शिवांग साधना – 42 दिनों की एक अनोखी साधना

 सद्‌गुरुदेखें ये वीडियो और जानें शिवांग साधना के बारे में। 42 दिनों की इस साधना की दीक्षा 1 जनवरी के दिन आपके शहर में होगी। इस दीक्षा में शक्तिशाली योग अभ्यास शिव नमस्कार में दीक्षा भी शामिल है। ये साधना महाशिवरात्रि के दिन तक चलेगी।

शिवांग का अर्थ है, एक अंग बन जाना। शिव के शरीर का एक अंग।

शिव का एक अंग होने की जागरूकता

आप वैसे भी शिव के अंग हैं। शि-व का अर्थ है, वह जो नहीं है। वह, जो नहीं है, उसके विशाल शरीर के कुछ अंग हैं। हो सकता है की एक अंग आकाशगंगा हो, एक कोई तारा हो, एक सौरमंडल हो, एक कोई ग्रह हो, कोई अणु हो, या ‘आप’ सकते हैं। मगर ये सभी शिव के अंग ही हैं, है न? क्योंकि ये सभी चीजें शून्य से निकली हैं। आप शिव के ही एक अंग हैं, मगर आप उस जागरूकता के बिना जी रहे हैं। तो यह साधना तैयार की गई है, आपके अंदर यह जागरूकता लाने के लिए।
क्या आपका अस्तित्व हो सकता है बाकी ब्रह्मांड के साथ जुड़े बिना? जब मैं ब्रह्मांड कहता हूं, तो मतलब चाँद तारों से नहीं है। ब्रह्मांड की शून्यता से जुड़े बिना, क्या आप एक पल के लिए भी यहां मौजूद रह सकते हैं? नहीं, है न?
वैसे भी, आप शिव का एक विस्तार हैं। शि-व – मैं चाहता हूं कि आप इसे समझें… मैं कैलेंडर वाले भगवान को आपके दिमाग से निकालना चाहता हूँ, ताकि आप समझें कि शिव का अर्थ अस्तित्व का असीमित विस्तार… या वह, जो नहीं है। आपका अस्तित्व उसका एक अंग है।
चाहे आप एक अणु हैं, या पुरुष, या स्त्री, या पेड़, या ग्रह, या सौर मंडल, या ब्रह्मांड, आप फिर भी एक शिवांग हैं। मगर आप उस जुड़ाव के प्रति जागरूक हुए बिना जी रहे हैं।
इंसानी अस्तित्व की प्रकृति ऐसी है, कि आप जिस चीज के प्रति जागरूक नहीं हैं, आपके लिए उसका अस्तित्व ही नहीं होता, है न? हां? आप जिस चीज के प्रति जागरूक हैं, वही आपके लिए मौजूद है। जिसके प्रति आप जागरूक नहीं हैं, वह चाहे कितना भी बड़ा हो, उसका आपके लिए बिल्कुल भी अस्तित्व नहीं होता।

बयालीस दिन की प्रक्रिया से अनुभव हो सकता है

तो… यह कोई नई चीज नहीं है। आप पहले से ही शिव के अंग हैं, मगर हम इसे आपकी जागरूकता में लाना चाहते हैं, अनुभव से, किसी फिलोसफी के रूप में नहीं, विचारधारा के रूप में नहीं, शिक्षा के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव के रूप में। इसलिए एक पूरी प्रक्रिया बनाई गई है, जो करीब बयालीस दिन की है, ताकि आप उस अनुभव को पाने के लिए इस पूरी प्रक्रिया से गुजरें, अपने जीवन में इसे स्थापित करें कि आप वाकई शिव के एक अंग हैं।

अगर आप पूरे ब्रह्मांड से जुड़ा हुआ महसूस करते, तो क्या आपके अंदर डर होता, अकेलापन होता, क्या आप दुनिया में जद्दोजहद करते? क्या आप करते? चूंकि आप समझते हैं कि आप एक अलग अस्तित्व हैं, आप अस्तित्व का एक अनूठा अंश हैं, जो अपने आस-पास किसी चीज से जुड़ा हुआ नहीं है, इसीलिए आपको दुख होता है, आप अकेलापन महसूस करते हैं, जद्दोजहद करते हैं, डरते हैं, है न? इसीलिए मृत्यु भी है।
अगर आप शिव के एक अंग हैं, तो आप मरने पर भी उसी में रहेंगे, परेशानी क्या है? अगर आप इस विशाल शून्यता के एक विस्तार के रूप में खुद का अनुभव करते, अगर यह नष्ट हो जाए, तो भी आप उसका ही एक हिस्सा रहेंगे, समस्या क्या है?
चूंकि अभी वह अनुभव नहीं है, हर छोटी से छोटी प्रक्रिया में इतना कष्ट है। अभी सब कुछ एक संघर्ष है। जन्म एक बड़ा संघर्ष है, बड़ा होना एक संघर्ष है, बूढ़ा होना एक संघर्ष है, मरना एक बड़ा संघर्ष है।

आत्म ज्ञान एक स्वाभाविक प्रक्रिया होनी चाहिए

ये सब ऐसी चीजें हैं जिन्हें सहज रूप में होना चाहिए, क्योंकि यह एक कुदरती प्रक्रिया है। आपको बड़ा होने के लिए कुछ करना नहीं पड़ता, है न? हां कि नहीं? ये अपने आप हो रहा है, आपको क्या करना है? ये अपने आप हो रहा है, आपको बस उसमें मदद करनी है। मगर आप इतना बतंगड़ बना रहे हैं, क्योंकि आपको लगता है कि आप पृथ्वी को घुमा रहे हैं, आप पूरा ब्रह्मांड चला रहे हैं, और आपको ही हर व्यवस्था करनी है। नहीं। अगर आप अस्तित्व की असीमित प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं, तो जो सीमित है, वह सहजता से होता रहेगा। आपका शरीर, दिमाग, जीवन, आपकी आध्यात्मिक प्रक्रिया, आपकी मुक्ति को सहजता से होना चाहिए, क्योंकि यह एक इंसान के लिए कुदरती चीजें हैं।
अगर आप आम का बीज बोते हैं, तो आपको जाकर आम के पेड़ को सिखाना नहीं पड़ता कि ‘आम कैसे उगाएं,’ है न? अगर उसे अच्छा पोषण मिला है, तो उसमें आम लगेंगे।
इसी तरह, अगर एक इंसान को पूरा पोषण मिला है और वह एक पूर्ण विकसित इंसान बन जाता है, तो आत्मज्ञान प्राप्त करना, मुक्ति पाना, एक कुदरती प्रक्रिया होनी चाहिए। यही जीवन की प्रकृति है। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसके लिए मुझे आपको विवश करना पड़े, इसे अपने आप होना चाहिए।

खुद को अलग अस्तित्व मानने से पैदा हुए हैं संघर्ष

चूंकि अभी आपको लगता है कि आप एक अलग अस्तित्व हैं… अभी आप बाकी के साथ अपनी एकरूपता के प्रति अचेतन हैं – यही वजह है कि यह संघर्ष चल रहा है। चाहे सेहत हो, दिमागी संतुलन हो, डर हो, या ख़ुशी हो… इन सभी चीजों का आधार बस इसमें है, कि अभी आप इस छलावे में हैं, कि आप अपने आप में एक अलग अस्तित्व हैं। अगर आपको मेरी बात समझ नहीं आ रही, तो बस अपना मुंह बंद करें, दो मिनट के लिए अपनी नाक इस तरह पकड़ें, आप समझ जाएंगे कि आप बाकी के अस्तित्व के साथ जुड़े हुए हैं। हां या नहीं?
अगर आप वाकई अलग हो जाएं, तो आप मर जाएंगे, आपका अस्तित्व खत्म हो जाएगा। आपका अस्तित्व सिर्फ इस संबंध के कारण संभव है।
लेकिन दुर्भाग्य देखिए… आप इतनी जबर्दस्त किसी चीज से जुड़े हैं, और उसके प्रति जागरूक नहीं हैं, उसे नहीं जानते, उसका आनंद नहीं महसूस करते… मेरे ख्याल से यह एक अपराध है। तो शिवांग बस उस अपराध से बचने के लिए है।

सेहत इसका सिर्फ एक साइड इफ़ेक्ट है

इसके कई फायदे होंगे: सेहत, खुशहाली, सभी चीजों में… मगर ये सिर्फ साइड इफेक्ट्स हैं। मुझे इनसे मतलब नहीं है, लेकिन अगर आपको मतलब हो, तो मैं आपको बता रहा हूं कि शारीरिक संतुलन, दिमागी संतुलन, सेहत, खुशहाली, ये चीजें होंगी। मगर मेरे ख्याल से एक इंसान को इसकी परवाह भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि आपके शरीर की हर कोशिका स्वस्थ रहने के लिए बनी है। खराब सेहत सिर्फ इसलिए होती है क्योंकि हम कहीं न कहीं उसके साथ तालमेल खो देते हैं।
अगर हम जीवन के इस आयाम से जुड़ जाते हैं, तो सेहत, खुशहाली, समृद्धि… ये चीजें अपने आप होनी चाहिए। सबसे बढ़कर, आनंदपूर्वक जीना एक कुदरती प्रक्रिया हो जाएगा।
इसलिए यह एक मूलभूत प्रक्रिया है, जिसे आपके अंदर सही वातावरण तैयार करने के लिए बनाया गया है। चाहे आप कोई भी क्रिया करें, आपको एक सही वातावरण की जरूरत होती है। अगर वातावरण नहीं होगा, तो कोई चीज ठीक से काम नहीं करेगी। यह जीवन की सच्चाई है।

शिवांग साधना के अलग-अलग पहलू

साधना के समय का मतलब है कि यह विनम्रता लाने का समय है, इस तरह जीने का समय है मानो आप बस इस धरती के एक और जीव हैं, जो आप हैं। आपके अंदर कल्पनाएं हो सकती हैं, मगर हकीकत यह है कि आप बस इस धरती के एक और जीव हैं। और बस एक और जीव होना कोई बुरी चीज नहीं है। यह एक बड़ा वरदान है। वरना आप सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक मामला बन जाएंगे।
तो, यह समझने का समय है कि आप सिर्फ एक और जीव हैं, आप कुछ और नहीं हैं। इस साधना को आपके अंदर और गहराई तक इस बात को पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है, क्योंकि सिर्फ एक जीवित वस्तु ही विकसित हो सकती है।
तो, यह साधना इस तरह बनाई गई है… इसके कई पहलू हैं। पहला है, शरीर को एक खास तरह से इस्तेमाल करना। एक सरल प्रक्रिया है, शिव नमस्कार, जिसे इस साधना को करने वाले लोगों को करना है। और… अगर आप चाहें तो हम इसे दिखा सकते हैं… मगर वैसे वे दीक्षा के दिन आपको सिखाएंगे ही।
और साधना की एक महत्वपूर्ण बात यह है… कि आपको बाहर जाकर कम से कम इक्कीस लोगों से कुछ भिक्षा मांगनी है। और जब वे आपको कुछ देते हैं, तो आपको नहीं देखना चाहिए कि वे क्या दे रहे हैं। मान लीजिए, वे आपको पच्चीस पैसे का सिक्का देते हैं… “भाड़ में जा”…
तो आपको अपने हाथ फैलाने हैं और याचना की नजर से उनका चेहरा देखना है। जब वे दे रहे हों, तो आपको अपनी आंखें बंद कर लेनी हैं, ये नहीं देखना है की वे क्या दे रहे हैं। ग्रहण करना सीखना है – चाहे वो एक रुपया हो या एक लाख हो, उसे एक ही भावना के साथ ग्रहण करना है।

जब आप दें, तो आपको देखना चाहिए कि आप क्या दे रहे हैं, क्योंकि वैसे भी आप जितना दे सकते हैं, उससे कम ही देंगे। (हंसी) मगर जब आप ग्रहण करते हैं, तो आपको आंखें बंद कर लेनी चाहिए, चाहे वे कुछ भी दें, चाहे वह एक रुपया हो या एक लाख रुपये या कुछ और, आपको कृतज्ञता की उसी भावना से उसे ग्रहण करना चाहिए।
और जब आप देते और लेते हैं, तो वह सिर्फ लेन-देन हो सकता है… या समावेश की प्रक्रिया बन सकता है। हर चीज जो आप अपने हाथों में लेते हैं और किसी को देते हैं, हर चीज़ जो कोई लेता है और आपको देता है, वह साझा करने का एक तरीका बन सकता है और बहुत कुछ बन सकता है। यह आप जो हैं, उसकी सीमाओं को तोड़ने का एक तरीका बन सकता है।
तो साधना का मकसद यह है, ग्रहण करना… हम नहीं जानते कि वे आपको क्या देंगे। चाहे वे आपको एक पैसा दें या एक करोड़ रुपये, पता नहीं कि वे आपको क्या देंगे… मगर उस एक पैसे को ग्रहण करने के लिए, आपको अपना कुछ खोना करना पड़ेगा… आपका गर्व, आपका अहंकार, आप कौन हैं इसका एहसास, इन चीजों को एक ओर रखकर जाकर मांगना, बिना कमीज के। कमीज पहनकर आप एक बड़े आदमी बन जाएंगे।
आपको बिना कमीज के जाना है, और कम से कम इक्कीस लोगों से मांगना है – आप चाहें तो दो सौ लोगों से भी मांग सकते हैं – मगर आपको कम से कम इक्कीस लोगों से जाकर कुछ मांगना है। और आप जो कुछ भी इकट्ठा करते हैं, उसे यहां मौजूद और महाशिवरात्रि और दूसरे दिनों में यहां आने वाले बहुत से लोगों को भोजन कराने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।


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