ईशा ग्रामोत्सवम – 2016 : ग्रामीण जीवन को बदलने की एक पहल


ईशा ग्रामोत्सव महज एक उत्सव, एक आयोजन नहीं बल्कि एक रूपांतरण की राह है जो सद्गुरु ने दिखाई है। इस आयोजन में एक तरफ खेल होते हैं जो ग्रामीण जीवन में फैले हर तरह के भेदभाव को मिटा कर निर्मल आनंद का संचार करते हैं तो दूसरी तरफ सांस्कृतिक उत्सव होते हैं जो तमिलनाडु के लोक कलाओं और संस्कृति को अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाने का महान कार्य करते हैं। लेकिन कैसे? आइए जानते हैं:

21 अगस्त, रविवार से कोयंबटूर, तमिलनाडु में नौ स्थानों पर डिविजन स्तर के मैचों और उत्सवों के साथ ईशा ग्रामोत्सवम के आखिरी दौर की शुरुआत हो गई। इस वर्ष ईशा ग्रामोत्सवम में कुल 880 टीमें और 10,360 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं।

ईशा ग्रामोत्सवम के पीछे एक अनूठी दृष्टि है – एक ऐसे समाज की कल्पना जहां आनंद और उत्साह से भरे हुए लोग बाकी लोगों के लिए रूपांतरण का स्रोत बन जाएं। खेल लोगों के बीच दोस्ती और एकता को बढ़ावा देता है और एक सेहतमंद व जीवंत समुदाय का निर्माण करता है।

गाँव के लोगों की राय

इस आयोजन को लेकर गांव वालों का कहना था, ‘इस आयोजन में लोग जाति-वर्ग, अमीर-गरीब के भेदभाव से ऊपर उठकर खेलते हैं। मालिक और कर्मचारी, भूस्वामी और मजदूर एक साथ खेलते हैं। सच कहें तो इन खेलों ने हमें एक साथ ला खड़ा किया है। पहले यहां के लोगों के लिए मनोरंजन का साधन ताश खेलना, बीड़ी-सिगरेट और शराब पीना था। ईशा के आने के बाद सबने बुरी आदतें छोड़ दीं। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, लोग काम पर जाते हैं, योग करते हैं और फिर खेलते हैं।’

इस बार जिन 9 गांवों में डिविजनल स्तर के मैच खेले गए, वहां इन उत्सवों को प्रत्यक्ष रूप में देखा जा सकता था। सुबह 9 बजे वॉलीबॉल मैच शुरू हुए। गांववालों ने पोंगल की तैयारी, रंगोली प्रतियोगिता, बोरी दौड़, नींबू और चम्मच दौड़, 3 टांग की दौड़, म्यूजिकल चेयर, उरियाडी (घड़ा तोड़ना), जैसे पारंपरिक खेलों और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। बच्चे-बड़े, स्त्री-पुरुष, जवान-बुजुर्ग, हर किसी ने इन खेलों में शामिल होकर आनंद का अनुभव किया। अंत में रस्साकशी और वालुक्कू मारम (तेल लगे पोल पर चढ़ना) के खेल हुए।

4 सितम्बर को होगा अंतिम मुकाबला

साढ़े पांच बजे सभी 9 जगहों पर पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया, जहां स्थानीय अधिकारियों जैसे जिला कलक्टर, डीएसपी आदि ने विजेता और रनर अप टीमों को पुरस्कार देते हुए गांववालों को प्रोत्साहित किया। इसके बाद सभी गांवों में शाम 6 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसका मकसद खास तौर पर तमिलनाडु के लुप्त हो रहे 40 लोक कला रूपों जैसे डिक्कटम, ओलट्टम, सक्काई कुचियट्टम, कोक्किलियट्टम, विलुपट्टू आदि को पुनर्जीवित करना था। इन लोककलाओं के चंद बचे हुए कलाकारों को अपनी कला दिखाने का अवसर दिया गया। इसके बाद वहां मौजूद सभी लोगों के लिए अन्नदानम यानी भोजन की व्यवस्था थी।

आज के मैचों की विजेता टीमें क्वाटर फाइनल में खेलेंगी। उसमें से 4 टीमें सेमीफाइनल खेलेंगी। दोनों मैच 3 सितंबर को कोडिसिया मैदान में होंगे। ग्रैंड फिनाले 4 सितंबर, 2016 को कोडिसिया मैदान, कोयम्बतूर में ईशा फाउंडेशन के संस्थापक, योगी और दिव्‍यदर्शी सद्गुरु तथा भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख बल्लेबाज शिखर धवन की मौजूदगी में होगा। शिखर धवन फाइनलिस्टों का उत्साह बढ़ाएंगे और विजेता तथा रनर अप टीमों को पुरस्कार देंगे।

ईशा कायाकल्प कप

ईशा कायाकल्प कप ग्रामीण तमिलनाडु में एक महीने से चल रहे खेल समारोह का चरम परिणाम है। इस कार्यक्रम में पुरुषों के लिए वॉलीबॉल और स्त्रियों के लिए थ्रो बॉल प्रतियोगिताएं होती हैं। यह टूर्नामेंट एक अवसर है हर ग्रामीण – चाहे वह वह किसी भी जाति, धर्म, वर्ग, लिंग या आयु का हो – के लिए खेल के आनंद और प्रतियोगिता व सहयोग की भावना में आनंदित होने का। इस टूर्नामेंट में हर गांव अपनी टीम भेज सकता है। राज्य भर में आयोजित होने वाले पहले और दूसरे दौर के मैचों के बाद, आखिरी आठ विजेता टीमें ईशा ग्रामोत्सवम 2016 के खिताबी मैचों में भिड़ने की तैयारी करेंगी।

ग्रैंड फिनाले में कबड्डी के मैच, ग्रामीण संस्कृति के स्वाद का जश्न मनाने के लिए ग्रामीण फूड फेस्टिवल, पारंपरिक खेल और तमिलनाडु की प्राचीन परंपराओं का उत्सव मनाने के लिए विभिन्न लोक कला प्रस्तुतियां भी होंगी।

खेल क्यों जरुरी हैं

खेल लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ और समर्थ बनाता है, समुदायों को अपने मतभेदों से ऊपर उठ कर रूपांतरित करने में मदद करता है और समाज को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करता है। ईशा के ग्रामीण कायाकल्प कार्यक्रम में गांवों में उत्साह तथा एकता को बढ़ावा देने में खेल की प्रमुख भूमिका रही है। यह रूपांतरण का एक जरिया बन गया है जो ग्रामीणों को नशे की आदत से दूर ले जा रहा है, जा‍त-पांत की दीवारें गिरा रहा है, महिलाओं को घर से बाहर ला रहा है और उनका सशक्तीकरण कर रहा है। साथ ही लोगों में उत्साह और गर्व की भावना पैदा कर रहा है।

ईशा ग्रामोत्सवम

ईशा ग्रामोत्सवम ग्रामीण जीवन का एक उत्सव है जो ग्रामीण खेलों, कला, नाटक, नृत्य, संगीत और व्यंजनों की एक व्यापक प्रदर्शनी के जरिये ग्रामीण तमिलनाडु के मूल तत्व को प्रदर्शित करता है। यह कार्यक्रम गांवों के बीच होने वाले खेल टूर्नामेंट के आखिरी दौर के द्वारा ग्रामीण जीवन में खेल की भूमिका को सामने लाएगा। यह उत्सव ईशा फाउंडेशन के संरक्षण में एक ग्रामीण पुनरुद्धार कार्यक्रम, ग्रामीण कायाकल्प कार्यक्रम का एक अंग है। ग्रामीण कायाकल्प कार्यक्रम बेहतर सेहत, रोजगार और सामुदायिक पुनरुद्धार का एक व्यापक नजरिया है। अब तक 4600 गांव और बयालीस लाख लोग इसके संपर्क में आ चुके हैं।


संपादक की टिप्पणी:

हम आपको 4 सितम्बर के दिन, कोडिसिया मैदान, कोयम्बतूर में होने वाले ईशा ग्रामोत्सवं उत्सव में आमंत्रित करते हैं। लोगों के सशक्तिकरण, समुदाय के रूपांतरण और सभी में सकारात्मक भावना का संचार करने वाले इन खेलों के बारे में जानें…

 

 


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