भारत के सबसे कम उम्र के योग शिक्षक?

ईशा विद्या के विद्यार्थी, ईशा योग केंद्र में निःशुल्क उप-योग अभ्यासों के सत्र सिखाने के लिए, कक्षा में आगे की ओर जाते हुए।  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर, निःशुल्क योग सिखाया जा रहा है। 

यदि आप अगले कुछ दिनों में ईशा योग केंद्र आने के बारे में सोच रहे हैं, तो उसमें उप-योग के एक सत्र के लिए आधे घंटे का समय जरूर रखें। आगामी 21 जून को दूसरे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के सम्मान में यह नि:शुल्क सिखाया जाएगा।

हो सकता है कि सत्र के दौरान आपको अपना शिक्षक उम्मीद से कहीं कमउम्र लगे! तमिलनाडु के 8 ईशा विद्या स्कूलों के आठवीं और नवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने कोयंबटूर के ईशा योग केंद्र आने वाले सभी आगंतुकों और स्वयंसेवकों – जिन्हें भी इसमें दिलचस्पी हो – को दैनिक योग सत्र सिखाने का जिम्मा लिया है। 13-14 साल के इन प्रतिभाशाली और उत्साही विद्यार्थियों को शिक्षक के काम के साथ-साथ और भी बहुत सी चीजों के लिए प्रशिक्षित किया गया है। वे कक्षाओं के सभी पहलुओं का ध्यान रखेंगे, जैसे नामांकन, प्रचार और सत्रों का संचालन। इन कक्षाओं का उद्देश्य सेहत, तनाव रहित जीवन और आंतरिक खुशहाली है।

ये सत्र 16 अप्रैल से 29 मई तक हर दिन सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक सिखाये जा रहे हैं। ये सत्र तक तमिल में हैं, और इन आधे घंटे के सत्रों में 30 से अधिक विद्यार्थी हर सप्ताह भाग ले रहे हैं। अंग्रेजी में विशेष सत्र भी चलाए जा रहे हैं। अब तक, इस परियोजना को बहुत उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया मिली है और सिर्फ 12 दिनों में 7000 लोगों ने नामांकन कराया है।

पहले तो हमें सामने खड़ा होकर सिखाने में घबराहट महसूस हो रही थी मगर अब हमें माइक्रोफोन पकड़ने की आदत पड़ गई है। अब हम पूरे आत्मविश्वास के साथ निर्देश देते हैं और योग के फायदे समझाते हैं।

ईशा विद्या के विल्लुपुरम स्कूल के विद्यार्थियों का एक समूह एक सप्ताह से ईशा योग केंद्र में ही रह रहा है। ये समूह स्कूल की छुट्टियों के दौरान मिले खाली समय का इस्तेमाल इस परियोजना में भाग लेने के लिए कर रहा है। 13 साल की संध्या ने बताया, ‘जब हम यहां पहुंचे, तो हमें पता था कि हमें स्वयंसेवा करनी है, मगर यह जानकर हम हैरत में पड़ गए कि हमें योग की कक्षाएं लेनी हैं। हमने सीखा है कि सत्रों का संचालन कैसे करना है, और हम एक-दूसरे को फीडबैक देते हैं कि हम कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं, कैसे खड़े होते और बोलते हैं। पहले तो हमें सामने खड़ा होकर सिखाने में घबराहट महसूस हो रही थी मगर अब हमें माइक्रोफोन पकड़ने की आदत पड़ गई है। अब हम पूरे आत्मविश्वास के साथ निर्देश देते हैं और योग के फायदे समझाते हैं।’ कक्षा के बाहर दूसरे विद्यार्थी नामांकन फॉर्म संभालते हैं और आश्रम आने वाले लोगों को सत्रों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। विनीता, जिनकी उम्र 13 साल है, बताती हैं, ‘वे आकर योग सीखने के लिए काफी उत्साहित हैं। हर कोई हमसे कक्षाओं के बारे में पूछ रहा है।’

हालांकि ये विद्यार्थी शिक्षण के काम में नौसिखिया हैं, मगर योग अभ्यास उनके लिए कोई नई चीज नहीं हैं। स्कूली सत्र के दौरान ईशा विद्या के पाठ्यक्रम में हर सुबह योग की कक्षाएं शामिल होती हैं। विनीता कहती हैं, ‘जब हम योग अभ्यास करते हैं, तो मैं ज्यादा स्फूर्ति और ताजगी महसूस करती हूं। उसके बाद मैं अपना काम गंभीरता और ईमानदारी से करती हूं।’

आश्रम, जिसे लड़कियां ‘स्वर्ग’ बताती हैं, में एक सप्ताह रहने के बाद विद्यार्थियों को वापस जाने का मन नहीं कर रहा, मगर साथ ही वे घर जाकर दोस्तों, परिवार और बाकी लोगों को योग सिखाने के लिए उत्साहित हैं। संध्या बताती हैं, ‘वे हमसे सीखने के लिए बहुत उत्सुक हैं। हमसे उम्र में बड़े होने के बावजूद वे हमसे सुनना और सीखना चाहते हैं।’

उप-योग एक सरल किंतु शक्तिशाली प्रक्रिया है, जो जोड़ों, मांसपेशियों और ऊर्जा प्रणाली को जाग्रत करते हुए भौतिक जीवन को पूरी संपूर्णता में जीने में समर्थ बनाता है। 21 जून, 2015 को पहले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर इन अभ्यासों को लाइव सत्रों में और ऑनलाइन कई रूपों में उपलब्ध कराया गया था, जिनसे करीब 120 लाख लोगों ने लाभ उठाया।

हाल के एक स्पॉट में, सद्गुरु ने आगामी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की अपनी योजनाओं को साझा किया था: ‘हम मानवता के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी ‘बच्चों’ तक पहुंचना चाहते हैं।’ उन्होंने भारत के कम से कम दस हजार स्कूलों को शामिल करने का लक्ष्य रखा है। इससे अस्सी-नब्बे लाख बच्चों के जीवन में योग को शामिल किया जा सकता है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया YogaYoga.org पर जाएं और जानें कि आप इन प्रयासों का हिस्सा कैसे बन सकते हैं।


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