स्मृति ईरानी और सद्‌गुरु का संवाद – नेतृत्व की भूमिका में महिलाएं

स्मृति ईरानी और सद्‌गुरु का संवाद - नेतृत्व की भूमिका में महिलाएं

सद्‌गुरुनवम्बर 2016 में ईशा योग केंद्र में आयोजित नेतृत्व से जुड़े कार्यक्रम – ईशा इनसाइट : सफलता का डी. एन. ए. – में स्मृति ईरानी और सद्‌गुरु के बीच रोचक संवाद हुआ था। पढ़ते हैं उस संवाद का पहला भाग। 

परिचय : एक महिला के रूप में स्मृति इरानी के कई पहलू हैं। वे वर्तमान केन्द्रीय कपड़ा मंत्री हैं, मानव संसाधन विकास की पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, सांसद, पूर्व मॉडल और अभिनेत्री, पत्नी, दो बच्चों की मां, और एक तेजस्वी वक्ता भी हैं। 24 नवम्बर से 27 नवंबर 2016 तक ईशा योग केंद्र में आयोजित कार्यक्रम “ईशा इनसाइट: सफलता के डीएनए” के सहभागियों के साथ एक सत्र में सद्‌गुरु और स्मृति ईरानी के बीच संवाद हुआ था। पढ़ते हैं उस संवाद का पहला अंश।

सद्‌गुरु : ये हमारा सौभाग्य है कि हमारे साथ मंत्री महोदया – जो आम तौर पर सिर्फ स्मृति के रूप में जानी जाती हैं – मौजूद हैं। ये आज उस मंत्री पद का उत्तरदायित्व संभाल रही हैं, जो हजारों सालों से भारत का पर्याय रहा है। वो मंत्रालय है – वस्त्र और कपड़ा। जब दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में लोग अर्ध नग्न अवस्था में रहते थे, हम तब भी अच्छा कपड़ा बना रहे थे। एक ऐसा समय था, जब हमने लगभग दुनिया के उन सभी भागों तक कपड़े पहुंचाए, जिन भागों के बारे में जानकारी मौजूद थी। चाहे कारण जो भी रहे हों, हम थोड़े मंद पड़ गए, पर मुझे लगता है कि स्मृति जैसी सक्रीय नेता के इस क्षेत्र में आने से चीज़ें आगे की ओर बढेंगी। पर आज वे कपड़ों के बारे में बात करने के लिए यहां उपस्थित नहीं हैं – ये एक नेतृत्व शिखर सम्मलेन है।

आज, भारत में सामाजिक स्थितियाँ, विश्व के किसी भी अन्य समाज की तुलना में अधिक तेजी से बदल रही हैं। मेरी दृष्टि में,पांच साल पहले इस देश में एक स्त्री के नेतृत्व संभालने के जो मायने थे, वे आज पूरी तरह बदल चुके हैं। एक औरत के रूप में जन्म लेना ऐसी चीज़ है जिसे आप चुन नहीं सकते, पर एक नेता बनना और राजनीति के क्षेत्र में आना – ये आपका चुनाव है। आज इस देश में एक औरत होने और एक नेता होने का आपका अनुभव कैसा है? इन दोनों बातों का मिलन कैसे होता है? किन फायदों और किन नुकसानों का आपको सामना करना पड़ता है?

स्त्रीत्व और नेतृत्व में मेल

मंत्री स्मृति ईरानी: मुझे लगता है कि अगर मेरे पास स्त्री या पुरुष में से एक चुनने का विकल्प हो, तो मैं एक औरत होना ही चुनुंगी। इसका कारण ये है – कि महिलाओं में नेतृत्व एक स्वाभाविक कौशल है।

जब मुझे आप के साथ इस बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था,तो मैंने कहा कि जब आप एक गुरु के पास जाते हैं, तो आप भाषण नहीं देते।
मैं नेतृत्व को एक ऐसे विशेष दर्जे के रूप में नहीं देखती, जो आपको किसी पदवी पर होने से मिला है। यह वास्तव में आपकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक हिस्सा है। मेरे लिए,हर औरत एक नेता है, क्योंकि अगर वह एक माँ है, तो वह हर दिन अपने बच्चे को स्कूल ले जाती है। वह अपने आर्थिक जीवन का खुद नेतृत्व करती है।

सद्‌गुरु : माँ बनने से पहले, वह अपने पति का नेतृत्व करती है।

मंत्री स्मृति ईरानी : ठीक है, मेरे और मेरे पति के बीच गुरुजी, हम दोनों ने एक समझौता किया है। वह कहते हैं, “मैं घर का मालिक हूँ, और मैं आपकी अनुमति पाकर ऐसा बोल रहा हूँ। और हम इस प्रकार से खुद को दुनिया में प्रस्तुत करते हैं।” लेकिन जब मैं अपनी पृष्ठभूमि, अपनी जीवन यात्रा को देखती हूँ, आज भारत के बारे में बात करते हैं … हम आज के भारत को कैसे परिभाषित कर सकते हैं? हम देश की आर्थिक गतिविधियों को समझ रहे हैं, लेकिन क्या भारत सिर्फ इसी दायरे तक सिमित है? जब मुझे आप के साथ इस बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया था,तो मैंने कहा कि जब आप एक गुरु के पास जाते हैं, तो आप भाषण नहीं देते।

गुरु के सानिध्य का महत्व

आप गुरु के पास इसलिए जाते हैं, कि जीवन को गुरु की दृष्टि से देख सकें। अप गुरु के पास आत्मज्ञान प्राप्ति का मार्ग जानने के लिए जाते हैं। तो सबसे पहले मैं ये कहना चाहूंगी, कि मैं बहुत असहज महसूस कर रही हूँ। मुझे असहजता इसलिए हो रही है, क्योंकि लम्बे समय से हमें ये सिखाया गया है कि आपको गुरु के बराबर नहीं बैठना चाहिए। आपको हमेशा गुरु से नीचे बैठना चाहिए।

सद्‌गुरु : यह बात केवल आपके मनोभाव पर लागू होती है, आपकी कुर्सी की ऊंचाई पर नहीं।

मंत्री स्मृति ईरानी: मनोभाव या ऊंचाई, दोनों। मुझे माफ कर दीजिये – मैं आपकी तरह ज्ञानी नहीं हूँ। जब मैंने आपके पैरों को छुआ, तो मैंने शारीरिक तौर पर आपके पैरों को नहीं छुआ था – मैंने उस जमीन को छुआ जिस ज़मीन पर आप चल रहे थे। कुछ लोगों का कहना है कि यह चीजों को देखने का एक पुराना तरीका है, लेकिन मुझे लगता है इन्हीं चीज़ों का पालन करने की वजह से मैं आज अच्छी स्थिति में हूँ।

आज जब मै संस्कृति के बारे में बात करती हूँ, कई लोग उन बातों को अपनाने से डरते हैं। इससे संस्कृति बस एक शब्द या मनोदशा बन जाता है, जो लोगो में एक संघर्ष या अवमानना की भावना का कारण बनता है। जब आपने मुझसे पूछा कि एक औरत होने और राजनीति में होने पर कैसा महसूस होता है। मुझे लगा कि बहुत लम्बे समय से हमने अपने मन में औरतों कि एक ऐसी छवि बनाई है, जो हमेशा विनम्र बनी रहेगी और हर बात के लिए “हां” में जवाब देगी।

सद्‌गुरु : नहीं, हमारे पास काली भी है।

मंत्री स्मृति ईरानी: लेकिन वह एक देवी हैं। नश्वर प्राणी के रूप में, हमने महिलाओं को एक बलिदान की मूर्ती के रूप में देखा है, एक ऐसी छवि बनाई है जो हमेशा हाँ बोलती रहे।

मेरा मानना है कि नेतृत्व सँभालने पर आपमें स्वाभाविक रूप से स्त्रीत्व की भावना विकसित हो जाती है – जिससे आप सहकर्मियों की शक्तियों और कमजोरियों को पहचान सकते हैं।
एक अच्छी स्त्री होने के बारे में ऐसी धारणा है कि उसे हर चीज़ में संतुलन स्थापित करना चाहिए और संघर्ष नहीं होने देना चाहिए। आज मेरी उम्र 40 साल है, और अगर आधुनिक संदर्श में आप मुझसे पूछते हैं – कि औरत होने के क्या मायने हैं, तो मैं कहूँगी कि अगर आप एक स्त्री हैं और अपने मन से संचालित होतीं हैं, तो आप लोगों की नज़रों में चुभतीं हैं। मैं यहां बैठी स्त्रियों के चेहरों पर मुस्कराहट देख रही हूँ। मुझे लगता है सभी इससे मिलते जुलते अनुभवों से गुजरीं हैं। पर जब आप नेतृत्व की बात करते हैं…

सद्‌गुरु : मैं ऐसी किसी भी औरत का साथ पसंद नहीं करूंगा, जिसके पास अपना खुद का मन न हो।

मंत्री स्मृति ईरानी: हाँ! लेकिन आप सिर्फ एक आदमी ही नहीं है, आप सद्गुरु भी हैं। मेरा मानना है कि नेतृत्व सँभालने पर आपमें स्वाभाविक रूप से स्त्रीत्व की भावना विकसित हो जाती है – जिससे आप सहकर्मियों की शक्तियों और कमजोरियों को पहचान सकते हैं। फिर या तो आप उन्हें सशक्त बना सकते हैं, या अगर कोई साथ मिलकर काम न करे, तो उसे कोमलता से बता सकते हैं कि कैसे एक साथ काम करने से टीम को और सभी लोगों को लाभ पहुँचता है।

आज राजनीति में, ये जरुरी है कि हम स्वीएकर करें कि कुछ मुद्दों पर हम एक साथ हैं, लेकिन कुछ मुद्दे ऐसे भी हैं जो हमें सभी से अलग ले जाते हैं, और हमें अपने व्यक्तित्त्व की विशेषता को बरकरार रखने का अवसर देते हैं। मुझे लगता है कि यह सिर्फ महिलाओं पर ही नहीं, पुरुषों पर भी लागू होता है। मुझे इस बात पर बहुत गर्व है कि मेरे देश में पुरुषों ने खुलापन अपनाते हुए प्रधानमंत्री के रूप में एक महिला को चुना था।

सद्‌गुरु : क्योंकि इस देश में,जिस दिन से हमें अपनी आजादी मिली है, हम ने ये कभी नहीं सोचा कि एक औरत को मताधिकार दिया जाना चाहिए या नहीं।

मंत्री स्मृति ईरानी: हाँ!

राजनीति में स्त्रियों के लिए परेशानियां

सद्‌गुरु : लेकिन, राजनीति में थोड़ी बहुत परेशानियां आ सकती हैं। आपको बहुत बड़ी भीड़ संभालनी पड़ती है। मैं यह कह रहा हूँ, क्योंकि मैं भी लगातार भीड़ के बीच में होता हूँ। थोड़ी शारीरिक परेशानी होती है जब आप बड़ी भीड़ में होते हैं। इससे एक महिला को असुविधा हो सकती है, पर ऐसा न होने देकर आप इसे एक नेता के लिए एक फायदेमंद स्थिति में कैसे परिवर्तित करती हैं?

मंत्री स्मृति ईरानी: मैंने एक राजनेता और एक अभिनेता के रूप में भीड़ को देखा है। मेरी मधुर यादों में से एक याद आपके लिए प्रस्तुत है-मैं एक राजनेता के रूप में नहीं , लेकिन एक अभिनेता के रूप में छत्तीसगढ़ में पचास हजार लोगों की भीड़ के बीच चल रही थी। आम तौर पर, लोगों का कहना है कि महिला कलाकारों इस तरह भीड़ के आसपास भी नहीं होना चाहिये। लेकिन मुझे लगता है कि यह एक परिचय (मान्यता) और संस्कृतिकी अभिव्यक्ति है, जब मैं चला रही थी , उन पचास हजार लोगों ने बहुत ही सम्मान से मुझे बाहर निकलने के लिए रास्ता बनाया और जाने की लिए अनुमति दी।

लोगों का मानना है कि अब – राजनीति में, जब आप पूछते हैं, “कैसे आप अपने आप के लिए एक लाभ दायक परिस्थिति बनाती है ?जो उनके लिए उद्धार नेतृत्व का एक विचार है। वे किसी के साथ जुड़ना चाहते हैं, जो संभवतः है उनके जैसा हो या उनसे थोड़ा बेहतर हो . इस संदर्भ में तकनीक और संचार आपके लिए या आपके विरुद्ध काम कर सकता है .एक नेता का जीवन बिलकुल खुली किताब की तरह है ..उसके जीवन का हर पल
निरीक्षण में होता है . राजनेताओं के लिए सच छिपाना बहुत ही कठिन हैं क्यूंकि यह जनता है और यह सब जानती है


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