ईशा उप-योग : छात्रों और योग शिक्षकों ने साझा किये अनुभव

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पिछले कुछ सप्ताहों में, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह के अंग के रूप, हज़ारों स्वयंसेवकों ने भारत तथा विदेशों में, जनता के लिए सरल ईशा उप-योग सत्र आयोजित किए। लाखों लोगों ने इनसे लाभ उठाया। इन सत्रों के केंद्र बिंदु स्कूल और कॉलेज थे और इसी वजह से इन सत्रों का सबसे ज्यादा लाभ छात्रों ने उठाया।

आइये जानते हैं, इन अथक प्रयासों के बारे में और साथ ही लाखों लोगों के जीवन में हुए रूपांतरण के बारे में। 

1. किलीयूर सरकारी स्कूल, किलीयूर गाँव तिरुचरापल्ली, तमिलनाडू

“हम एक सुदूर प्रांत में हैं। यहाँ हमें आज से पहले कभी कोई मिलने नहीं आया। हम बहुत प्रसन्न हैं। हम आपका निरंतर सहयोग चाहते हैं।“ प्रधान अध्यापक

2. नेशनल गरोदिया स्कूल, हैदराबाद

“एक बार तो मुझे ऐसा लगा कि ये छात्र वास्तव में योग सीखने में दिलचस्पी रखते हैं या ये केवल अपने अध्यापकों के कहने पर आ रहे हैं। कुछ ही घंटों के भीतर, मुझे मेरा उत्तर मिल गया। मैं सत्र के बाद, हॉल के बाहर खड़ी अपने साथी स्वयंसेवकों के साथ, अगले सप्ताह होने वाले सत्रों के बारे में चर्चा कर रही थी। एक छात्रा मेरे पास आई और उप-योग की सी डी के दाम पूछे। जब मैंने उसे दाम बताए, तो उसने एक छोटा सा बटुआ खोला, दस का एक नोट और एक रूपए के कुछ सिक्के निकाले और वह सी डी खरीद ली।

तब मुझे एहसास हुआ मेरी सोच कितनी नादान थी। मैंने सीडी की बिक्री दर्ज़ करने के लिए उसका नाम पूछा। उसने जवाब दिया, “सिराजुन्निशा,” – ज्योति बासु, स्वयंसेवक, दो हज़ार छात्रों के लिए आईवाईडी सत्रों का आयोजन किया।

3. एसओएस चिल्ड्रंस विलेज ऑफ़ इंडिया, चेन्नई

 

“पता नहीं क्यों, पर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, मुझे योग बहुत पसंद है।” – सत्र के बाद नौ वर्षीय छात्र का कथन।

4. श्याम सिंह स्मारक कन्या इंटरकॉलेज, उत्तर प्रदेश

“अधिकतर बच्चे अपनी कक्षाओं के सत्र के मुक़ाबले, इस डीवीडी योग में ज़्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं! इससे उनकी उपस्थिति भी बढ़ी है।” – प्रिंसीपल

5. डचिस क्लब, चेन्नई

“एलीट डचिस क्लब के सदस्यों के लिए, विशेष इवेंट ‘ट्विस्ट विद उप-योग एट ऑलिव इन सेवर्स’ का आयोजन किया गया। इस सत्र ने अनेक सदस्यों को इतनी गहराई से छुआ कि कहा नहीं जा सकता। सत्र के बाद भी उन्ह्में  और अधिक योग करने की इच्छा थी। उनके चेहरों पर छाई दैवीय मुस्कान देख, रविवार अपने-आप में सार्थक हो गया। ये सब उस दिव्यदर्शी की देन है!” – रम्या, ईशा स्वयंसेवक। डचिस क्लब के चालीस सदस्यों के लिए सत्र का आयोजन किया

6. सेंट कैथरींस होम फॉर डेस्ट्टीटयूट गर्ल्स, मुंबई

“हम कुछ ऐसा खोज रहे थे, जो हमारे बच्चों को जीवन में और अधिक केंद्रित होने और शांति व प्रसन्नता का अनुभव पाने में मदद कर सके। आज शाम, इस डेढ घंटे में हमने वाकई बहुत कुछ सीखा। मैं इसे एक आरंभ के तौर पर देखती हूँ। मुझे पूरा यकीन है कि यह हमारे बच्चों और हमारे जीवन में एक भारी बदलाव लाएगा।” – सिस्टर  साग्या डेविड। यह अनाथालय पिछले चौरानवे सालों से चल रहा है और इसमें जाति, धर्म या संप्रदाय की परवाह किए बिना, हर तरह के बच्चों की देखभाल की जाती है।

7. डेलॉयट, हैदराबाद

“अधिकतर भाग लेने वालों को अपने घर जाने की जल्दी थी क्योंकि उस दिन शुक्रवार था और शाम के साढे पाँच हो रहे थे। हालाँकि, हमने देखा कि सत्र के दौरान वे पूरी तरह से योग में डूबे हुए थे। आखिर में, उन सबके खिले हुए और आश्चर्य से भरपूर चेहरों को देखना भी एक नया ही अनुभव था क्योंकि उन्हें तो यही लगा था कि यह किसी प्रकार का व्यायाम होगा।” – ईशा स्वयंसेवक

ईशा ने डेलॉयट, हैदराबाद के 222 एक्ज़ीक्यूटिवों के लिए पाँच सत्रों का आयोजन किया।

8. मैरीडियन स्कूल के छठे ग्रेड वाले छात्र, हैदराबाद

“मैं घुटनों के बल नहीं बैठ सकता!” “मेरी टाँगों में दर्द हो रहा है।” “क्या मैं तकिये का इस्तेमाल कर सकता हूँ?” योग नमस्कार सत्र के दौरान मुझे ऐसे शब्द सुनने को मिले। मैं अपने कानों पर यकीन नहीं कर सकी कि मैं दस साल के बच्चों के मुँह से ऐसी बातें सुन रही थी। मैंने उम्मीद तो की थी कि वे खु़शी से उछल-कूद करेंगे और उकडूँ हो कर बैठना पसंद करेंगे। कुछ बच्चों ने तो बीच में ही अभ्यास छोड़ दिया। जब उनके बीच विरोध का सुर तेज़ होने लगा तो मैंने सत्र को बीच में ही रोका, और बच्चों से उनकी आयु के बारे में पूछताछ की। वे सभी दस से बारह साल की उम्र के बच्चे थे। मैंने उन्हें दिखाया कि मैं कितनी आसानी से बैठ पा रही थी और उन्हें भी थोड़ी और कोशिश करने की प्रेरणा दी। जब यह सिलसिला जारी रहा, तो उनका केंद्र और एकाग्रता बढ़े और वे शांत हो कर, सब कुछ आसानी से कर सके।

जब सत्र के दौरान, मैंने उन छोटे-छोटे बच्चों के मुँह से तनाव, शुक्र है, रिलैक्स हो गया, स्ट्रैस आदि शब्द सुने तो मेरा मन दुखी हो गया। हमारे समाज को कुछ हो गया है, जिसमें जल्दी से जल्दी बदलाव लाने की ज़रूरत है। मेरा मानना है कि इस पीढ़ी के सभी बच्चों के लिए योग का अभ्यास अनिवार्य कर देना चाहिए वरना मैं कल्पना भी नहीं कर सकती कि जब ये पचास साल के होंगे तो इनकी क्या दशा होगी।“ – गीता, ईशा स्वयंसवेक, 150 छात्रों के लिए सत्र आयोजित किया।

कुछ बच्चों के विचार:

छात्र, आयु दस वर्ष: ”मुझे लगा कि कंधे रिलैक्स हो गए हों, सारी टेंशन कहीं भाग गई हो।“

छात्र, आयु बारह वर्ष: ”मुझे बहुत ही शांत, सहज और रिलैक्स महसूस हो रहा है। सद्गुरु! यहाँ आ कर, हमें यह सब सिखाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!“

छात्र, आयु ग्यारह वर्ष: ”मेरा सारा तनाव छूमंतर हो गया, मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, मुझे बहुत आनंद आया।“

9. वेल्लमाल विद्याश्रम ग्रुप ऑफ़ कॉलेजिस, तमिल नाडू

“मैं बहुत जीवंत महसूस कर रहा हूँ…।” छात्र, सत्र में भाग लेने वाले दो हज़ार छात्रों में से एक।

10. नारायण स्कूल, बंगलुरू

“नारायण स्कूल में हो रहे एक सत्र के दौरान, मैंने एक छात्र को बहुत ही निपुणता और सहजता के साथ योगभ्यास करते देखा। मैं उसके अनुभव को जानने के लिए उत्सुक थी। जब सत्र समाप्त हुआ तो मैंने उससे आग्रह किया कि वह अपना अनुभव मुझे बताए। उसने जवाब देने की बजाए मुझसे ही सवाल पूछ लिया, ”मुझे आपको अपने अनुभव के बारे में क्यों बताना चाहिए, यह मेरा अपना एहसास है जिसे मैं किसी के साथ नहीं बाँटना चाहता। यह मेरी अपनी खुशी है, और आप इस बारे में क्यों जानना चाहती हैं?“ मैंने एक छोटे बच्चे के मुख से ऐसी बात सुनने की उम्मीद नहीं की थी!” – भव्या, ईशा स्वयंसेवक

11. सरकारी पाठशाला, भट्टा, पारसौल, उत्तर प्रदेश

“अब हमारे पास स्कूल आने की एक ख़ास वजह आ गई है। इस तरह हमें और बेहतर सीखने में मदद मिलेगी।” – छात्र, ईशा उप-योग सत्र में शामिल होने के बाद।

12. अचला राजा नगर, बंगलुरू

“योग इस धरती पर शांति लाएगा। वृक्ष लगाना, निर्धनों की मदद करना आदि, सब कुछ योग ही है।” – छात्र

13. बेयर आर एंड डी सेंटर

बेयर आर एंड डी लीडरशिप टीम और वरिष्ठ प्रबंधक यह देख कर दंग रह गए कि इस सरल योग ने किस तरह उनके पूरे दल को प्रेरित कर दिया। हालाँकि वे लोग पहले राज़ी नहीं थे, पर अब वे हमें नियमित रूप से और सत्र आयोजित करने के लिए कह रहे हैं। वे इस योगदान से इतने द्रवित हुए कि उन्होंने हमें बेयर यादगार से नवाज़ा, और अपने केंद्र की कैंटीन में एक बढ़िया, सेहतमंद और आर्गेनिक लंच भी करवाया।  – शुभाशीष घोष, ईशा स्वयंसवेक

14. किसान मजदूर आदर्श कॉलेज, आजादपुर, उत्तर प्रदेश

“बच्चे प्रायः मिड-डे मील के लिए ही स्कूल आते हैं पर हम देख रहे हैं कि उप-योग सत्र में भाग लेने के लिए और अधिक बच्चे स्कूल आने लगे हैं!”- अध्यापक

15. आर वी गर्ल्स स्कूल, जयनगर बंगलुरू

“जब अभ्यास के आरंभ में सभी लड़कियाँ हर चरण में खिलखिलाने लगीं तो मेरे लिए उन्हें संभालना कठिन हो गया। हाथों, पैरों और गर्दन की हर गतिविधि के साथ ही उनकी हँसी छूट जाती, उनके लिए यह सब किसी तमाशे से कम नहीं था! नाद योग में ‘आ….’ की ध्वनि ऐसी लग रही थी मानो कुछ खिलखिलाहटों के बीच सद्गुरु मंत्रजाप कर रहे हों। पर जब शांभवी मुद्रा का समय आया, तो वे सभी अचानक बिलकुल शांत हो गईं, मानो किसी विराट शक्ति ने उन्हें छू लिया हो। वे सत्र समाप्त होने के बाद भी आपस में बात नहीं कर रही थीं। मैं इन प्यारी लड़कियों में होने वाले इस रूपांतरण के अपने अनुभव को भी प्रकट नहीं कर सकता – मानो वे अचानक ही परिपक्व हो उठी हों।” – ईशा स्वयंसेवक

16. आर वी गर्ल्स स्कूल, जयनगर बंगलुरू

“मैंने स्वयं को शांत महसूस किया। अगर मैं रोज़ ध्यान करूँ तो मैं इसी तरह शांतिपूर्ण हो जाऊँगी जिससे मुझे अपने अध्ययन में मदद मिलेगी।” फातिमा, छात्रा


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