• महत्वाकांक्षा – कई जन्मों को एक सूत्र में बाँध देती है

  • सद्‌गुरु का हवाई अड्डे से एक संदेश

  • पृथ्वी दिवस – जानें धरती से जुड़ने के सरल तरीके

  • सबसे नशीला नशा कौन सा है?

  • अध्यात्म में जीवनसाथी का सहयोग न मिले तो क्या करें?

  • नवजात शिशु क्या सातों चक्रों के साथ पैदा होता है?

  • दुर्योधन ने पिछले जन्मों में कौन से बुरे कर्म किए थे?

  • गुरु के साथ होने का क्या मतलब होता है?

नये ब्लॉग पोस्ट

महत्वाकांक्षा – कई जन्मों को एक सूत्र में बाँध देती है

हम सब बहुत सारी चीज़ों की इच्छा करते हैं, लेकिन हमारे भीतर कोई महत्वाकांक्षा भी है? कहीं हम अपनी इच्छा को ही तो महत्वाकांक्षा... ...
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सद्‌गुरु का हवाई अड्डे से एक संदेश

अपनी यात्राओं और कार्यक्रमों की व्यस्तता के बीच सिंगापुर हवाई अड्डे से लिखते हुए सद्‌गुरु हमसे अपने गुजरे सप्ताह की बातें साझा कर रहे... ...
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पृथ्वी दिवस – जानें धरती से जुड़ने के सरल तरीके

मिट्टी को कई लोग गंदगी समझते हैं। लेकिन, मिट्टी जो धरती का हिस्सा है, इसे गंदगी समझना क्या ठीक है? जानते हैं कुछ सरल... ...
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अध्यात्म में जीवनसाथी का सहयोग न मिले तो क्या करें?

अगर किसी आध्यात्मिक साधक का जीवनसाथी उसकी साधना में सहयोग न दे, तो संघर्ष या टकराव होना स्वाभाविक है। ऐसे में क्या करना चाहिए?... ...
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नवजात शिशु क्या सातों चक्रों के साथ पैदा होता है?

गर्भधारण के बाद भ्रूण में ऊर्जा चक्र कब और कैसे बनते हैं? सद्‌गुरु उसकी प्रक्रिया और समय के बारे में बता रहे हैं, और... ...
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दुर्योधन ने पिछले जन्मों में कौन से बुरे कर्म किए थे?

दुर्योधन महाभारत का एक ऐसा पात्र था जिसके पूर्व जन्मों का कोई वर्णन नहीं मिलता। महर्षि वेद व्यास ने हर किरदार के पिछले जन्म... ...
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गुरु के साथ होने का क्या मतलब होता है?

सद्‌गुरु अकसर कहते हैं, ‘बी विद मी’ यानि ’मेरे साथ रहिये’। तो क्या इसका मतलब है कि शारीरिक तौर पर उनके साथ रहा जाए।... ...
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