- अगर इन सभी को आप नियंत्रित और केंद्रित रखें, तो आफ लिए स्वास्थ्य, सुख और सफलता सुनिश्चित है। – सद्‌गुरु

विज्ञान और तकनीक के युग में हमारा जीवन प्राकृतिक कम और कृत्रिम ज्यादा होता जा रहा है। प्रकृति का संपर्क और सानिध्य न मिलने से शरीर के अवयवी तत्व अपना मौलिक गुण खोने लगते हैं और उनमें एक तरह का विकार आ जाता है। यही विकार बीमारियों की जड़ है। हमारे शारीरिक कष्ट, मानसिक उत्पीडन और भावनात्मक समस्याओं का एक सबसे बड़ा कारण तात्विक विकार ही है। भूत शुद्धि से आप अपने को एक स्‍वस्‍थ्‍य व  आनंदित इंसान बना सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिये पढ़ेः ध्यानलिंग में पंचभूत आराधना

 

17.52

शून्‍याकुटिर से पंचभूत अराधना के लिए सद्गुरु का प्रस्‍थान

पंचभूत अराधना के लिए सद्‌गुरु अपने निवास स्‍थल शून्‍या कुटिर से ध्‍यानलिंग की तरफ जा रहे हैं। साथ में हैं केश मुंडित ब्रह्ममचारी और सन्यासी । चारों ओर दर्शानार्थियों की भीड़ खड़ी है जो उनके दर्शन के अभिलाषी हैं।

16.29

ईशा योग केंद्र की झांकियां

ईशा योग केंद्र में आज बखूबी चहल पहल है। लाखों लोगों का आज आना जाना होगा। सभी लोग ध्‍यानलिंग और लिंगभैरवी देवी के दर्शन करेंगे।

15.10

महाशिवरात्रि महोत्सव 2014 के शुरू होने में अभी लगभग 4 घंटे बाकी हैं । आईये तब तक हम पिछले साल की महाशिवरात्रि की झाकियों का आनंद लेते हैं …


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